scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

Raebareli Lok Sabha Chunav: जब रायबरेली के पहले सांसद फ‍िरोज गांधी ने ह‍िला दी थी कांग्रेस की सरकार, व‍ित्‍त मंत्री को देना पड़ा था इस्‍तीफा

रायबरेली लोकसभा सीट के पहले सांसद फिरोज गांधी का संसद में द‍िया पहला भाषण और उसके असर का पूरा ब्‍योरा बर्ट‍िल फाक ने अपनी क‍िताब 'FEROZE The Forgotten GANDHI' में ल‍िखा है।
Written by: shrutisrivastva
नई दिल्ली | Updated: May 03, 2024 15:19 IST
raebareli lok sabha chunav  जब रायबरेली के पहले सांसद फ‍िरोज गांधी ने ह‍िला दी थी कांग्रेस की सरकार  व‍ित्‍त मंत्री को देना पड़ा था इस्‍तीफा
रायबरेली से फ‍िरोज गांधी पहली बार सांसद बने थे। अब राहुल गांधी पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 में रायबरेली से उम्‍मीदवार हैं। उन्‍होंने 3 मई को पर्चा दाख‍िल क‍िया। (फोटो सोर्स: एक्‍स)
Advertisement

Raebareli Lok Sabha Seat से पहली बार राहुल गांधी अपनी चुनावी क‍िस्‍मत आजमाने के ल‍िए मैदान में उतर चुके हैं। रायबरेली गांधी पर‍िवार की पारंपर‍िक सीट रही है। पहले ही चुनाव (1951-52) में सबसे पहले फ‍िरोज गांधी यहां से सांसद बने थे। उन्‍होंने बतौर सांसद खूब तहलका भी मचाया था। उन्‍होंने अपनी पार्टी कांग्रेस की ही सरकार पर भ्रष्‍टाचार को लेकर कई बार हमला बोला। संसद में द‍िए उनके भाषणों और घपलों से जुड़े तथ्‍यों का इतना असर हुआ क‍ि उद्योगपत‍ि डालम‍िया को दो साल और मूंधड़ा को 22 साल जेल की सजा हुई। यही नहीं, व‍ित्‍त मंत्री तक को इस्‍तीफा देना पड़ा।

Bertil Falk ने रोली बुक्‍स से प्रकाश‍ित अपनी क‍िताब 'FEROZE The Forgotten GANDHI' में बताया है क‍ि सांसद बनने के बाद कुछ साल तक तो फ‍िरोज गांधी संसद में पीछे की बेंच पर चुपचाप बैठे रहा करते थे। लेक‍िन, जब 6 द‍िसंबर, 1955 को उन्‍हें पहली बार सदन में भाषण देने का मौका म‍िला तो उन्‍होंने धज्‍ज‍ियां उड़ा दीं।

Advertisement

जीवन बीमा व‍िधेयक पर बहस के ल‍िए पांच घंटे आवंट‍ित क‍िए गए थे। एक घंटा 50 म‍िनट अकेले फ‍िरोज गांधी बोले। उनका पहला भाषण इतना असरदार था क‍ि बाकी सांसद तो उनके भाषण से प्रभाव‍ित हुए ही, इसका असर यह हुआ क‍ि उद्योगपत‍ि राम कृष्‍ण डालम‍िया को अंतत: जेल जाना पड़ा। बाद में भी कई मौकों पर उनके तथ्‍यों से भरपूर जोरदार भाषणों का असर यह हुआ क‍ि कई लोगों की कुर्सी ह‍िल गई।

लोकसभा में फिरोज गांधी का पहला भाषण

फिरोज गांधी ने अपना भाषण डालमिया-जैन समूह के स्वामित्व वाली भारत इंश्योरेंस कंपनी को समर्पित किया, जिसने 22,00,000 रुपये की गड़बड़ी की थी। अपने विस्तृत भाषण में, फ़िरोज ने गबन के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का खुलासा किया। भारत इंश्योरेंस कंपनी डालमिया-जैन की तो बस एक यूनिट थी और फ़िरोज ने अपना भाषण इस पर केंद्रित किया कि कैसे ग्रुप की बाकी यूनिट्स का भी इस्तेमाल चेयरमैन और अन्य उच्च अधिकारियों के फायदे के लिए किया गया था।

