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Cardio VS Weight Lifting: कार्डियो या वेट लिफ्टिंग क्या करने से जल्दी घटता है वजन? Gym जाते हैं तो जरूर जान लें

कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज में रनिंग, साइकिलिंग, तैराकी और पार्क में जॉगिंग करना जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। कार्डियो एक्सरसाइज कैलोरी बर्न करने का बेहतरीन तरीका हैं। वहीं, आप जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उसका उतना ही असर आपके शरीर पर मौजूद चर्बी या मोटापे पर पड़ता है।
Written by: हेल्थ डेस्क | Edited By: Shreya Tyagi
नई दिल्ली | Updated: March 16, 2024 17:56 IST
cardio vs weight lifting  कार्डियो या वेट लिफ्टिंग क्या करने से जल्दी घटता है वजन  gym जाते हैं तो जरूर जान लें
बात वेट लिफ्टिंग की करें, तो इसे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस ट्रेनिंग के नाम से भी जाना जाता है। (P.C- Freepik)
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आज के समय में अधिकतर लोग बढ़ते वजन से परेशान हैं। वहीं, बात जब इसे कंट्रोल करने की आती है तो इसके लिए दो तरीके सबसे जरूरी बताए जाते हैं, पहला सही खानपान और दूसरा नियमित एक्सरसाइज। एक्सरसाइज के लिए भी ज्यादातर लोग जिम जाना सही समझते हैं। ऐसे में वे अक्सर इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि जल्दी वजन पर काबू पाने के लिए कार्डियो करना ज्यादा बेहतर है या वेट लिफ्टिंग? यहां हम आपको इसी सवाल का जवाब देने वाले हैं। आइए जानते हैं मोटापे से जल्द छुटकारा पाने में कार्डियो या वेट लिफ्टिंग क्या ज्यादा फायदेमंद है-

कार्डियो

सबसे पहले बात कार्डियो की करें, तो कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज में रनिंग, साइकिलिंग, तैराकी और पार्क में जॉगिंग करना जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। कार्डियो एक्सरसाइज कैलोरी बर्न करने का बेहतरीन तरीका हैं। वहीं, आप जितनी कैलोरी बर्न करते हैं, उसका उतना ही असर आपके शरीर पर मौजूद चर्बी या मोटापे पर पड़ता है। खासकर दौड़ने और साइकिल चलाने जैसी गतिविधियों से आप कम समय में अच्छी संख्या में कैलोरी बर्न कर सकते हैं, जिससे आपके वजन पर सीधा असर पड़ता है। हालांकि, एक समय के बाद आपका शरीर कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज के अनुकूल हो सकता है यानी जब आप लंबे समय तक इस तरह की एक्सरसाइज करते हैं, तो एक समय बाद इससे आपके वजन कम होने में रुकावट आ सकती है। ऐसे में अपने वर्कआउट में बदलाव करना और खासकर तीव्रता बढ़ाना जरूरी है।

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आसान भाषा में समझें तो अगर आप रोज 1 किलोमीटर तक दौड़ते हैं या 1 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं, तो एक समय बाद आपकी बॉडी इसकी आदी हो सकती है। ऐसे में समय के साथ आपके लिए दूरी बढ़ाना जरूरी हो जाता है। जब आपको 1 किलोमीटर तक दौड़ना आसान लगे, तब आप इसे अधिक बढ़ाकर 2 किलोमीटर तक दौड़ने की कोशिश करें।

ये हो सकते हैं नुकसान

कार्डियो यकीनन मोटापे को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, लंबे समय तक इस तरह की एक्सरसाइज संभावित रूप से मांसपेशियों की हानि का कारण भी बन सकती हैं। कार्डियो दरअसल, शरीर में जमा फैट को एनर्जी के लिए उपयोग करता है, यानी जब आप कार्डियो करते हैं तो आपके शरीर में जमा जिद्दी चर्बी अधिक एनर्जी पैदा करने के लिए पिघलने लगती है, हालांकि ये समय के साथ मस्कुलर टिशु को भी तोड़ सकता है, जिससे मांसपेशियों की हानि होने लगती है।

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वेट लिफ्टिंग

अब, बात वेट लिफ्टिंग की करें, तो इसे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या रेजिस्टेंस ट्रेनिंग के नाम से भी जाना जाता है। वहीं, वेट लिफ्टिंग एक्सरसाइज से आपकी मसल्स टोन होती हैं और जैसे-जैसे आप मांसपेशियों को बढ़ाते हैं, आपके शरीर का रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट भी बढ़ जाता है, जिससे वजन घटाने और लंबे समय तक संतुलित वजन बनाए रखने में आसानी होती है। वेट ट्रेनिंग से चेस्ट, शोल्डर, हिप और साइड फैट को टोन किया जा सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वेट लिफ्टिंग के बाद बॉडी आफ्टरबर्न प्रभाव महसूस करती है, जहां वर्कआउट खत्म होने के बाद भी आपका शरीर उच्च दर पर कैलोरी जलाना जारी रखता है।

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ये हो सकते हैं नुकसान

नियमित वेट लिफ्टिंग करने से आपको मांसपेशियों में तेज दर्द और ऐंठन का सामना करना पड़ सकता है, खासकर शुरुआती चरणों में ये दर्द अधिक होता है। ऐसे में वेट लिफ्टिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने में आपको लंबा समय भी लग सकता है। साथ ही इस दौरान चोट लगने के चांस भी अधिक होते हैं। ऐसे में वेट लिफ्टिंग करते समय अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है और खासकर शुरुआती दौर में चोट के जोखिम को कम करने के लिए उचित रूप और तकनीक और योग्य ट्रेनर की जरूरत होती है।

क्या है ज्यादा बेहतर?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वेट लिफ्टिंग की तुलना में कार्डियो से आपको जल्दी वजन कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही ये कुछ हद तक बेहतर ऑप्शन भी है क्योंकि कार्डियो करने के लिए आपको ज्यादा गाइडिंग की जरूरत नहीं पड़ती है जबकि वेट लिफ्टिंग के लिए आपको ट्रेनर चाहिए होता है। हालांकि, इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि एक समय बाद कार्डियो का असर कम हो सकता है जबकि वेट लिफ्टिंग का असर लंबे समय तक रहता है। ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट्स आदर्श रूप से, कार्डियो और वेट लिफ्टिंग दोनों के संयोजन को वर्कआउट रूटीन में शामिल करने की सलाह देते हैं।

यानी अगर आप 1 घंटे के लिए जिम जाते हैं या घर पर ही एक्सरसाइज करते हैं, तो सबसे बेस्ट ऑप्शन यह है कि आप आधे घंटे तक कार्डियो करें और बाकी के आधे घंटे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या वेट लिफ्टिंग। ऐसा करने से एक और जहां दौड़ना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसी कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज हृदय स्वास्थ्य में सुधार करने, कैलोरी जलाने और सहनशक्ति बढ़ाने में मददगार साबित होंगी, तो दूसरी ओर वेट लिफ्टिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और शरीर की संरचना को बढ़ाने में मदद करेगी।

Disclaimer: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

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