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लोकसभा चुनाव 2024: ड‍िंपल का मैनपुरी में क्‍या है प्‍लान? बीजेपी के ल‍िए भी जंग नहीं आसान

डिंपल यादव कन्नौज से हार गई थीं बाद में मुलायम की मौत के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने मैनपुरी सीट जीत ली थी।
Written by: shrutisrivastva
नई दिल्ली | Updated: May 02, 2024 18:51 IST
लोकसभा चुनाव 2024  ड‍िंपल का मैनपुरी में क्‍या है प्‍लान  बीजेपी के ल‍िए भी जंग नहीं आसान
मैनपुरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं डिंपल यादव (PTI)
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आगामी लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के लिए एक बड़ी परीक्षा है। अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव उत्तर प्रदेश के कन्नौज और मैनपुरी से चुनाव लड़ रहे हैं। यह दोनों सीटें पहले सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने जीती थीं। एक तरफ जहां अखिलेश अपने दिवंगत पिता की जगह भरने की कोशिश कर रहे हैं, इन दो निकटवर्ती निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम पर बारीकी से नजर रखी जाएगी यह देखने के लिए कि वह कितना आगे आए हैं? आइये जानते हैं मैनपुरी के बारे में और कैसे यह क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ बन गया।

मैनपुरी सीट की बात करें तो लोकसभा चुनाव 2019 में, डिंपल यादव कन्नौज से हार गई थीं लेकिन मुलायम सिंह की मौत के कारण खाली हुई मैनपुरी सीट पर उन्होंने जीत हासिल की थी। मुलायम सिंह यादव ने पांच बार - 2019, 2014, 2009, 2004 और 1996 में मैनपुरी से जीत हासिल की थी। दिसंबर 2022 के उपचुनाव में डिंपल ने यहां 2.88 लाख वोटों से जीत हासिल की थी लेकिन इसे काफी हद तक सहानुभूति वोट के रूप में देखा गया था, जहां अखिलेश-डिंपल और चाचा शिवपाल ने मुलायम के नाम पर वोट की अपील की थी।

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प्रचार में डिंपल यादव को नहीं म‍िल पा रहा पर‍िवार का ज्‍यादा साथ

इस बार के लोकसभा चुनाव में अखिलेश जहां कन्नौज में अपना प्रचार कर रहे हैं और शिवपाल अपने बेटे की सीट बदायूं में व्यस्त हैं। डिंपल अकेले ही चुनाव मैदान में हैं। वह अच्छे से जानती हैं कि कब मुलायम सिंह के नाम का जिक्र करना है। मतदाताओं से उनकी लिखित अपील में बार-बार नेताजी का जिक्र किया गया, उनके द्वारा किए गए कार्यों को लिस्ट किया गया और उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने की कसम खाई गई। मैनपुरी में हर तरफ मुलायम सिंह यादव के ही किस्से हैं।

डिंपल अपना ज्यादातर समय जटवारा और इमालिया समेत गैर-यादव बहुल गांवों में बिता रही हैं। ये दोनों गांव भोगांव सीट में आते हैं, जहां 2019 में मुलायम सिंह के जीतने के बाद भी बीजेपी काफी आगे थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में मैनपुरी की पांच सीटों में से सपा ने तीन और भाजपा ने दो पर जीत हासिल की थी। अखिलेश करहल से विधायक चुने गये जबकि मुलायम के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव जसवन्तनगर से जीते थे।

डिंपल यादव की चुनावी रणनीति

डिंपल यादव की सभाओं में शाक्य, पाल और लोध समुदाय की महिलाओं की ज्यादा संख्या इकट्ठा करने की जिम्मेदारी सपा के जिला अध्यक्ष और पूर्व मंत्री आलोक शाक्य ने संभाली है। लोध राजपूत नेता कमल वर्मा ने कहा कि भाजपा ने उनकी पत्नी को मैनपुरी नगर पालिका अध्यक्ष पद से वंचित कर उनका अपमान किया है। वह इसके लिए मैनपुरी के मौजूदा विधायक और ठाकुर नेता जयवीर सिंह को दोषी मानते हैं, जो मैनपुरी से भाजपा के लोकसभा उम्मीदवार हैं।

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ज़ोर-शोर से प्रचार अभियान में जुटीं डिंपल

डिंपल के प्रचार अभियान में गुलशन देव शाक्य को भी शामिल किया गया है, जिन्हें बसपा ने मैनपुरी से अपना उम्मीदवार घोषित किया था और फिर हटा दिया था। चुनाव अभियान में कांग्रेस नेता विनीता शाक्य को भी शामिल किया है। गुलशन का कहना है कि यह बीजेपी के शाक्य वोटों पर सेंध लगाने के लिए काफी होगा।

जहां तक ​​लोध राजपूतों का सवाल है, जो इस समुदाय के दिवंगत भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को बहुत सम्मान देते हैं। सपा लोगों को यह बता रही है कि कैसे मुलायम ने 2009 में कल्याण को एटा से निर्दलीय के रूप में लोकसभा सीट जीतने में मदद की थी जब उन्होंने भाजपा छोड़ी थी।

आसान नहीं है डिंपल यादव की राह

यादव वोट बैंक को सपा का आधार माना जाता है पर कई लोगों को लगता है कि अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। ओबीसी लोध राजपूत समुदाय के प्रभुत्व वाले जटपुरा गांव के एक निवासी प्रभु राम लोधी कहते हैं, “नेताजी यहां हर किसी को अपने परिवार की तरह मानते थे लेकिन पार्टी के मौजूदा नेता अहंकारी हैं। अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मेरे रिश्तेदार भाजपा को वोट देते हैं और मैं भी ऐसा ही कर सकता हूं।''

ऐसे ही जटवारा गांव के लोध जवाहर लाल कहते हैं, “जब बाबूजी (कल्याण सिंह) की मृत्यु हुई तो अखिलेश श्रद्धांजलि देने के लिए उनके घर नहीं गए, वहीं, जब एक माफिया मुख्तार अंसारी की मौत हुई तो वह और सपा नेता ग़ाज़ीपुर पहुंचे।

सपा पर परिवारवाद का आरोप

मैनपुरी के कई लोगों को लगता है कि सपा में परिवारवाद हावी है। मैनपुरी शहर में एक किराना दुकान के मालिक राजू शाक्य इंडियन एक्स्प्रेस से कहते हैं, “भले ही अभी नहीं, भाजपा यादव परिवार के एकाधिकार को हरा देगी और भाजपा इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही है। सोचिए, खुद को यादवों की पार्टी कहने वाली पार्टी ने इस चुनाव में पांच यादवों को मैदान में उतारा और वो पांचों यादव उसी एक परिवार से हैं। उन्हें कहीं भी कोई अन्य यादव नहीं मिला?"

डिंपल यादव के लिए चिंता का एक विषय बसपा उम्मीदवार शिव प्रसाद यादव होंगे, जिनसे सपा के यादव वोट में कटौती की उम्मीद है। हालांकि, डिंपल ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें इसकी चिंता नहीं है और उन्हें सभी समुदायों से वोट मिलेंगे।

भाजपा की चुनौतियां

मैनपुरी भाजपा के लिए एक चुनौती है, भले ही वह उत्तर प्रदेश में सत्ता में है। भाजपा ने 2014 और 2019 दोनों लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की लेकिन वह कभी भी मैनपुरी नहीं जीत पाई। पिछले दशक में मैनपुरी में चार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें दो उपचुनाव भी शामिल हैं, हर बार सपा ने 50% से अधिक वोट हासिल किए हैं। हालांकि, 2022 के विधानसभा अभियान में कुछ सकारात्मक संकेत थे। पांच विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा ने दो -मैनपुरी और भोगांव जीते और अन्य तीन में सपा ने जीत हासिल की।

भाजपा ने कभी भी मैनपुरी लोकसभा सीट नहीं जीती है। सपा के जिला महासचिव भूपेन्द्र यादव इंडियन एक्स्प्रेस से बातचीत के दौरान कहते हैं, "सपा ने करहेल और जसवन्तनगर क्षेत्रों में निर्णायक बढ़त ले ली है, जहां 90% मतदाता यादव हैं।" एक भाजपा नेता के अनुसार, "90% शाक्य भाजपा का समर्थन करते हैं और बसपा ने सपा से 30,000 से अधिक यादव वोट छीन लिए हैं।"

भाजपा देगी सपा को चुनौती?

जमीनी स्तर पर भाजपा नेताओं का कहना है कि 2024 में सपा को चुनौती मिलेगी। भाजपा जिला अध्यक्ष राहुल चतुर्वेदी ने इंडियन एक्स्प्रेस से बातचीत के दौरान कहा, "पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि अच्छी है। यह प्रधानमंत्री के रूप में मोदीजी का तीसरा कार्यकाल होगा और लोग उनकी गारंटी का समर्थन कर रहे हैं। भाजपा इस बार सीट जीतेगी।”

मैनपुरी सीट से भाजपा के उम्मीदवार जयवीर सिंह हैं, जिन्होंने मैनपुरी विधानसभा सीट जीती थी और उन्हें उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री के पद से पुरस्कृत किया गया था। ब्लॉक प्रमुख से विधायक बनने तकजयवीर सिंह ने मैनपुरी में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है। जहां यादव परिवार केवल चुनाव के दौरान दिखाई देते हैं, भाजपा उम्मीदवार स्थानीय हैं।

भाजपा उम्मीदवार जीत को लेकर आश्वस्त

जयवीर इंडियन एक्स्प्रेस से बातचीत के दौरान कहते हैं, "हमेशा पहली बार होता है और इस बार आप इतिहास देखेंगे। मुझे विश्वास है कि मैं जीतूंगा क्योंकि यादव परिवार के विपरीत जो केवल चुनावों के दौरान दिखाई देते हैं, मैं स्थानीय हूं और वहां के लोग मुझे जानते हैं। मेरे पास विकास कार्य और केंद्र की योजनाएं हैं, जो वोट में तब्दील होंगी। पहले अधिकांश ब्लॉक प्रमुख या विधायक यादव वंश से होते थे लेकिन मैंने किला भेद दिया है। मैंने ब्लॉक चुनाव जीता, एमएलए चुनाव जीता और अब यह भी जीतूंगा।”

भाजपा ने छोटे-छोटे समूहों को अपने साथ जोड़कर और उन्हें यादव समूहों के खिलाफ खड़ा करके यूपी में सफलता का स्वाद चखा है। अब वह खुद यादवों को भी निशाना बना रही है। पार्टी ने इस बात पर ज़ोर डाला है कि एक यादव अब भाजपा शासित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह क्षेत्र में कई रैलियों को संबोधित कर रहे हैं।

मैनपुरी लोकसभा चुनाव परिणाम

पिछले लोकसभा चुनाव की बात की जाये तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने यह सीट जीती थी। मुलायम को 5.24 लाख (53.75%) वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य थे जिन्हें 4.30 लाख (44.09%) वोट मिले थे। वहीं, 2014 के लोकसभा चुनावों में भी मुलायम सिंह ने यह सीट 5.95 लाख (59.63%) वोट से जीती थी। दूसरे स्थान पर बीजेपी के शत्रुघ्न सिंह चौहान को 2.31 लाख (23.14%) वोट मिले थे।

पार्टीलोकसभा चुनाव 2019 (वोट प्रतिशत)लोकसभा चुनाव 2014 (वोट प्रतिशत)
बीजेपी44.09%23.14%
बीएसपी2019 के चुनाव में यूपी में सपा और बसपा गठबंधन में थी14.29%
सपा53.75%59.64%
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