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नरेंद्र मोदी की जाति के अलावा 1999 में और किन्हें बनाया गया था ओबीसी, जानिए

नरेंद्र मोदी सात अक्टूबर, 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और मई 2014 तक लगातार पद पर रहे थे। जनवरी 2002 में गुजरात सरकार 'मोढ़ घांची' जाति को ओबीसी का दर्जा देने के लिए एक सर्कुलर लेकर आयी थी।
Written by: स्पेशल डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: February 08, 2024 20:16 IST
नरेंद्र मोदी की जाति के अलावा 1999 में और किन्हें बनाया गया था ओबीसी  जानिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोढ-घांची जाति से हैं, जो तेली जाति की कई उप-जातियों में से एक है। (PC- PTI)
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जाति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गयी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया है कि पीएम मोदी का जन्म ओबीसी वर्ग में नहीं हुआ था, बल्कि सामान्य वर्ग में हुआ था।

ओड़‍िशा के बेलपहाड़ में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस सांसद ने कहा, "सबसे पहले मैं ये बता देना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी जी ओबीसी पैदा नहीं हुए थे। आप लोगों को भयंकर बेवकूफ बनाया जा रहा है, नरेंद्र मोदी जी तेली जाति में पैदा हुए। उनके समुदाय को बीजेपी सरकार ने साल 2000 में ओबीसी का दर्जा दिया। वो सामान्य वर्ग में पैदा हुए थे। ये पूरी दुनिया में झूठ बोल रहे हैं कि मैं ओबीसी पैदा हुआ।"

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राहुल गांधी का कहना है कि क्योंकि नरेंद्र मोदी का जन्म ओबीसी वर्ग में नहीं हुआ इसलिए वह पिछड़ों के हक और हिस्सेदारी के साथ न्याय नहीं करेंगे और जातिवार जनगणना नहीं कराएंगे।

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भाजपा ने द‍िया जवाब

भाजपा नेता अम‍ित मालवीय ने राहुल गांधी के आरोपों की काट में 27 अक्‍तूबर, 1999 को जारी एक राजपत्र (गजट) के साथ X पर पोस्ट ल‍िखा, "यह सरासर झूठ है। पीएम नरेंद्र मोदी की जाति को उनके गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पूरे 2 साल पहले 27 अक्टूबर 1999 को ओबीसी के रूप में अधिसूचित किया गया था।"

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2014 और 2019 लोकसभा चुनाव के समय भी उठा था मुद्दा

2019 लोकसभा चुनाव के समय भी प्रधानमंत्री की जात‍ि का मुद्दा गरमाया था। प्रधानमंत्री ने शोलापुर (महाराष्‍ट्र) में एक रैली में कहा था, 'प‍िछड़े वर्ग का होने के कारण मुझे न‍िशाना बनाया जा रहा है।' 2014 में भी जब नरेंद्र मोदी पहली बार लोकसभा चुनाव में भाजपा की अगुआई कर रहे थे और सांसद का चुनाव लड़ रहे थे तब भी उन्‍होंने खुद को प‍िछड़ा वर्ग का बताया था और कांग्रेस ने इसका व‍िरोध क‍िया था। तब गुजरात कांग्रेस के नेता शक्‍त‍ि सिंह गोह‍िल ने कहा था क‍ि मोदी ने 2001 में गुजरात का मुख्‍यमंत्री बनने के बाद राजनीत‍िक फायदा उठाने के ल‍िए साल 2002 में अपनी जात‍ि (मोढ़ घांची) को ओबीसी सूची में डलवा द‍िया।

1999 और 2002 का क्‍या है चक्‍कर?

गुजरात की 104 जातियों को ओबीसी की केंद्रीय सूची (प्रविष्टि संख्या 23) में शामिल किया गया है। लिस्ट में 'घांची (मुस्लिम), तेली, मोढ़ घांची, तेली-साहू, तेली-राठौड़, तेली-राठौड़' शामिल हैं। इन सभी समुदायों को पारंपरिक रूप से खाद्य तेलों बनाने और उसका व्यापार करने के लिए जाना जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में रहने वाले इन समुदायों के सदस्य आम तौर पर गुप्ता उपनाम का उपयोग करते हैं। कुछ लोग मोदी सरनेम भी लगाते हैं।

कुछ शुरू से ही ओबीसी की केंद्रीय सूची में थे - जब 1993 में 'मंडल' आरक्षण के कार्यान्वयन के बाद ओबीसी की पहली केंद्रीय सूची अधिसूचित की गई थी। इसके अलावा अक्टूबर 1999 में मुस्लिम घांची समुदाय को राज्य (गुजरात) के कुछ अन्य समुदायों (तेली, मोढ़ घांची और माली) के साथ ओबीसी की केंद्रीय सूची में जोड़ा गया था।

इस प्रकार, मोढ़ घांची (ज‍िस समाज से प्रधानमंत्री मोदी आते हैंं), उसे उनके पहली बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनने से लगभग 18 महीने पहले (27 अक्टूबर, 2001 को) ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल किया गया था।

फ‍िर 2002 के सर्कुलर का दावा क्‍या है?

