scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

मुगल गार्डन ही नहीं मोदी सरकार में राष्ट्रपति भवन के कई कमरों के नाम भी बदले, ऐतिहासिक रेडक्लिफ रूम का नाम अब कैबिनेट रूम, लेकिन नहीं होती कोई मीटिंग

वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर ने द इंडियन एक्सप्रेस के अपने साप्ताहिक कॉलम ‘इनसाइड ट्रैक’ में बताया है कि राष्ट्रपति के उस ऐतिहासिक कमरे का नाम बदल दिया गया है, जहां बैठकर ब्रिटिश वकील सिरिल रेडक्लिफ ने जल्दबाजी में भारत और पाकिस्तान की विभाजक रेखा खींची थी।
Written by: स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | Updated: March 24, 2024 14:54 IST
मुगल गार्डन ही नहीं मोदी सरकार में राष्ट्रपति भवन के कई कमरों के नाम भी बदले  ऐतिहासिक रेडक्लिफ रूम का नाम अब कैबिनेट रूम  लेकिन नहीं होती कोई मीटिंग
राष्ट्रपति भवन (PC- Rashtrapati Bhavan Website)
Advertisement

राष्ट्रपति भवन की वेबसाइट पर 'राष्ट्रपति के आवास' के परिचय में लिखा है कि यह भारत की शक्ति, इसकी लोकतांत्रिक परंपराओं और पंथनिरपेक्ष स्वरूप का प्रतीक है। हालांकि मोदी सरकार में इस भवन के भीतर कई बदलाव हो चुके हैं।

ऐसे तमाम बदलाव राष्ट्रपति भवन को 'भारतीय टच' देने के नाम पर किए जा रहे हैं। औपनिवेशिक युग का इस इमारत में देसी विशेषताओं को धीरे-धीरे शामिल किया गया है।

Advertisement

पिछले कुछ राष्ट्रपतियों द्वारा कमरों का नाम बदल दिया गया है और नए संग्रहालय जोड़े गए हैं। मुगल गार्डन का अमृत उद्यान के रूप में नाम बदलना तो जगजाहिर है, लेकिन अन्य नए नामकरण भी हैं, जिनका कम जिक्र मिलता है।

एक ऐतिहासिक कमरे का नाम बदल दिया गया

वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर ने द इंडियन एक्सप्रेस के अपने साप्ताहिक कॉलम ‘इनसाइड ट्रैक’ में बताया है कि राष्ट्रपति के उस ऐतिहासिक कमरे का नाम बदल दिया गया है, जहां बैठकर ब्रिटिश वकील सिरिल रेडक्लिफ ने जल्दबाजी में भारत और पाकिस्तान की विभाजक रेखा खींची थी। उनके द्वारा मानचित्र पर खींची गई रेखा से तय हुआ था कि कौन सा हिस्सा भारत में रहेगा और कौन पाकिस्तान के हिस्से जाएगा। पहले राष्ट्रपति के उस कमरे को रेडक्लिफ रूम के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब कमरे का नाम बदलकर कैबिनेट रूम है। हालांकि वहां न तो प्रधानमंत्री और न ही राष्ट्रपति की कैबिनेट बैठकें होती हैं।

नदियों के नाम पर कमरों के नाम

अंग्रेजों ने राष्ट्रपति भवन के कुछ कमरों का नाम रंगों और दिशाओं के नाम पर रखा था, जैसे- येलो डाइनिंग रूम, ग्रे डायनिंग रूम, नॉर्थ ड्राइंग रूम, गार्डन लॉगिंया, स्टडी आदि। अब इन कमरों का नाम बदलकर भारतीय नदियों, नर्मदा, गोदावरी, सरयू, यमुना, साबरमती आदि के नाम पर रखा गया है।

Advertisement

पूर्व राष्ट्रपति भी भवन पर छोड़ रहे हैं अपनी छाप

हाल के राष्ट्रपतियों ने भी राष्ट्रपति भवन पर अपनी छाप छोड़ी है। प्रणब मुखर्जी ने पुराने कालीनों और टेपेस्ट्री का एक संग्रहालय स्थापित किया और भवन को आम जनता के लिए खोल दिया। इससे पहले, केवल विशेषाधिकार प्राप्त आगंतुकों का ही प्रवेश था।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ड्राइंग रूम और स्टेटरूम के नाम बदलने वाले थे, हालांकि वह इस काम को पूरा नहीं कर पाए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गोंड और वरली चित्रों से सुसज्जित एक आदिवासी गैलरी का उद्घाटन किया है। यह पहले रसोई संग्रहालय था, जिसमें राष्ट्रपति भवन की रसोई से पुराने कटलरी और खाना पकाने के बर्तन प्रदर्शित किए जाते थे।

Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो