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चुनावी क‍िस्‍सा: जब नेहरू नहीं करना चाहते थे अटल ब‍िहारी के ख‍िलाफ प्रचार तब उतारे गए थे एक्‍टर बलराज साहनी

बलराज साहनी की जनसभा के बाद सुभद्रा जोशी के पक्ष में ऐसा माहौल बना कि अटल बिहारी की जीती हुई सीट हार में बदल गई।
Written by: shrutisrivastva
नई दिल्ली | Updated: April 03, 2024 17:02 IST
चुनावी क‍िस्‍सा  जब नेहरू नहीं करना चाहते थे अटल ब‍िहारी के ख‍िलाफ प्रचार तब उतारे गए थे एक्‍टर बलराज साहनी
चुनावी मैदान में फ‍िल्‍म स्‍टार की एंट्री के ल‍िए भी नेहरू ज‍िम्‍मेदार (Source- Express Archive)
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लोकसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है। तमाम राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं और स्टार कैंडीडेट्स ने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। कई उम्मीदवारों ने प्रचार के लिए सेलिब्रिटीज और फिल्मी सितारों का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है। ऐसे में उस चुनाव की बात भी सामने आती है जब प्रचार में फिल्मी सितारों की एंट्री हुई थी। यह चुनाव साल 1962 का था जो यूपी का पहला चुनाव था जिसमें प्रचार में बॉलीवुड स्टार बलराज साहनी की एंट्री हुई थी।

1962 के चुनाव में उत्तर प्रदेश की बलरामपुर सीट पर मुक़ाबला जनसंघ प्रत्याशी और कांग्रेस नेता सुभद्रा चौधरी के बीच था। 1957 का चुनाव जीत चुके अटल बिहारी के अंदर पिछली जीत का उत्साह था। वहीं, कांग्रेस ने भी पिछली हार का बदला लेने के लिए दो बार संसद रह चुकी सुभद्रा जोशी को चुनाव में उतार दिया। सुभद्रा जोशी का नाम सुनकर अटल बिहारी भी चौंक गए। अटल के सहयोगी दुलीचंद्र बताते हैं कि उन्होंने कहा कि बलरामपुर की जनता सुभद्रा को इतना नहीं जानती जितना मुझे पहचानती है। मेरी जीत में कोई शक नहीं है और अटल जी चुनाव प्रचार में जुट गए।

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बॉलीवुड एक्टर बलराज साहनी उतरे प्रचार में

सुभद्रा जोशी पाकिस्तान के पंजाब की रहने वाली थीं, वह बंटवारे के बाद भारत आई और दिल्ली में बस गयी थीं। सुभद्रा पहले अंबाला और करनाल से सांसद रह चुकी थीं और पंडित जवाहरलाल नेहरू के कहने पर बलरामपुर के चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हुई थीं। सुभद्रा चाहती थीं कि पंडित नेहरू खुद बलरामपुर आकर उनका प्रचार करें। वहीं, नेहरू अटल बिहारी के खिलाफ प्रचार नहीं करना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने लोकप्रिय चेहरों की तलाश करते हुए बॉलीवुड एक्टर बलराज साहनी को प्रचार के लिए चुना।

बलराज साहनी फिल्म 'दो बीघा जमीन' से पूरे देश में पॉपुलर हो गए थे। इस फिल्म में उन्होंने शंभू का रोल निभाया था जो गरीबी से लड़ता है। पंडित नेहरू ने अंदाजा लगाया कि नेता से ज्यादा लोग फिल्म स्टार को पसंद करते हैं। ऐसे में अगर कोई एक्टर सुभद्रा जोशी के लिए प्रचार करेगा तो उन्हें काफी फायदा मिलेगा। इसी सोच के साथ पंडित नेहरू ने बलराज साहनी से बात की और उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी के लिए बलरामपुर में प्रचार करने को कहा।

सुभद्रा की सभाओं में जमकर भीड़

दुलीचंद बताते हैं कि ये पहला मौका था जब कोई फिल्म स्टार चुनाव प्रचार करने के लिए उतरा था। बलरामपुर में जब ये बात फैल गयी कि सुभद्रा के लिए प्रचार करने बलराम साहनी आ रहे हैं तो उनकी सभाओं में भीड़ उमड़ने लगी। जब सुभद्रा की सभाओं में जमकर भीड़ इकट्ठा होने लगी तो कांग्रेस ने मैदान में बलराम साहनी को उतारा।

