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लाख कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा है वजन? ये 5 खराब आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार, नहीं छोड़ी तो ठप पड़ने लगेगा मेटाबॉलिज्म

पोषण विशेषज्ञ सिमरन खोसला ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर 5 ऐसी खराब आदतों के बारे में बताया है, जो मेटाबॉलिज्म को बेहद स्लो बनाने का कारण बनती हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-
Written by: हेल्थ डेस्क | Edited By: Shreya Tyagi
नई दिल्ली | Updated: March 02, 2024 17:49 IST
लाख कोशिशों के बाद भी कम नहीं हो रहा है वजन  ये 5 खराब आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार  नहीं छोड़ी तो ठप पड़ने लगेगा मेटाबॉलिज्म
आपको जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन देर रात तक मोबाइल चलाने या लेपटॉप स्क्रिन को देखने से भी आपके मेटाबॉलिज्म पर बेहद खराब असर पड़ सकता है, जो भी आपके लगातार बढ़ते वजन का कारण हो सकता है। (P.C- Freepik)
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क्या आपका वजन भी लगातार बढ़ता जा रहा है और लाख कोशिशों के बावजूद आप इसे कम नहीं कर पा रहे हैं? अगर हां, तो बता दें कि इसके पीछे आपकी कुछ खराब आदतें जिम्मेदार हो सकती हैं। दरअसल, हाल ही में पोषण विशेषज्ञ और वेट लॉस कोच सिमरन खोसला ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक पोस्ट शेयर कर 5 ऐसी खराब आदतों के बारे में बताया है, जो मेटाबॉलिज्म को बेहद स्लो बनाने का कारण बनती हैं और इसके चलते तमाम कोशिशों के बावजूद आपका वजन कम नहीं हो पाता है। आइए जानते हैं इनके बारे में-

इससे पहले जान लेते हैं कि आखिर मेटाबॉलिज्म होता क्या है?

मेटाबॉलिज्म दरअसल, कैटाबॉलिज्म और एनाबॉलिज्म की प्रक्रिया से मिलकर बनता है। कैटाबोलिज्म वह प्रक्रिया है, जिसमें हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं, वो सरल तरीके से पोषक तत्वों में टूट जाता है और इन पोषक तत्वों से हमारे शरीर को एनर्जी मिलती है। जबकि, एनाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है जिसमें हमारा शरीर पोषक तत्वों से मिली एनर्जी को हर तरह के शारीरिक कार्यों के लिए उपयोग करता है। इसमें शरीर में कोशिकाओं को विकसित करने से लेकर उनकी मरम्मत करना भी शामिल है। यानी अगर आपका मेटाबॉलिज्म कमजोर है तो ऐसे में आपका खाना ठीक तरह से पचता नहीं है और खराब पाचन वजन बढ़ाने का कारण बनने लगता है।

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मेटाबॉलिज्म को ठप करने लगती हैं ये आदतें

सूरज की रोशनी नहीं मिलना

न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं, 'हमारा शरीर विटामिन डी का उत्पादन करने के लिए सूरज की रोशनी पर निर्भर होता है, जो चयापचय क्रिया यानी मेटाबोलिक फंक्शन के लिए जरूरी है। इसके अतिरिक्त, अपर्याप्त सूरज की रोशनी शरीर की सर्कैडियन लय को बाधित कर सकती है, जो भी मेलाटोनिन और सेरोटोनिन जैसे मेटाबॉलिक रेगुलेटिंग हार्मोन को प्रभावित करती है। ऐसे में मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने के लिए थोड़ी देर ही सही लेकिन सूरज की रोशनी में बैठना जरूरी है। खासकर हफ्ते में दो से तीन बार सूर्योदय के समय 20-30 मिनट के लिए धूप में बैठने पर ना केवल आपको पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सकता है, बल्कि ये आपकी स्किन, बाल और हड्डियों के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

खराब नींद

खोसला के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण नींद मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, अच्छी नींद लेप्टिन और घ्रेलिन (Leptin and Ghrelin) जैसे भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन को नियंत्रित करती है। न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, पर्याप्त नींद न लेने से भूख का संकेत देने वाला घ्रेलिन हार्मोन अपना कंट्रोल खो देता है। जब आप पूरी नींद नहीं लेते हैं, तो ये हार्मोन बढ़ जाता है और आपको बार-बार भूख लगने का एहसास होता रहता है। ऐसे में आप ओवरईटिंग करते हैं और आपका वजन अधिक बढ़ने लगता है।

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इसके अलावा, खोसला बताती हैं कि अपर्याप्त या खराब गुणवत्ता वाली नींद इंसुलिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को भी बाधित कर सकती है, जिससे चयापचय असंतुलन हो सकता है और ऐसे में भी मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।

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जंक फूड का अधिक सेवन

खोसला के अनुसार, रिफाइंड शुगर, अनहेल्दी फैट और कृत्रिम योजक (Artificial Additives) से भरपूर खाद्य पदार्थ हमारे चयापचय पर बेहद खराब असर डालते हैं। इन तरह के फूड का सेवन करने से ना केवल कैलोरी काउंट अधिक बढ़ जाता है, बल्कि ब्लड शुगर लेवल भी हाई होने लगता है, जिससे समय के साथ इंसुलिन प्रतिरोध और चयापचय संबंधी शिथिलता होती है। ऐसे में जंक फूड के सेवन से बचें।

देर रात तक मोबाइल चलाना

आपको जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन देर रात तक मोबाइल चलाने या लेपटॉप स्क्रिन को देखने से भी आपके मेटाबॉलिज्म पर बेहद खराब असर पड़ सकता है, जो भी आपके लगातार बढ़ते वजन का कारण हो सकता है। दरअसल, मोबाइल और लेपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट हमारे शरीर की प्राकृतिक सर्कैडियन लय (Natural Circadian Rhythms) में हस्तक्षेप कर सकती है। न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, ब्लू लाइट न केवल हमारी नींद के पैटर्न को प्रभावित करती है, बल्कि चयापचय प्रक्रियाओं पर भी खराब असर डालती है, जिससे समय के साथ वजन बढ़ने लगता है।

स्ट्रेस

इन सब से अलग किसी बात की अधिक स्ट्रेस लेना या क्रोनिक तनाव, स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल के स्राव को ट्रिगर करता है। वहीं, बढ़े हुए कोर्टिसोल के स्तर से भूख बढ़ सकती है, खासकर मीठा खाने की लालसा अधिक बढ़ जाती है, जिससे आप ओवरईटिंग करते हैं और आपको वजन अधिक बढ़ने लगता है। ऐसे में अगर आप खुद को फैट से फिट बनाना चाहते हैं, तो आज ही इन तमाम आदतों से दूरी बना लें।

Disclaimer: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

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