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जब 'राम विरोधी' पेरियार के कारण मायावती की सरकार पर छाया संकट, मंदिर आंदोलन के बड़े नेता ने दी थी धमकी

राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता रामचन्द्र परमहंस का आशीर्वाद लेने के बाद कटियार ने अयोध्या से घोषणा की थी, 'हम किसी भी कीमत पर पेरियार की मूर्ति स्थापित नहीं होने देंगे।'
Written by: स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | Updated: January 16, 2024 16:40 IST
जब  राम विरोधी  पेरियार के कारण मायावती की सरकार पर छाया संकट  मंदिर आंदोलन के बड़े नेता ने दी थी धमकी
मायावती ने अपने जन्मदिन के मौके पर लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया कि उनकी पार्टी बसपा पूरे देश में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेगी (Express archive photo)
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देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री मायावती का जन्म 15 जनवरी, 1956 को एक गरीब परिवार में हुआ था। बसपा प्रमुख मायावती चार बार देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं। दो बार वह भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बनीं।

मायावती के तीसरे कार्यकाल (3 मई, 2002 से 26 अगस्त, 2003) की कहानी दिलचस्प है। 15 महीने की सरकार में बसपा और भाजपा के बीच जमकर बवाल हुआ था। सरकार बनने के तीन महीने बाद ही 'राम मंदिर आंदोलन' के एक बड़े नेता ने मायावती की सरकार गिराने की धमकी दे दी थी।

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ऐसा क्यों हुआ था? आइए जानते हैं:

राम के विरोधी पेरियार की मूर्ति लगाने पर मचा था बवाल

मायावती ने अपने तीसरे कार्यकाल में सहयोगी भाजपा के अनुरोधों को नजरअंदाज करते हुए लखनऊ के अंबेडकर पार्क में पेरियार की मूर्ति स्थापित करने का फैसला किया था। दक्षिण भारत के प्रमुख नास्तिक विचारक और नेता ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ हिंदू-देवी देवताओं के प्रखर आलोचक थे।

पेरियार को राम से विशेष नाराजगी थी। उनका मानना था कि रामायण, द्रविड़ों को आर्यों के जाल में फंसाने के लिए लिखा गया था। अगस्त 1956 में त्रिची के एक समुद्र तट पेरियार के अनुयायियों ने राम की तस्वीर जलाई थी।

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जनवरी 1971 को पेरियार ने सलेम में आयोजित 'अंधविश्वास उन्मूलन सम्मेलन' को संबोधित किया था। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। सम्मेलन में राम का पुतला जलाया गया था। आउटलुक में प्रकाशित स्निग्धेंदु भट्टाचार्य की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मेलन में पेरियार के समर्थक चिल्ला रहे थे- अगर वे हमारे रावण को जलाते हैं, तो हम उनके राम को जला देंगे।

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पेरियार ने रामायण के काउंटर में सच्ची रामायण नाम से एक किताब भी लिखी थी, जिसमें राम सहित कई चरित्रों को खलनायक के रूप में पेश किया गया है। मायावती इन्हीं पेरियार की मूर्ति लखनऊ में लगवाना चाहती थीं। तब केंद्र में भाजपा की सरकार थी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे।

राज्य की भाजपा द्वारा विरोध किए जाने के बाद मायावती ने मीडिया को बताया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को मूर्ति लगाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, जिसका अर्थ है कि राज्य नेतृत्व ही बाधाएं पैदा कर रहा है।

मायावती की घोषणा के बाद राम मंदिर आंदोलन के नेता और तत्कालीन प्रदेश भाजपा प्रमुख विनय कटियार ने राज्य सरकार को चेतावनी दी थी कि "यदि मूर्ति लखनऊ में पेरियार की स्थापित की गई तो यह उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार के अंत का प्रतीक होगा।"

कटियार ने अयोध्या में अपनी घोषणा दोहराई जब वह राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता रामचन्द्र परमहंस का आशीर्वाद लेने गए। कटियार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम किसी भी कीमत पर पेरियार की मूर्ति स्थापित नहीं होने देंगे।"

कटियार के अल्टीमेटम के 24 घंटे के भीतर मायावती का बयान बदल गया। रेडिफ डॉट कॉम में प्रकाशित शरत प्रधान की रिपोर्ट के मुताबिक मायावती ने कहा, "किसने कहा कि हमारी कभी लखनऊ में या यूपी में कहीं भी पेरियार की मूर्ति स्थापित करने की कोई योजना थी? पेरियार दक्षिण के थे, इसलिए अगर हमें उनकी मूर्ति स्थापित करनी है, तो हम वहां करेंगे ताकि हमें इसका कुछ लाभ मिल सके।"

लेकिन तब पूछताछ से पता चला था कि मुख्यमंत्री ने एक प्रसिद्ध स्थानीय मूर्तिकार से पेरियार की 20 फीट की मूर्ति बनवाई थी। मूर्तिकार के करीबी सूत्रों ने दावा किया था, "हमने मिट्टी का मॉडल भी तैयार कर लिया है।"

गिर गई मायावती की सरकार

विरोध की वजह से मायावती अपने तीसरे कार्यकाल में पेरियार की मूर्ति नहीं लगा सकीं। बावजूद इसके सरकार बच न सकी। मायावती ने नवंबर 2002 में निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया को जेल में डाल दिया था। 2003 की शुरुआत में राज्य सरकार ने राजा भैया पर आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पोटा) के तहत भी केस लगा दिया।

कटियार ने इसका भी विरोध किया और पोटा हटाने की मांग की। लेकिन मायावती नहीं मानीं। इसके बाद भाजपा ने केंद्र की तरफ से दबाव बनाया। केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की सरकार प्रक्रियाओं को पूरे किए बिना ताज हेरिटेज कॉरिडोर का निर्माण करवा रही है।

तनाव बढ़ा तो मायावती ने 29 जुलाई, 2003 को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुला लिया, जिसमें उन्होंने जगमोहन को मंत्री पद से हटाने की मांग की। दिल्ली में बीएसपी सांसदों ने लोकसभा के भीतर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। सदन में खूब हंगामा हुआ। तनाव बढ़ता गया और अंतत: मायावती ने 26 अगस्त, 2003 को खुद अपना इस्तीफा सौंप दिया।

हालांकि पेरियार की मूर्ति लगी

साल 2007 में जब बसपा अपने बूते पर यूपी की सत्ता में आयी और मायावती चौथी बार मुख्यमंत्री बनीं तो लखनऊ में पेरियार की मूर्ति लगी। हालांकि 'राम विरोधी' पेरियार को सम्मान दिया जाना भाजपा को तब भी रास नहीं आया। कटियार ने पेरियार की मूर्ति तोड़ने की धमकी दी। लेकिन कर कुछ नहीं पाए। पेरियार की मूर्ति आज भी लखनऊ में लगी है।

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