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जब बलराज साहनी बलरामपुर पहुंचे तो उन्हें शायर बेकल शाही के घर में ठहराया गया। वहां सुभद्रा जोशी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार की स्क्रिप्ट तैयार की। अगले दिन, जीप से सुभद्रा और बलराज साहनी प्रचार के लिए निकले। जब बलराज बलरामपुर की गलियों से गुजरे तो लोग उनकी एक झलक पाने के लिए अपने घरों की छतों और खिड़कियों पर खड़े दिखे। गलियों में और मैदान पर इतनी भीड़ उमड़ी कि पैर रखने की जगह नहीं थी। बलराज साहनी ने शाम तक जनसभा की।

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अटल बिहारी की जीती हुई सीट हार में बदल गई

बलराज साहनी की जनसभा के बाद सुभद्रा जोशी के पक्ष में ऐसा माहौल बना कि अटल बिहारी की जीती हुई सीट हार में बदल गई। प्रचार के बाद जब चुनाव के नतीजे आए तो अटल बिहारी वाजपेयी हार चुके थे। सुभद्रा जोशी ने अटल को मात्र 2052 वोट से चुनाव हरा दिया और उनकी जीती सीट हाथ से निकल गई। अटल बिहारी को हराने के लिए पंडित नेहरू का यह तरीका काम कर गया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जिद के बाद, अटल बिहारी को राज्यसभा से संसद भेजा गया लेकिन इस हार को वह कभी भूल नहीं पाए। इस हार का जिक्र उन्होंने अपनी किताब 'मेरी संसदीय यात्रा' में भी किया है। अटल साइकिल और बैलगाड़ी पर लोगों के बीच पहुंच जाते थे। उनका ज्यादातर समय बलरामपुर में बीता था। ऐसे में उन्हें लगा ही नहीं था कि वे चुनाव हार सकते हैं पर बलराज साहनी के प्रचार ने पूरे माहौल को ही बदल दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी को इस हार ने अंदर तक हिला दिया था। वे चुनाव हारने के बाद भी लगातार बलरामपुर आते रहे। 1967 के चुनाव में बलरामपुर में फिर सुभद्रा जोशी और अटल के बीच आमना-सामना हुआ। उन्होंने सुभद्रा जोशी को 32,000 से अधिक वोटों से हराया और संसद में पहुंचे।

चुनाव मैदान में उतरीं डिंपल यादव

फिल्म स्टार के असर का ऐसा ही वाकया 2009 के चुनाव में हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव कन्नौज और फिरोजाबाद से चुनाव लड़े। कन्नौज में उन्होंने बसपा प्रत्याशी डॉ महेश चंद्र वर्मा को और फिरोजाबाद में बसपा में रहे एसपी सिंह बघेल को हराया। दो सीटों पर एक साथ सांसद रहने का नियम नहीं है इसलिए अखिलेश को एक सीट छोड़नी थी। जिसके बाद उन्होंने फिरोजाबाद सीट की सांसदी से इस्तीफा दे दिया।

नवंबर 2009 में यहां उपचुनाव हुआ। सपा ने यहां अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव को प्रत्याशी बना दिया। दूसरी तरफ, कांग्रेस ने राज बब्बर को प्रत्याशी बनाया था। सपा के साथ अमर सिंह भी थे। प्रचार में बॉलीवुड के कई सितारे उतर आए। दोनों तरफ से हो रहे प्रचार के बीच राज बब्बर खेमे को लग रहा था कि सपा यहां आगे चल रही है। ऐसे में राज बब्बर ने गोविंदा और सलमान खान को प्रचार के लिए बुला लिया। सलमान खान ने फिरोजाबाद में रोड शो किया। सलमान को देखने के लिए इतनी भीड़ उमड़ी कि सपा की चिंता बढ़ गई।

जब सलमान खान को 'वांटेड' कहना अमर सिंह को पड़ा भारी

चुनाव में सिर्फ 1 हफ्ते बचे थे तब अमर सिंह ने तय किया कि बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के जवाब में वह भी सितारे ही बुलाएंगे। वह संजय दत्त, जया प्रदा और जया बच्चन को लेकर आए। इसी सभा में अमर सिंह से एक गलती हो गई। उन्होंने सलमान खान को वॉन्टेड कह दिया। उन पर लगे केस की चर्चा कर दी। इसके अलावा कुछ ऐसी बातें भी कहीं जो मुस्लिम वर्ग के दिल पर लग गई।

इस बीच राज बब्बर ने अमर सिंह के खिलाफ कुछ नहीं बोला लेकिन उनके बोले हुए शब्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच गए। मुस्लिम वोट में फूट पड़ गई। जो अब तक सपा की तरफ थे वह पलटकर कांग्रेस खेमे में चले गए। चुनाव के आखिरी नतीजे आए तब राज बब्बर डिंपल यादव से 85,343 वोटों से जीत चुके थे।

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