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'राम' से पहले 'रावण' को भी चुनाव लड़ा चुकी है भाजपा, राजीव गांधी के साथ कांग्रेस का प्रचार कर चुके हैं अरुण गोविल

पहली बार चुनावी मैदान में उतरे अरुण गोविल को भाजपा ने अपने तीन बार के सीटिंग सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया है।
Written by: स्पेशल डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: March 29, 2024 18:07 IST
 राम  से पहले  रावण  को भी चुनाव लड़ा चुकी है भाजपा  राजीव गांधी के साथ कांग्रेस का प्रचार कर चुके हैं अरुण गोविल
टीवी सीरियल रामायण का एक पोस्टर (Express archive photo)
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दीपानिता नाथ

लगभग चार दशक पहले टीवी सीरियल 'रामायण' में मुख्य भूमिका निभाने के बाद से अरुण गोविल हिंदुओं के आराध्य राम का चेहरा बन गए हैं। हालांकि, अरुण गोविल के बहुत से प्रशंसकों को भी यह नहीं मालूम होगा कि शुरुआत में रामायण के निर्माता/निर्देशक रामानंद सागर ने गोविल को राम के रोल में फिट नहीं पाया था और रिजेक्ट कर दिया था।

दूसरी तरफ अभिनेता के परिवार के सदस्यों और दोस्तों भी उन्हें धार्मिक शो में काम न करने की सलाह दी थी। उनके शुभचिंतकों को ऐसा लग रहा था कि रामायण में काम करने के बाद उनके कमर्शियल फिल्मों में उनकी संभावनाएं कम हो जाएंगी।

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साल 2019 में द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अरुण गोविल ने कहा था, "मेरे रिजेक्ट होने के बाद, रामानंद जी के बेटों ने मुझसे भरत या लक्ष्मण का किरदार निभाने का आग्रह किया और कहा कि ये स्ट्रांग कैरेक्टर हैं। लेकिन, मेरी दिल से इच्छा भगवान राम की भूमिका निभाने की थी।"

भाजपा ने गोविल को उनकी जन्मभूमि से बनाया उम्मीदवार

रविवार (24 मार्च, 2024) को सत्तारूढ़ भाजपा ने अरुण गोविल को उनके जन्मस्थान मेरठ से अपना लोकसभा उम्मीदवार बनाया है। चुनावी दृष्टि से महत्वपूर्ण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राज्य की 80 में से लगभग 19 सीटें हैं।

पहली बार चुनावी मैदान में उतरे अरुण गोविल को भाजपा ने अपने तीन बार के सीटिंग सांसद राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर उम्मीदवार बनाया है। अग्रवाल साल 2009 से लगातार मेरठ सीट से जीत रहे हैं।

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साल 2019 के लोकसभा चुनावों में अग्रवाल ने बसपा के हाजी याकूब कुरैशी को 4,729 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। हालांकि, 2014 के चुनावों में उनकी जीत का अंतर 2.32 लाख वोटों से अधिक था, जब उन्होंने बसपा के मोहम्मद शाहिद अखलाक को हराया था।

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आगामी चुनावों के लिए भाजपा ने पश्चिमी यूपी के एक प्रमुख राजनीतिक दल RLD (राष्ट्रीय लोक दल) के साथ भी गठबंधन किया है, जो पिछले महीने विपक्षी 'इंडिया गठबंधन' को छोड़कर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल हो गई थी। भाजपा ने जयंत चौधरी के नेतृत्व वाले आरएलडी को दो सीटें, बागपत और बिजनौर दी हैं।

सिर्फ रामायण ही नहीं, इन फिल्मों में भी किया है काम

लोगों की कल्पना में राम के रूप में स्थापित होने के बावजूद, अभिनेता ने थिएटर और बॉलीवुड में कई अन्य भूमिकाएं निभाई हैं। उन्होंने थिएटर की शुरुआत स्कूल से की थी। वह मेरठ के गवर्नमेंट इंटर कॉलेज में शौकिया तौर पर थिएटर ग्रुप के हिस्सा थे।

1970 के दशक के मध्य में मुंबई में राजश्री प्रोडक्शंस की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने उन्हें फिल्म पहेली (1977) में सहायक किरदार के रूप में कास्ट किया।

