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नई दिल्ली जीतकर कैसे 'जाइंट किलर' बन सकती हैं बांसुरी स्वराज, वरिष्ठ पत्रकार ने बताया समीकरण

अब तक बांसुरी एक प्रैक्टिसिंग वकील रही हैं। उन्होंने टीवी पर भाजपा का पक्ष आत्मविश्वास और स्पष्टता रखते हुए शीर्ष नेतृत्व को प्रभावित किया।
Written by: स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | March 09, 2024 19:35 IST
नई दिल्ली जीतकर कैसे  जाइंट किलर  बन सकती हैं बांसुरी स्वराज  वरिष्ठ पत्रकार ने बताया समीकरण
अब तक बांसुरी एक प्रैक्टिसिंग वकील रही हैं।
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नीरजा चौधरी

भाजपा की पहली सूची में सबसे अप्रत्याशित नाम 40 वर्षीय बांसुरी स्वराज का था। वह भाजपा की दिवंगत वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज की बेटी हैं। नई दिल्ली से बांसुरी स्वराज को टिकट दिए जाने पर भाजपा के लोग भी चकित हैं।

भाजपा नेताओं के आश्चर्यचकित होने की सिर्फ यह वजह नहीं है कि शीर्ष नेतृत्व ने नई दिल्ली जैसी हाई-प्रोफाइल सीट के लिए एक नौसिखिया को चुना है। बल्कि यह भी है कि लालकृष्ण आडवाणी की शिष्या सुषमा स्वराज ने 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का विरोध किया था।

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भाजपा ने दिल्ली की सात में पांच सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की है। पिछले साल चुनाव जीते सिर्फ एक मनोज तिवारी को छोड़कर भाजपा ने चार सांसदों का टिकट काट दिया है। नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी का टिकट काटकर बांसुरी स्वराज को टिकट दिया गया है।

यह देखते हुए कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दिल्ली में एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं और एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, भाजपा हर तरह की खामियों को दूर करने में लगी हुई है।

बांसुरी के पास 'जाइंट किलर' बनने का मौका?

बांसुरी के नाम की घोषणा के साथ भाजपा ने राजधानी में चुनाव के लिए माहौल तैयार कर दिया है। यदि वह इस सीट से आप के सोमनाथ भारती को हराने में सफल हो जाती हैं, तो दिल्ली भाजपा में एक कद्दावर नेता के रूप में उभरेंगी।

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बता दें कि सोमनाथ भारती नई दिल्ली सीट से एक मजबूत दावेदार हैं। बांसुरी की जीत अरविंद केजरीवाल के लिए भी एक झटका होगा क्योंकि वह नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

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अब तक बांसुरी एक प्रैक्टिसिंग वकील रही हैं। उन्होंने टीवी पर भाजपा का पक्ष आत्मविश्वास और स्पष्टता रखते हुए शीर्ष नेतृत्व को प्रभावित किया। जो लोग अभी भी सुषमा के बोलने के कौशल को याद करते हैं, वे उनकी बेटी के साथ आसानी से खुद को जोड़ लेते हैं।

सुषमा स्वराज केवल 25 वर्ष की थीं जब वह पहली बार हरियाणा में मंत्री बनी थीं। इसके बाद आपातकाल के दौरान और उसके बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ शीर्ष प्रचारकों में से एक थीं।

आपातकाल के दौरान महिलाओं से कैसे कनेक्ट करती थीं सुषमा स्वराज?

पुराने लोग विशेष रूप से गांवों में महिलाओं के साथ तालमेल बनाने में सुषमा की प्रतिभा को याद करते हैं। उनका एक तरीका आम तौर पर भीड़ में पूछना था, "क्या यहां कौशल्या नाम की महिलाएं हैं (रामायण में राम की मां का नाम कौशल्या था)?"

सुषमा के इस सवाल पर कई हाथ अपने आप ऊपर उठ जाते थे। फिर वह पूछती कि क्या सुमित्रा (लक्ष्मण की मां) नाम की महिलाएं भी हैं। जब हाथ फिर उठ जाते, तो सुषमा कहतीं: "क्या कोई है जिसने अपनी बेटी का नाम कैकेयी रखा है (कौशल्या और सुमित्रा के अलावा दशरथ की तीसरी पत्नी, जिन्होंने राम को वनवास दिलाने और अपने बेटे भरत को राजा बनाने के लिए अपने पति पर दबाव बनाया था)?"

जब महिलाएं एक स्वर में "नहीं" में जवाब देतीं, तो सुषमा अपने पत्ते खोलतीं। वह महिलाओं को बतातीं कि इंदिरा गांधी ने दूसरों की कीमत पर अपने बेटे संजय का "राज्याभिषेक" करने के लिए कैकेयी की तरह व्यवहार किया है। सुषमा की इस बात को सुनकर महिलाएं हां में सिर हिलाने लगतीं।

जबकि सुषमा ने देश के कई हिस्सों से चुनाव लड़ा, जिसमें मध्य प्रदेश में विदिशा और अधिक प्रसिद्ध रूप से कर्नाटक में बेल्लारी शामिल है - अपने पहले चुनाव में सोनिया गांधी को टक्कर देते हुए - उन्हें दिल्ली में भी सीएम के रूप में उनके छोटे कार्यकाल के लिए याद किया जाता है।

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