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अयोध्‍या में राम बनाम संविधान, इस शहर में क्‍या चाहती है जनता, बीजेपी और सपा में किसका पलड़ा भारी?

पिछले आम चुनावों में फैजाबाद से बीजेपी के लल्लू सिंह ने जीत हासिल की थी, उन्होंने सपा के आनंद सेन यादव को हराया था।
Written by: Maulshree Seth | Edited By: shruti srivastava
नई दिल्ली | May 17, 2024 16:52 IST
अयोध्‍या में राम बनाम संविधान  इस शहर में क्‍या चाहती है जनता  बीजेपी और सपा में किसका पलड़ा भारी
अयोध्या में दुकान चलाने वाली शशि पांडे (Source- Express)
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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के साथ ही बीजेपी ने इसे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एक बड़ा मुद्दा बना लिया है। भाजपा के प्रचार अभियान में राम मंदिर के मुद्दे को बार-बार उठाया जा रहा है। इसके साथ ही फैजाबाद लोकसभा सीट, जिसके अंतर्गत अयोध्या आती है भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष इस कहानी को राम से संविधान की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहा है। मौलश्री सेठ की ग्राउंड रिपोर्ट में जानते हैं क्या हैं फैजाबाद के मुद्दे और अयोध्या के विकास पर क्या कहते हैं स्थानीय?

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उत्तर प्रदेश की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर 20 मई को पांचवें चरण में मतदान होना है। फैजाबाद सीट पर इस बार मुकाबला समाजवादी पार्टी के नौ बार के विधायक अवधेश प्रसाद और मौजूदा भाजपा सांसद लल्लू सिंह के बीच है। लल्लू सिंह उन भाजपा नेताओं में से एक हैं जिन्होंने कहा था कि पार्टी को संविधान बदलने के लिए 400 सीटों की जरूरत है।

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लल्लू सिंह का चुनाव अभियान नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द घूमता है। वह लोगों से कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने राम मंदिर के अभिषेक के साथ 500 साल पुराना सपना पूरा किया और अब वह भगवान कृष्ण को भी मथुरा लाएंगे। उनके अभियान के दौरान बजाए जाने वाले गानों का उद्देश्य भी लोगों को यह याद दिलाना है कि कैसे जिन लोगों ने 'राम भक्तों पर गोलियां चलाईं (1990 में मंदिर कार सेवकों के खिलाफ मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन सपा सरकार की कार्रवाई का संदर्भ)' वे अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विरोध करने की कोशिश कर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द घूमता है लल्लू सिंह का चुनाव अभियान

अपनी जीत के प्रति आश्वस्त भाजपा अयोध्या में रेलवे स्टेशन, सड़कों और आगामी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के साथ ही बुनियादी ढांचे में सुधार के बारे में भी बात कर रही है। अयोध्या के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा, “मुकाबला कहां है? अयोध्या में कोई मुकाबला नहीं है। किसने सोचा था कि ऐसा दिन भी आएगा। वहां चौड़ी सड़कें हैं, बेहतर व्यवसाय हैं और अयोध्या दुनिया की नजरों में है, इसके लिए योगीजी और मोदीजी को धन्यवाद।”

दलित मतदाताओं पर फोकस कर रही सपा

हालांकि, संविधान पर लल्लू सिंह की टिप्पणी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भाजपा पर निशाना साधने का मौका दे दिया। उन्होंने हाल ही में फैजाबाद में एक सभा में कहा था, "रोटी, कपड़ा, मकान है जरूरी, लेकिन हमारे लिए संविधान बचाना भी जरूरी है।"

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एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जहां दलित मतदाताओं की संख्या लगभग एक चौथाई है, सपा समुदाय के वोटों का एक बड़ा हिस्सा हासिल करने की कोशिश कर रही है। सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद अपने स्थानीय होने पर जोर दे रहे हैं और राम का भी जिक्र कर रहे हैं। प्रचार के दौरान वह कहते हैं, ''न केवल मैं अयोध्या का हूं बल्कि राम मेरे दिल में भी हैं क्योंकि मेरे परिवार के सदस्यों - भाई, पिता और ससुर के नाम में भी राम है।''

वहीं, दूसरी ओर अयोध्या में स्थानीय लोग राम मंदिर और उससे होने वाले फायदों से खुश हैं लेकिन वह चाहते हैं कि सरकार भविष्य में सड़क चौड़ी करने के कारण दुकानों के नुकसान पर उनकी चिंताओं पर ध्यान दे।

क्या कहती है अयोध्या की जनता?

