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Lok Sabha Election 2024: 15 साल में 43 से सिर्फ 3 सीटों पर पहुंच गई सीपीएम, क्या अब है कुछ उम्मीद?

CPM Lok Sabha Election 2024: सीपीएम को मिल रही लगातार हार ने उसके अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
Written by: deepak prajapati
नई दिल्ली | Updated: April 20, 2024 19:08 IST
lok sabha election 2024  15 साल में 43 से सिर्फ 3 सीटों पर पहुंच गई सीपीएम  क्या अब है कुछ उम्मीद
(बाएं से) सीताराम येचुरी और माणिक सरकार। (PC- PTI)
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मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के लिए यह लोकसभा चुनाव करो या मरो का है। एक वक्त में पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में लंबे वक्त तक सरकार चलाने वाली सीपीएम अब सिर्फ केरल में ही सत्ता में है। केरल में भी उसका प्रदर्शन 2019 के लोकसभा चुनाव में बेहद खराब रहा था। केरल की 20 संसदीय सीटों में से वह सिर्फ एक सीट पर चुनाव जीत सकी थी।

सीपीएम को मिल रही लगातार हार ने उसके अस्तित्व पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिलने वाली सीटें लगातार कम होती जा रही हैं। इसके साथ ही पार्टी का वोट शेयर भी लगातार गिरता जा रहा है।

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Lok Sabha Election 2019: पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा में नहीं खुला खाता 

लोकसभा चुनावकितनी सीटों पर लड़ा चुनावजीती सीटेंवोट शेयर (प्रतिशत में)
20046943 5.66
200982165.33
20149393.25
20196931.75

2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे सीपीएम के लिए जबरदस्त झटका थे क्योंकि केरल की एक सीट के अलावा वह तमिलनाडु में सिर्फ दो लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर सकी थी। जबकि पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में उसका खाता भी नहीं खुल सका था।

साल 2011 में ममता बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी ने सीपीएम के पश्चिम बंगाल में चले 34 साल के लंबे शासन का अंत कर दिया था। पश्चिम बंगाल में सीपीएम ने 1977 से लेकर 2011 तक सरकार चलाई थी। लेकिन पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में सीपीएम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है।

West Bengal CPM: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के आंकड़े 

विधानसभा चुनावकितनी सीटों पर लड़ा चुनावजीती सीटेंवोट शेयर (प्रतिशत में)
200629417637.13
20112944030.08
20162942619.75
202129404.71

Tripura Assembly Election : त्रिपुरा में सीपीएम का प्रदर्शन 

पश्चिम बंगाल के अलावा त्रिपुरा में 1993 से लेकर 2018 तक चली सरकार की कमान भी सीपीएम के पास ही थी। लेकिन त्रिपुरा में पिछले दो विधानसभा चुनाव में उसे बीजेपी के हाथों लगातार शिकस्त मिली है। 2018 में उसने कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन बावजूद इसके वह बीजेपी को सत्ता से बाहर नहीं कर सकी थी। त्रिपुरा में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं।

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विधानसभा चुनावकितनी सीटों पर लड़ा चुनावजीती सीटेंवोट शेयर (प्रतिशत में)
2008604648.01%
2013604948.11%
2018601642.22%
2023471124.62%

Kerala Assembly Election 2021: केरल में सुधारा प्रदर्शन 

केरल में सीपीएम का प्रदर्शन 2006 के विधानसभा चुनाव के बाद 2011 के चुनाव में खराब हुआ लेकिन उसने वहां उसने कमबैक किया है। 2006 के विधानसभा चुनाव में उसने 140 सीटों पर चुनाव लड़कर 61 सीटें जीती थी जबकि 2011 में यह आंकड़ा 45 सीटों का हो गया था। 2016 में उसने 58 सीटें जीती और 2021 में वह 62 सीटें जीतने में कामयाब रही।

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INDIA West Bengal Alliance: ममता ने नहीं दी एक भी सीट

सीपीएम की राजनीतिक हैसियत पश्चिम बंगाल में इस कदर खराब हुई है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उसे एक भी सीट देने से इनकार कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल में वाम दल और कांग्रेस बीजेपी के एजेंट हैं और उन्होंने बंगाल में इनके साथ सीट बंटवारे पर किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया है। ममता बनर्जी यह भी कह चुकी हैं कि सीपीएम खत्म हो जाएगी।

LDF corruption charges: भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी केरल सरकार

एक ओर जहां सीपीएम का प्रदर्शन लगातार खराब होता जा रहा है, वहीं केरल में उसकी सरकार पर पिछले कुछ सालों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। इस लोकसभा चुनाव में यह आरोप सीपीएम के लिए मुसीबत बन रहे हैं। कई केंद्रीय एजेंसियां सीपीएम के बड़े नेताओं के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे हैं। इन नेताओं में मुख्यमंत्री पिनाराई विजय और उनकी बेटी वीणा विजयन भी शामिल हैं।

CPM Lok Sabha Election 2019: कैसे जनाधार वापस लाएगी पार्टी 

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने बेहद खराब प्रदर्शन के बाद सीपीएम ने इस बात को स्वीकार किया था कि मजदूरों और किसानों के बीच उसने अपना समर्थन खो दिया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या पार्टी के पास कोई रोडमैप है जिससे वह अपने खोए हुए समर्थन को फिर से हासिल कर सके।

ममता बनर्जी की तरह ही भाजपा के नेता भी कहते हैं कि सीपीएम और अन्य वाम दल कुछ वक्त में खत्म हो जाएंगे। निश्चित रूप से ताजा राजनीतिक हालात में सीपीएम के सामने अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने की बड़ी चुनौती है।

एक वक्त में ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य, माणिक सरकार जैसे बड़े चेहरों वाली इस पार्टी के पास आज ऐसा कोई जनाधार वाला नेता नहीं दिखाई देता जो उसे उसका खोया जनाधार वापस दिला सके।

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