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Lok Sabha Election 2024: रायबरेली में अमित शाह को क्यों मनाना पड़ रहा है भाजपाइयों को? उम्मीदवार के प्रचार से दूर हैं नेता

उत्तर प्रदेश की रायबरेली और अमेठी सीटों पर लोकसभा चुनाव 2024 के पांचवें चरण में 20 मई को मतदान होना है।
Written by: Maulshree Seth | Edited By: shruti srivastava
नई दिल्ली | Updated: May 14, 2024 15:10 IST
lok sabha election 2024  रायबरेली में अमित शाह को क्यों मनाना पड़ रहा है भाजपाइयों को  उम्मीदवार के प्रचार से दूर हैं नेता
रायबरेली में अमित शाह (Source- X @AmitShah)
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उत्तर प्रदेश की रायबरेली लोकसभा सीट पर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावी मैदान में हैं। राहुल के खिलाफ भाजपा ने राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह को उतारा है। हालांकि, बीजेपी के स्थानीय खेमे में दिनेश प्रताप के खिलाफ कुछ असंतोष है, जिससे उनकी चुनौतियां बढ़ गई हैं।

कुछ मुद्दों से नाराज होकर रायबरेली सदर से भाजपा विधायक अदिति सिंह और ऊंचाहार से बागी सपा विधायक मनोज कुमार पांडे, निर्वाचन क्षेत्र में दिनेश के लिए प्रचार करने से कतरा रहे हैं। इस प्रकार दोनों ही भाजपा को रायबरेली में एक जोरदार अभियान चलाने में मदद नहीं कर रहे हैं।

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रायबरेली में नाराज भाजपा नेताओं को मनाने पहुंचे अमित शाह

भाजपा सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने रायबरेली दौरे के दौरान दोनों को मनाने की कोशिश की। रविवार को रायबरेली में अपने चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह, दिनेश के साथ मनोज पांडे के घर पहुंचे और उनके लिए समर्थन मांगा। मनोज पांडे ने फरवरी के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन किया था लेकिन वह लोकसभा चुनाव में दिनेश का समर्थन नहीं कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि मनोज के घर पहुंचे अमित शाह ने पांडे से कहा कि उन्हें भाजपा के उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए और पार्टी उन्हें सही समय पर इनाम देगी।

खुद रायबरेली से टिकट पाने की उम्मीद में थे मनोज पांडे

मनोज पांडे रायबरेली में एक प्रमुख ब्राह्मण नेता हैं। तीन बार ऊंचाहार से विधायक रहे मनोज पांडे पिछली अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार में एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरा थे। 27 फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में मनोज पांडे ने सपा के मुख्य सचेतक का पद छोड़ दिया था और भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। सूत्रों के मुताबिक, मनोज रायबरेली सीट से खुद भाजपा का टिकट पाने की उम्मीद कर रहे थे।

सोनिया गांधी से हार चुके हैं दिनेश प्रताप

रायबरेली निर्वाचन क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से सपा ने 2022 के यूपी चुनावों में चार सीटें - ऊंचाहार, बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी जीती थीं। केवल रायबरेली सदर सीट कांग्रेस से भाजपा में आयी अदिति सिंह ने जीती थी। गठबंधन के बिना भी सपा पिछले चुनावों में कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ती थी, जो अब दोनों दलों के बीच सीट-बंटवारे के तहत औपचारिक रूप से कांग्रेस को दे दी गयी हैं।

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तीन बार के एमएलसी और पूर्व कांग्रेस नेता दिनेश प्रताप सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया जो 2019 के चुनावों में सोनिया गांधी से 1.6 लाख से अधिक वोटों से हार गए थे। सोनिया की सीट एकमात्र सीट थी जिसे कांग्रेस उस चुनाव में यूपी में जीतने में कामयाब रही थी।

दिनेश के लिए प्रचार करते देखा तो विधानसभा सदस्यता खोने का डर

कई भाजपा नेताओं का कहना है कि मनोज पांडे जो अभी तक औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं, वह चिंतित हैं कि अगर उन्हें दिनेश के लिए खुलेआम प्रचार करते देखा गया तो उनकी विधानसभा सदस्यता खो सकती है। हालांकि, पार्टी के कुछ अन्य नेताओं का कहना है कि उनकी भाजपा से टिकट की उम्मीद और दिनेश के साथ पुरानी प्रतिद्वंद्विता ऐसा करने के पीछे असली कारण है।