कुछ साल बाद राजश्री ने गोविल की मुख्य भूमिकाओं वाली तीन फिल्में रिलीज कीं। उन्होंने 'सावन को आने दो' में जरीना वहाब के किरदार चंद्रमुखी से प्यार करने वाले एक युवा ग्रामीण गायक की भूमिका निभाई। 'सांच को आंच नहीं में' गोविल और मधु कपूर युवा प्रेमी थे जिन्हें अपने परिवारों के विरोध का सामना करना पड़ा था। दोनों फिल्में हिट रहीं लेकिन तीसरी फिल्म और सीता, जिसमें गोविल का किरदार लव ट्राएंगल में फंसा है, अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके अलावा गोविल ने क्षेत्रीय सिनेमा में भी काम किया।

रामायण करने का क्या हुआ नुकसान?

1985 में उन्होंने सागर्स के प्रोडक्शन में बनी विक्रम और बेताल में राजा विक्रम के रूप में टीवी सीरियल में कदम रखा। दूरदर्शन के लिए रामानंद सागर द्वारा रामायण पर एक टीवी सीरियल बनाने की चर्चा जोरों पर थी - और गोविल ने भी इसकी मुख्य भूमिका के लिए ऑडिशन दिया था।

गोविल ने बताया था, "जो कुछ भी होता है उसका एक अच्छा और एक बुरा पक्ष होता है। एक ओर जहां मुझे टीवी पर भगवान राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता के रूप में जाना जाने लगा। दूसरी ओर मैं सोचने लगा कि मुझे केवल इस भूमिका के लिए ही क्यों जाना जाता है, अन्य किरदारों के लिए क्यों नहीं जाना जाता है? मुझे एक ही तरह के रोल मिलने लगे। फिर मैंने धूम्रपान करना बंद कर दिया क्योंकि अगर लोग आ रहे थे और मेरे पैर छू रहे थे, तो वे मुझे सिगरेट के साथ नहीं देखना चाहेंगे। हमारे देश में आस्था और धर्म बहुत मजबूत हैं और हमें इसका सम्मान करना होगा।" गोविल ने हाल ही में आर्टिकल 370 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वह ओएमजी-2 में भी नजर आए थे।

'राम' से पहले भाजपा ने 'रावण' को लड़ाया था चुनाव

1990 की शुरुआत में जब राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन चरम पर था। भाजपा ने 1991 के लोकसभा चुनाव में रावण की भूमिका निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी और सीता की भूमिका निभाने वाली दीपिका चिखलिया को गुजरात से मैदान में उतारा था। चिखलिया वडोदरा से चुनाव जीत गई थीं।

Dipika Chikhlia
भाजपा सांसद बनने के बाद दीपिका चिखलिया (Express archive photo)

लंकेश के नाम से चर्चित अरविंद त्रिवेदी ने साबरकांठा निर्वाचन क्षेत्र से अपना पहला चुनाव जीता था। 1996 के चुनावों में वह गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री अमर सिंह चौधरी की पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार निशा चौधरी से हार गए थे।

मोदी मेरठ से करेंगे चुनावी रैली की शुरुआत

इस साल 22 जनवरी में पीएम मोदी ने राम मंदिर का उद्घाटन किया था। राम मंदिर निर्माण का मुद्दा लंबे समय तक भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा रहा है। इसी संदर्भ में भाजपा द्वारा गोविल का चयन महत्वपूर्ण है।

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद आने वाले सप्ताह में मोदी उत्तर प्रदेश में अपनी पहली सार्वजनिक रैली मेरठ में करेंगे, इससे जाहिर है सीट का चुनाव स्पष्ट रूप से संयोग नहीं है।

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(PC- IE)

ये भी पढ़ें: कांग्रेस प्रचार कर चुके हैं टीवी के राम

टीवी के राम अरुण गोविल राजीव गांधी के साथ मिलकर कांग्रेस का प्रचार कर चुके हैं। 1988 में राजीव गांधी ने उन्हें कांग्रेस में शामिल होने और चुनाव लड़ने का भी प्रस्ताव दिया था, लेकिन गोविल ने प्रस्ताव ठुकरा दिया था। गोविल साल 2021 में भाजपा में शामिल हुए थे। विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:

Ramayan
बाएं से- राम की भूमिका में अरुण गोविल और सीता की भूमिका में दीपिका चिखलिया

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