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प्रदीप शर्मा: 25 साल में 112 एनकाउंटर, अंडरवर्ल्‍ड से संबंध का आरोप झेला, चुनाव लड़े...और अब म‍िली उम्रकैद

Who is Pradeep Sharma: लखन भैया का फर्जी एनकाउंटर 11 नवंबर 2006 को वर्सोवा में नाना नानी पार्क के पास हुआ था।
Written by: स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | Updated: March 20, 2024 14:01 IST
प्रदीप शर्मा  25 साल में 112 एनकाउंटर  अंडरवर्ल्‍ड से संबंध का आरोप झेला  चुनाव लड़े   और अब म‍िली उम्रकैद
(PC- The Indian Express)
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (19 मार्च) को मुंबई पुलिस के पूर्व अधिकारी प्रदीप शर्मा को हत्या के मामले में दोषी पाते हुए, आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साल 2006 में शर्मा ने छोटा राजन गिरोह के कथित सदस्य रामनारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया का एनकाउंटर किया था, कोर्ट ने उस एनकाउंटर को फर्जी मानते हुए, पुलिस अधिकारी को हत्या का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने  "एनकाउंटर स्पेशलिस्ट" माने जाने वाले शर्मा को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

जुलाई 2013 में प्रदीप शर्मा को सत्र अदालत ने बरी कर दिया था। उस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट की जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस गौरी वी गोडसे की पीठ ने अपने 867 पेज के फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में गड़बड़ी थी।

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पीठ ने कहा कि हालांकि लाखन भैया के खिलाफ 10 मामले थे, लेकिन इससे आरोपी को उसे मारने का लाइसेंस नहीं मिल जाएगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि, "कानून के शासन को कायम रखने के बजाय, पुलिस ने अपने पद और वर्दी का दुरुपयोग किया और रामनारायण की बेरहमी से हत्या कर दी।"

लखन भैया एनकाउंटर केस

लखन भैया का फर्जी एनकाउंटर 11 नवंबर 2006 को वर्सोवा में नाना नानी पार्क के पास हुआ था। 2009 में उच्च न्यायालय के आदेश पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी जब एक विशेष जांच दल ने पाया कि लाखन भैया के एक प्रतिद्वंद्वी ने पुलिसकर्मियों को उसे मारने के लिए पैसा दिया था।

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जुलाई 2013 में सत्र अदालत ने 13 पुलिसकर्मियों सहित 21 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन शर्मा को बरी कर दिया था।

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अपनी अपील में राज्य सरकार ने विशेष लोक अभियोजक राजीव चव्हाण और लखन भैया के भाई वकील राम प्रसाद गुप्ता के माध्यम से उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया कि मुठभेड़ फर्जी थी और आरोपियों द्वारा रिकॉर्ड तैयार किए गए थे।

प्रदीप शर्मा का रिकॉर्ड

प्रदीप शर्मा 1983 बैच के प्रसिद्ध पुलिस अधिकारियों में से हैं, जिनमें विजय सालस्कर, प्रफुल्ल भोसले, रवींद्र आंग्रे और विनायक सौदे शामिल हैं। ये पुलिसकर्मी मुंबई अंडरवर्ल्ड पर अपनी कार्रवाई के लिए जाने जाते थे, जिसका नेतृत्व दाऊद इब्राहिम कास्कर, छोटा राजन, अरुण गवली, अमर नाइक और अन्य जैसे लोग करते थे।

प्रदीश शर्मा ने अपने 25 साल की सर्विस में 112 एनकाउंटर किए। 1999 में शर्मा ने अपनी टीम के सदस्यों के साथ छोटा राजन के सहयोगी विनोद मटकर को मार गिराया। मटकर को छोटा राजन ने पाकिस्तान में छिपे इब्राहिम को खत्म करने के लिए चुना था। उसी साल पुलिस ने मुंबई के दादर में डी-कंपनी के गैंगस्टर सादिक कालिया को मार गिराया।

2003 में शर्मा और उनकी टीम ने मुंबई के गोरेगांव इलाके में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के तीन संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया। उनमें से दो, अबू सुल्तान और अबू अनवर, पाकिस्तानी नागरिक थे।

शर्मा का विवादों से पुराना नाता है, उन्हें अंडरवर्ल्ड से कथित संबंधों के लिए अगस्त 2008 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि मई 2009 में महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण के आदेश के बाद उन्हें बहाल कर दिया गया था।

इसके बाद साल 2010 में लखन भैया के फेक एनकाउंटर मामले में शर्मा को गिरफ्तार किया गया, चार साल जेल में कटे, फिर साल 2013 में सत्र न्यायालय ने बरी कर दिया गया।

2017 में शर्मा को फिर से फोर्स में बहाल कर दिया गया और ठाणे पुलिस के एंटी-एक्सटॉर्शन सेल के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया। साल 2019 में शिवसेना में शामिल होने के लिए शर्मा ने जुलाई माह में इस्तीफा दे दिया था। प्रदीम शर्मा ने शिवसेना के टिकट पर मुंबई के नालासोपारा से विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी।

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