राम मंदिर तक जाने वाली सड़क पर, शशि पांडे और गीता सिंह दुकान पर बैठती हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान शशि कहती हैं कि वह थोड़ी निराश हैं क्योंकि उन्होंने हाल ही में अपनी 5,000 रुपये प्रति माह की रसोइया की नौकरी छोड़ दी है क्योंकि वीवीआईपी आवाजाही पर प्रतिबंध के कारण पब्लिक ट्रांसपोर्ट न मिलने की वजह से उन्हें 1.5 किमी पैदल चलना पड़ता था। शशि कहती हैं कि उन्होंने राम मंदिर के लॉकर रूम में काम करने के लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें किसी मंत्री से बात करने के लिए कहा गया।

वहीं, गीता जिनकी आय का एकमात्र स्रोत दुकान है कहती हैं कि मंदिर में अभिषेक के बाद से बिजनेस तेज हो गया है, लेकिन एक नकारात्मक पहलू भी आया है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान गीता कहती हैं, “हमें दुकान के उस हिस्से का मुआवज़ा भी मिला जो हमने सड़क विस्तार के कारण खो दिया था लेकिन वह रेनोवेशन में खर्च कर दिया गया है। सिर्फ हमें ही नहीं तीर्थयात्रियों को भी परेशानी होती है क्योंकि उन्हें भी पैदल चलना पड़ता है। हमने सोचा था कि अंततः बैरिकेडिंग हटा दी जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है।''

फैजाबाद में नहीं हुआ विकास- स्थानीय

नया घाट की ओर जाने वाली सड़क पर कन्फेक्शनरी की दुकान चलाने वाले सुंदर प्रसाद इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहते हैं, “हमें खुशी है कि अयोध्या में बदलाव आया है लेकिन वीवीआईपी आगमन के दौरान मेरे लिए अपने बच्चों को स्कूल छोड़ना भी मुश्किल हो जाता है।”

इसके अलावा, यह सुधार अयोध्या तक ही सीमित प्रतीत होते हैं। फैजाबाद शहर के लगभग 35 किमी दूर नक्का क्षेत्र में जिसे कभी फैजाबाद जिले का केंद्र माना जाता था, कई लोगों का जीवन नहीं बदला है। यहां फूल बेचने वाले मोहम्मद इरफान कहते हैं, ''यहां सब सपा समर्थक हैं, आप आगे बढ़ें।" उन्होंने कहा, ''अयोध्या में भले ही विकास हुआ हो लेकिन फैजाबाद में कुछ भी नहीं बदला है।''

फैजाबादवासियों को बदलाव की उम्मीद

फूलों की दुकान के मालिक चंदन श्रीवास्तव बिजनेस में बढ़ोत्तरी की बात स्वीकार करते हैं लेकिन इरफान की बात से सहमत हैं। चंदन इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहते हैं, “मोदीजी ने अयोध्या को बदल दिया। वह सिर्फ अयोध्या का दौरा करते हैं, आसपास के इलाकों का नहीं। मुझे उम्मीद है कि फैजाबाद में भी अयोध्या जैसा बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।''

फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र

फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से चार (दरियाबाद, रुदौली, बीकापुर और अयोध्या) पर भाजपा का कब्जा है, जबकि एक (मिल्कीपुर) का प्रतिनिधित्व सपा के अवधेश प्रसाद करते हैं। हाल के दिनों में, फैजाबाद लोकसभा सीट पर सपा (1998), बसपा (2004), कांग्रेस (2009) और भाजपा (1999, 2014 और 2019) ने जीत हासिल की है। 2019 के चुनावों में, जब सपा और बसपा ने गठबंधन में चुनाव लड़ा तो लल्लू ने 65,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

फैजाबाद लोकसभा चुनाव परिणाम

पिछले आम चुनावों में यहां बीजेपी के लल्लू सिंह ने जीत हासिल की थी, उन्होंने सपा के आनंद सेन यादव को हराया था। लल्लू सिंह को 5.29 लाख और आनंद को 4.63 लाख वोट मिले थे। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनावों की बात की जाए तो फैजाबाद से बीजेपी के लल्लू सिंह ने जीत हासिल की थी, उन्होंने सपा के मित्रसेन यादव को हराया था। लल्लू सिंह को 4.91 लाख और मित्रसेन को 2.08 लाख वोट मिले थे।

Source- Indian Express
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