दिनेश प्रताप के नामांकन पत्र दाखिल करने के दिन कई स्थानीय भाजपा नेता भी मनोज पांडे से मिलने गए थे लेकिन वह दिनेश के साथ नहीं गए। हालांकि मनोज के बेटे और भाई उस दिन भाजपा में शामिल हो गए थे। पार्टी को निर्वाचन क्षेत्र के ब्राह्मण समुदाय को एक संकेत भेजने के लिए दिनेश के साथ उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को भेजना पड़ा था।

क्यों खफा हैं अदिति सिंह?

वहीं, दूसरी ओर अदिति सिंह, एक ठाकुर चेहरा और सात बार के रायबरेली विधायक दिवंगत अखिलेश सिंह की बेटी हैं, वह भी पार्टी उम्मीदवार के लिए प्रचार में दिखाई नहीं दे रही हैं। रायबरेली में अमित शाह की सार्वजनिक बैठक में अदिति मंच पर मौजूद थीं लेकिन उन्होंने सभा को संबोधित नहीं किया। हालांकि, अमित शाह ने उन्हें आश्वस्त करने के लिए अदिति का नाम लिया था। शनिवार को अदिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने पिता के साथ एक पुरानी तस्वीर भी पोस्ट की, जिसमें लिखा गया कि उनके लिए अपने उसूलों से समझौता करना मुश्किल था।

2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान, तत्कालीन कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने आरोप लगाया था कि उनकी कार पर दिनेश प्रताप के भाई और तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष अवधेश सिंह ने हमला किया था। सूत्रों ने कहा कि भाजपा में शामिल होने और उसके टिकट पर 2022 का चुनाव जीतने के बाद भी दिनेश के साथ अदिति के मतभेद दूर नहीं हो सके। सूत्रों ने बताया कि भाजपा नेतृत्व ने अदिति और मनोज दोनों से कहा है कि उन्हें उम्मीदवार के नाम से परे सोचना चाहिए और पार्टी के लिए प्रचार करना चाहिए।

नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ रहा है रायबरेली

राहुल रायबरेली से लड़ रहे हैं क्योंकि उनकी मां सोनिया गांधी, जिन्होंने लगभग दो दशकों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया, हाल ही में राज्यसभा में चली गईं। राहुल 2019 के चुनाव में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से अमेठी से हार गए थे। इस बार, कांग्रेस ने अनुभवी पार्टी कार्यकर्ता किशोरी लाल शर्मा को अमेठी से मैदान में उतारा है जबकि राहुल फिर से केरल में पिछली बार जीती हुई वायनाड सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, बीएसपी ने ठाकुर प्रसाद यादव को उतारा है।

रायबरेली लोकसभा क्षेत्र

रायबरेली में ब्राह्मणों की आबादी लगभग 18% है जबकि 11% ठाकुर और 25% से अधिक दलित हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक, रायबरेली की जनसंख्या 3,405,559 है। यह मुख्य रूप से ग्रामीण जिला है, जिसकी 91% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। रायबरेली से पहला चुनाव पूर्ण पीएम इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी जीते थे। यह सीट पारंपरिक नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ रही है। 2004 से लगातार यहां पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जीतती आ रही हैं।

रायबरेली लोकसभा चुनाव 2019 परिणाम

पिछले आम चुनाव में यहां से कांग्रेस की सोनिया गांधी ने बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह को हराया था।

पार्टीप्रत्याशीवोट प्रतिशत
कांग्रेससोनिया गांधी55.80
बीजेपीदिनेश प्रताप सिंह38.36
NOTANOTA1.07

रायबरेली लोकसभा चुनाव 2014 परिणाम

2014 के आम चुनाव में रायबरेली सीट से कांग्रेस की सोनिया गांधी ने बीजेपी के अजय अग्रवाल को हराया था।

पार्टीप्रत्याशीवोट प्रतिशत
कांग्रेससोनिया गांधी63.80
बीजेपीअजय अग्रवाल21.05
बीएसपीप्रवेश सिंह7.71
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