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तिहाड़ जेल में CM Kejriwal की Sugar गिरने पर कोर्ट ने दिए ये दिशा निर्देश,आखिर अचानक शुगर गिरे तो कैसे उसे किया जाए कंट्रोल, एक्सपर्ट से जानते हैं Hypoglycemia को कंट्रोल करने के टिप्स

सह्याद्री ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल में कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट,डॉक्टर माधव धर्मे के मुताबिक ब्लड शुगर लेवल के 70 mg/dl से नीचे जाने को हायपोग्लाइसेमिया कहा जाता है। सीएम का शुगर इस स्तर से नीचे जा रहा है जो उनकी सेहत के लिए खतरा है।
Written by: Shahina Noor
नई दिल्ली | Updated: April 02, 2024 11:19 IST
तिहाड़ जेल में cm kejriwal की sugar गिरने पर कोर्ट ने दिए ये दिशा निर्देश आखिर अचानक शुगर गिरे तो कैसे उसे किया जाए कंट्रोल  एक्सपर्ट से जानते हैं hypoglycemia को कंट्रोल करने के टिप्स
बहुत अधिक इंसुलिन या डायबिटीज की दवाएं ब्लड शुगर के स्तर को बहुत अधिक गिरा सकती हैं, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। (सोर्स - PTI/File)
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सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में शराब घोटाला मामले की सुनवाई के दौरान CM Arvind Kejriwal को 15 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। ईडी की कस्टडी में अरविंद केजरीवाल का ब्लड शुगर फ्लैक्चुएट कर रहा था। उनकी हालत ईडी की कस्टडी में बेहद खराब हो रही थी, एक बार उनकी शुगर इतनी ज्यादा गिर गई थी कि 46 mg/dl तक पहुंच गई थी। ब्लड शुगर का इस स्तर तक गिरना बॉडी के कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

किसी भी शुगर के मरीज की फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 60mg/dL से 100 mg/dL के बीच नॉर्मल मानी जाती है। पोस्ट मील शुगर यानि खाने के 2 घंटे बाद blood sugar लेवल 120 से 140 mg/dL के बीच हो तो नॉर्मल माना जाता है। ब्लड शुगर का स्तर इस पैमाने से ऊपर या नीचे रहे तो सेहत के लिए खतरा है। अरविंद केजरीवाल की ब्लड शुगर का स्तर 46 mg/dl तक गिर चुका है जिसके लिए कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उनकी ब्लड शुगर की निगरानी की जाए और उन्हें शुगर लॉ होने पर तुरंत केला, टॉफी और ग्लूकोज पिलाया जाएं।

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सह्याद्री ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल में कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट, डॉक्टर माधव धर्मे के मुताबिक ब्लड शुगर लेवल के 70 mg/dl से नीचे जाने को हायपोग्लाइसेमिया कहा जाता है। हायपोग्लाइसेमिया की परेशानी होने पर मरीज के बिहेवियर में बर्ताव आने लगता है, उसे कंपकंपी लगेगी, पसीना आएगा, उसका मिजाज़ चिड़चिड़ा हो जाएगा। ऐसी स्थिति में मरीज का बोलना तक मुश्किल हो जाता है और मरीज को बेहोशी हो सकती है।

इस स्थिति में अगर मरीज का इलाज नहीं किया जाए तो मरीज को मिर्गी का झटका भी लग सकता है। ऐसी स्थिति में मरीज को उचित इलाज नहीं मिले तो उसके दिल की गति रूक सकती है और ये स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि हायपोग्लाइसेमिया के कारण क्या हैं और उसका इलाज कैसे किया जाए।

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हायपोग्लाइसेमिया के कारण क्या है?

बहुत अधिक इंसुलिन या डायबिटीज की दवाएं ब्लड शुगर के स्तर को बहुत अधिक गिरा सकती हैं, जिससे हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है। इस परेशानी के कारणों की बात करें तो मरीज की डाइट में बदलाव, हॉर्मोन की कमी, ज्यादा भूखा रहने से, ज्यादा शराब पीने से और गंभीर संक्रमण होने से हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है।

CM केजरीवाल का हाइपोग्लाइसीमिया से बचाव के लिए कोर्ट ने दिए निर्देश

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगर केजरीवाल का ब्लड शुगर नीचे गिरता है तो उन्हें फौरन फल खिलाएं। उन्हें केला, टॉफी और ग्लूकोज पिलाया जाएं। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर किसी इंसान को हाइपोग्लाइसीमिया की परेशानी हो रही है यानि उसका ब्लड शुगर गिर रहा है तो ऐसे इंसान को तुरंत फाइबर से भरपूर कुछ फल खिलाएं।

फलों में केले, सेब, नाशपाती और संतरे जैसे फल हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति में बेहद असरदार साबित होंगे। ये फल बॉडी को तुरंत एनर्जी देंगे। ग्लूकोज और फाइबर से भरपूर ये फल गिरते हुए ब्लड शुगर को नॉर्मल करते हैं। फलों में आप अंगूर और स्ट्रॉबेरीज़ का भी सेवन कर सकते हैं। ये दोनों फल भी ग्लूकोज़ को संतुलित करने में मदद करते हैं।

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