Advertisement

किताब के मुताबिक, फ़िरोज ने कहा कि वह सदन को यह बताना चाहते थे कि इन बीमा कंपनियों के पैसे के साथ-साथ उन कंपनियों के पैसे का भी दुरुपयोग कैसे किया गया, जिनमें ये पैसे निवेश किए गए थे। उन्होंने यह बताते हुए शुरुआत की कि कैसे डालमिया ने एक ज्योतिषी से प्रेरित होकर चांदी खरीदकर अपना करियर शुरू किया था। समूह के गलत कदमों, कंपनियों की बिक्री और खरीद, शेयरों के ट्रांसफर और अन्य बातों पर उनके विस्तृत विवरण ने सदन को मजबूती से बांधे रखा।

Advertisement

'जायंट किलर' कहलाए फिरोज गांधी

यहां फिरोज ने पहली बार अपना कमाल दिखाया कि कैसे वो अलग-अलग स्रोत से तथ्‍य इकट्ठा कर सकते हैं। उन्‍होंने सभी तथ्यों को इस तरह व्यवस्थित और पेश किया कि उन्‍हें 'जायंट किलर' (Gaint Killer) कहे जाने का आधार उनके पहले ही भाषण से तय हो गया था। फिरोज के भाषण के आधार पर कोर्ट में मामला चला। डालमिया-जैन ग्रुप के संस्थापक रामकृष्ण डालमिया को दो साल की जेल हुई।

फ़िरोज बीमा क्षेत्र का राष्ट्रीयकरण करने से कहीं आगे जाना चाहते थे। वह चाहते थे कि सरकार एक स्पष्ट नीति बनाए जो उसे संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने में सक्षम बनाए। इसका परिणाम यह हुआ कि जब जून 1956 में भारतीय जीवन बीमा अधिनियम पारित किया गया तो लगभग 250 बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में विलय कर दिया गया। तेरह साल बाद, प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी ने उनके नक्शेकदम पर चलते हुए चौदह प्राइवेट बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया।

जब रेलवे पर उठाए फिरोज ने सवाल

बर्टिल अपनी किताब में लिखते हैं क‍ि 1930 के दशक की मंदी और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, रेलवे का स्‍तर गिर गया था और 1956 तक भी इसमें सुधार नहीं द‍िख रहा था। 26 अगस्त 1957 को रेल उप मंत्री शाहनवाज खान ने सदन में स्वीकार किया गया कि TELCO (TATA इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव कंपनी) से बॉयलर और लोकोमोटिव खरीदने की कीमत भारत के अंदर और बाहर अन्य निर्माताओं से बॉयलर और लोकोमोटिव खरीदने से अधिक है।

फ़िरोज को रेलवे बोर्ड और टेल्को के बीच बॉयलरों के लिए समझौता भी अजीब लगा। जो बात अखरने वाली थी, उनमें से एक अहम बात यह थी क‍ि टेल्‍को को जून 1946 तक 50 बॉयलर्स देने थे, लेक‍िन द‍िया गया 1954 तक। फ‍िरोज का साफ कहना था कि यह सही नहीं है कि बुरे प्रबंधन की कीमत करदाताओं को चुकानी पड़े।

फिरोज ने सदन को बताया कि 1930 में अजमेर वर्कशॉप में लोकोमोटिव बनाने की प्रति टन लागत 1000 रुपये थी जबकि इंपोर्टेड लोकोमोटिव की कीमत 1170 रुपये थी। 1950 में सरकार ने अजमेर वर्कशॉप बंद कर दी और टेल्‍को के साथ करार कर लिया।

रेल मंत्री भी हुए निरुत्तर

उस समय के रेल मंत्री बाबू जगजीवन राम थे। बहस के दौरान मंत्री ने सदन को बताया कि अजमेर वर्कशॉप 1940 में बंद हुई थी, 1950 में नहीं जैसा कि फिरोज ने कहा था। इसके जवाब में फिरोज ने सदन को बताया कि उन्हें यह जानकारी 'भारतीय रेलवे के 100 वर्ष' नामक प्रकाशन से मिली है, जिसे भारतीय रेलवे ने ही प्रकाशित किया है।

सदन के अध्यक्ष ने अत‍िर‍िक्‍त जानकारी दी क‍ि वास्तव में अजमेर वर्कशॉप ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बारह लोकोमोटिव का उत्पादन किया था। लेक‍िन, बाबू जगजीवन इससे अधिक कुछ नहीं कह सके कि 'हम सदन के सदस्यों द्वारा की गई सभी टिप्पणियों को ध्यान में रखेंगे।'