शक्‍त‍ि सिंह गोह‍िल ने 2014 में दावा क‍िया था क‍ि उन्‍होंने आरटीआई (सूचना के अध‍िकार) के जर‍िए जानकारी ली है क‍ि मोढ़ घांची समाज को 2002 में गुजरात में ओबीसी की सूची में शाम‍िल क‍िया गया था। असल में जनवरी 2002 में गुजरात सरकार ने इस संबंध में एक सुर्कलर जारी क‍िया था। लेक‍िन, कहा जाता है क‍ि यह एक तकनीकी गड़बड़ी के चलते करना पड़ा था।

बीबीसी की एक र‍िपोर्ट में एक सरकारी अध‍िकारी के हवाले से बताया गया है क‍ि घांची समाज को जब ओबीसी की सूची में दर्ज क‍िया गया तो सभी उपजात‍ियों को भी तभी ल‍िस्‍ट में शाम‍िल कर लेना चाह‍िए था। लेक‍िन, संभवत: ऐसा नहीं होने की वजह से 2002 में एक सर्कुलर के जर‍िए 'मोढ़ घांची' को ओबीसी का दर्जा द‍िए जाने की घोषणा करनी पड़ी होगी।

हिंदू, मुस्लिम और पारसी भी होते हैं 'मोदी'

मोदी सरनेम का इस्तेमाल कई समाजों के लोग करते हैं। यह किसी विशिष्ट समुदाय या जाति को नहीं दर्शाता है। गुजरात में मोदी उपनाम का उपयोग हिंदू, मुस्लिम और पारसी द्वारा किया जाता है। वैश्य (बनिया), खरवास (पोरबंदर के मछुआरे) और लोहाना (जो व्यापारियों का एक समुदाय हैं) समुदाय में मोदी उपनाम का इस्तेमाल करने वाले लोग आसानी से मिल जाते हैं।

मोदी उपनाम वाले लोग गुजरात के अलावा और कहां रहते हैं?

गुजरात के अलावा यूपी और बिहार में भी मोदी उपनाम वाले लोग रहते हैं। यह उपनाम उन मारवाड़ियों द्वारा भी खूब इस्तेमाल किया जाता है, जो अग्रवालों के समूह से हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे हरियाणा के हिसार स्थित अग्रोहा के थे और बाद में हरियाणा के महेंद्रगढ़ और राजस्थान के झुंझुनू और सीकर जैसे जिलों में फैल गए।

IPL (Indian Premier League) के संस्थापक ललित मोदी के दादा, राय बहादुर गुजरमल मोदी, महेंद्रगढ़ से मेरठ के पास जाकर बस गए, बाद में उस जगह का नाम बदलकर मोदीनगर कर दिया गया। भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी गुजरात के जामनगर का रहने वाला है, जो पारंपरिक रूप से हीरे के व्यापार में लगा हुआ है। टाटा स्टील के पूर्व अध्यक्ष रूसी मोदी और फिल्मी दुनिया के सोहराब मोदी मुंबई के पारसी थे।

क्या सभी मोदी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के माने जाते हैं?

इसका जवाब है- नहीं। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित श्यामलाल यादव, कमल सैय्यद और गोपाल बी कटेशिया के एक आर्टिकल के मुताबिक, सभी 'मोदी' ओबीसी वर्ग से ताल्लुक नहीं रखते। दरअसल, नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था के लिए बनी ओबीसी की केंद्रीय सूची में 'मोदी' नाम का कोई समुदाय या जाति नहीं है।

ओबीसी की केंद्रीय सूची में सूचीबद्ध बिहार के 136 समुदायों में कोई "मोदी" नहीं है। हालांकि तेली समुदाय को सूची में शामिल किया गया है। केंद्रीय ओबीसी सूची में राजस्थान के 68 समुदायों में 'तेली' समुदाय का नाम है। लेकिन 'मोदी' नाम का कोई समुदाय सूचीबद्ध नहीं है।

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