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Bihar: राम मंदिर के बाद भाजपा ने चला 'सीता मंदिर' का कार्ड! जानिए क्या है प्लान

सीतामढ़ी में लगभग 100 साल पहले एक मंदिर बनाया गया था, लेकिन अब वह अच्छी स्थिति में नहीं है- भाजपा सदस्य कामेश्वर चौपाल
Written by: Amitabh Sinha | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: March 19, 2024 12:09 IST
bihar  राम मंदिर के बाद भाजपा ने चला  सीता मंदिर  का कार्ड  जानिए क्या है प्लान
सीतामढ़ी मंदिर में स्थापित प्रतिमाओं की तस्वीर (PC- sitamarhi.nic.in)
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अयोध्या में राम मंदिर के बाद उत्तर बिहार के सीतामढ़ी जिले में सीता के लिए एक "भव्य मंदिर" बनाने की योजना है। माना जाता है कि सीता का जन्म सीतामढ़ी में हुआ था। बिहार सरकार ने सैद्धांतिक रूप से एक नया मंदिर बनाने के लिए सीतामढ़ी में मौजूदा मंदिर के आसपास 50 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने का फैसला किया है। बिहार कैबिनेट की शुक्रवार (15 मार्च) को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

बिहार के पूर्व एमएलसी और भाजपा सदस्य कामेश्वर चौपाल ने कहा, "सीता के लिए सीतामढ़ी वही है जो राम के लिए अयोध्या है। यह हिंदुओं के लिए पवित्र भूमि है। दुनिया भर से लोग अब अयोध्या में राम मंदिर में पूजा करने आएंगे और सीता की जन्मस्थली भी देखना चाहेंगे। हमारा तर्क यह है कि सीता के लिए उनकी प्रतिष्ठा के अनुरूप एक भव्य मंदिर सीतामढ़ी में बनाया जाना चाहिए।"

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कामेश्वर चौपाल का राम मंदिर से है पुराना कनेक्शन

चौपाल लंबे समय से सीतामढ़ी में भव्य सीता मंदिर की मांग कर रहे हैं। चौपाल ने ही 1989 में अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के दौरान पहली ईंट रखी थी। वर्तमान में चौपाल अयोध्या मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी भी हैं।

वह आगे कहते हैं, "सीतामढ़ी में एक मंदिर है जो लगभग 100 साल पहले बनाया गया था, लेकिन यह बहुत अच्छी स्थिति में नहीं है। हमारा प्रस्ताव एक नया मंदिर बनाने का है जो अयोध्या के राम मंदिर जितना ही भव्य हो।"

सरकार का क्या है प्लान?

50 एकड़ का जमीन अधिग्रहण उस 16.63 एकड़ के अतिरिक्त होगा जिसे बिहार सरकार ने मौजूदा मंदिर परिसर के आसपास के क्षेत्र के पुनर्विकास के लिए पहले अधिग्रहित किया था। मंदिर का निर्माण राम मंदिर की तरह ही एक सार्वजनिक ट्रस्ट द्वारा जुटाए गए धन से किया जाएगा।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने कहा, "सरकार मंदिर नहीं बना सकती। लेकिन यह मांग लगातार उठती रही है कि यहां एक भव्य मंदिर बनाया जाना चाहिए। सरकार इसे संभव बनाने के लिए भूमि का अधिग्रहण कर रही है।"

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सिद्धार्थ ने कहा, "जब मंदिर बनेगा तो बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आएंगे, उन्हें होटल और सार्वजनिक सुविधाओं आदि की आवश्यकता पड़ेगी। भूमि अधिग्रहण का निर्णय क्षेत्र में भविष्य के विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। राम मंदिर निर्माण के बाद इस स्थान को लेकर लोगों में अधिक रुचि बढ़ी है। यहां तिरुपति जैसी साइट विकसित करने की क्षमता है, और हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उस तरह के विकास के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो।"

केंद्र की एक प्रोजेक्ट का हिस्सा है सीतामढ़ी मंदिर

सीतामढ़ी रामायण सर्किट का हिस्सा है, जो रामायण में वर्णित 15 महत्वपूर्ण स्थानों का एक समूह है, जिसे केंद्र सरकार ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने मकसद से विकसित करने के लिए पहचाना है।

हालांकि नए मंदिर की मांग काफी समय से हो रही है, लेकिन कुछ साल पहले अयोध्या में मंदिर का निर्माण शुरू होने के बाद से इसमें तेजी आई है। बिहार सरकार ने क्षेत्र में एक पुनर्विकास परियोजना को मंजूरी दी थी और इस साल की शुरुआत में इसके लिए 72 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। भूमि अधिग्रहण का निर्णय सिद्धार्थ और बिहार सरकार के अन्य अधिकारियों के साथ भक्तों की बैठक के ठीक दो दिन बाद आया।

सुप्रीम कोर्ट के वकील अमरेंद्र सिंह ने एक नए मंदिर के लिए प्रयास करने वाले समूह का हिस्सा हैं, उन्होंने कहा, "यह बिहार में नीतीश कुमार सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे में व्यक्तिगत रुचि ली जो क्षेत्र और बाहर के लोगों की भावनाओं के बहुत करीब है। राज्य सरकार का निर्णय एक ऐसे मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है जो अयोध्या में राम मंदिर के बराबर हो सकता है।"

चौपाल ने कहा कि प्रस्तावित मंदिर के विवरण पर अभी भी काम किया जाना बाकी है, "अभी शुरुआती समय हैं। बिहार सरकार ने जमीन उपलब्ध कराना सुनिश्चित कर एक बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब यह हम जैसे लोगों, मौजूदा मंदिर को चलाने वाले ट्रस्ट और अन्य इच्छुक लोगों पर है कि वे इसे आगे बढ़ाएं। हम आने वाले वर्षों में सीतामढी और इस प्रस्तावित नये मंदिर को एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में देखने को इच्छुक हैं।"

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