प्रधानमंत्री नेहरू से भी भिड़ जाते थे फिरोज

किताब में बर्टिल लिखते हैं कि कई साल बाद जगजीवन राम ने कहा था, 'फ़िरोज गांधी उन लोगों में से एक थे जो देश की मिट्टी से जुड़े थे। वह एक महान सांसद, महान राजनीतिज्ञ और देश के गरीब लोगों के निडर समर्थक थे। उनके जीवन में ऐसे मौके भी आये जब उन्हें प्रधानमंत्री नेहरू से झगड़ा करना पड़ा। वे प्रधानमंत्री ही नहीं, उनके ससुर भी थे। फ़िरोज के लिए मेरा सम्मान तब और बढ़ गया, जब उन्होंने रेल मंत्री के तौर पर मेरी आलोचना की। रेलवे पर बहस की तैयारी के लिए उन्होंने अपनी आंखों पर इतना जोर डाला कि इसके बाद उन्हें चश्मे की जरूरत पड़ गई। रेल मंत्रालय की कुछ रिपोर्टें इतनी छोटी छपती थीं कि उन्हें अपनी आंखों पर बहुत ज़ोर देना पड़ता था।

फिरोज की स्पीच के चलते वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णामाचारी को देना पड़ा इस्तीफा

फिरोज गांधी को जायंट किलर का तमगा तब मिला जब उनकी स्पीच के चलते वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णामाचारी (TTK) को इस्तीफा देना पड़ा। फिरोज का भाषण मूंधड़ा स्कैंडल से जुड़ा था। जानकारी के लिए बता दें कि हरिदास मूंधड़ा ने सट्टेबाजी और फंड और शेयरों के हेरफेर के माध्यम से कई भारतीय कंपनियों का नियंत्रण और स्वामित्व हासिल कर लिया था। मूंधड़ा मामला भी बीमा क्षेत्र से जुड़ा हुआ था। जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने हरिदास मूंधड़ा से जुड़े उद्यमों में 1,26,86,100 रुपये का निवेश किया था। इसके ल‍िए एलआईसी ने 55 लाख जीवन-बीमा पॉलिसीधारकों के प्रीमियम का पैसा इस्‍तेमाल क‍िया था और शेयर भी बाजार भाव से महंगा खरीदा था।

जब कांग्रेस सांसद राम सुभग सिंह ने कहा कि इस निवेश में गड़बड़ी है तो टीटीके ने कहा कि यह सुरक्ष‍ित न‍िवेश कर फायदा कमाने के ल‍िए क‍िया गया था।

जब फ़िरोज इस बहस में उतरे तो उन्‍होंने टीटीके की बात को गलत साब‍ित करते हुए कहा क‍ि ये निवेश उस दिन किए गए थे जब कलकत्ता और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज बंद थे। उन्होंने शेयर बाजार की बारी‍क‍ियों की पूरी व्‍याख्‍या करते हुए द‍िनवार शेयरों के भाव बताते हुए पूरे तथ्‍य के साथ अपनी बात रखी और कहा, 'मैं न चाहते हुए भी इस दुखद निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि यह मूंधड़ा की मदद करने का एक तरीका था, जो उस समय वित्तीय कठिनाइयों में थे।' फिरोज गांधी ने अपना भाषण यह कहते हुए खत्म किया था कि सरकार एक जांच समिति बनाए।

सरकार को जांच सम‍ित‍ि बनानी पड़ी। बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमसी छागला जांच सम‍ित‍ि के अध्‍यक्ष बनाए गए। फिरोज उस कमेटी में पहले गवाह के तौर पर पेश हुए।

फ़िरोज के निकाले गए तथ्यों में से एक यह था कि हरिदास मूंधड़ा द्वारा एलआईसी को दिए गए कुछ शेयर जाली थे। छागला ने पाया कि फ़िरोज के आरोप सही थे और हरिदास मूंधड़ा को 22 साल की जेल हुई और डील का संवैधान‍िक दाय‍ित्‍व टी.टी. कृष्णामाचारी पर डाला गया। उन्‍हें कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा और फ़िरोज का 'जायंट किलर का तमगा पुख्‍ता हो गया।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 चुनाव tlbr_img2 Shorts tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो