scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला फिर भी बीजेपी के लिए राहत नहीं, जानिए कहां फंस रहा पेंच

क्या साल 2024 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके और बीजेपी गठबंधन इंडिया गठबंधन के लिए राज्य में कोई बड़ी चुनौती पेश नहीं कर पाएंगे?
Written by: Pawan Upreti
Updated: April 07, 2024 15:23 IST
तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला फिर भी बीजेपी के लिए राहत नहीं  जानिए कहां फंस रहा पेंच
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन। (PC- Express)
Advertisement

दक्षिण भारत के अहम राज्य तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव 2019 में डीएमके गठबंधन ने राज्य की 39 लोकसभा सीटों में से 38 सीटों पर जीत हासिल की थी। जबकि एआईएडीएमके गठबंधन को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी।

Advertisement

लेकिन इस बार राजनीतिक हालात अलग हैं क्योंकि पिछले चुनाव तक काफी मजबूत स्थिति में रही एआईएडीएमके इस बार टूट की शिकार है। पार्टी के अंदर पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम के धड़े अलग-अलग हैं और पार्टी पनीरसेल्वम को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। इससे निश्चित रूप से एआईएडीएमके कमजोर हुई है।

दूसरी ओर बीजेपी भी इस बार राज्य में मजबूत गठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में उतर रही है।

गठबंधन में कौन-कौन से हैं दल

विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की अगुवाई तमिलनाडु में डीएमके कर रहा है। तमिलनाडु में इंडिया गठबंधन में डीएमके के अलावा कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, वीसीके एमडीएमके और केएमडीके शामिल हैं। जबकि एआईएडीएमके गठबंधन में डीएमडीके, एसडीपीआई और पीटीके शामिल हैं।

Advertisement

बीजेपी के नेतृत्व वाले तीसरे गठबंधन में पीएमके, टीएमसी (एम) और एएमएमके शामिल हैं। अगर इन पार्टियों के 2019 के प्रदर्शन को देखें तो डीएमके गठबंधन वोट शेयर के मामले में काफी आगे था। तब एआईएडीएमके और बीजेपी ने 2019 का चुनाव एक साथ लड़ा था लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।

Advertisement

डीएमके गठबंधन को साल 2019 में 52.5 प्रतिशत वोट मिले थे। इसमें भी डीएमके को 33.1 प्रतिशट वोट मिले थे। लेकिन साल 2019 के लिहाज से देखें तो एआईएडीएमके गठबंधन को (तब बीजेपी साथ थी) को 21.3 प्रतिशत वोट मिले थे। इसमें से एआईएडीएमके ने अकेले 19.1 प्रतिशत वोट हासिल किए थे।

जबकि बीजेपी और वे दल जो उसके साथ इस बार गठबंधन में शामिल हैं, उन्हें कुल 9.4 प्रतिशत वोट मिले थे। यह साफ है कि बीजेपी और एआईएडीएमके गठबंधन के कुल वोट को मिला दें तो भी यह डीएमके गठबंधन से काफी कम हैं।

डीएमके-एआईएडीएमके के बीच रही है टक्कर

यहां इस बात का जिक्र करना जरूरी होगा कि तमिलनाडु के लोकसभा चुनावों में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच जबरदस्त टक्कर रही है। 1996 के बाद से 2019 तक हुए सभी लोकसभा चुनाव में दोनों ही राजनीतिक दलों ने राज्य की 40 प्रतिशत से ज्यादा सीटों पर कब्जा जमाया। लेकिन साल 2016 में एआईएडीएमके सुप्रीमो जयललिता के निधन के बाद पार्टी के प्रदर्शन में जबरदस्त गिरावट आई और वह 2019 में सिर्फ एक सीट जीत सकी। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके को अकेले दम पर 37 सीटों पर जीत मिली थी।

Tamilnadu DMK AIADMK vote share
तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके को मिली सीटें। PC- TCPD)

एआईएडीएमके को साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 19 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे जो 1996 के बाद सबसे कम थे। इससे पहले 1996 में उसे 7.8 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि दूसरी ओर 2019 में पहली बार डीएमके ने 30 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल किए। तब उसे 33 प्रतिशत वोट मिले थे।

एआईएडीएमके के लिए अहम है चुनाव

पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की बेहद करीबी मानी जाने वालीं शशिकला के भतीजे दिनाकरन भी इस बार बीजेपी गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। एआईएडीएमके में जयललिता के बाद शशिकला ही सबसे बड़ा चेहरा थीं। हालांकि मौजूदा वक्त में शशिकला राजनीतिक रूप से सक्रिय नहीं हैं लेकिन उनका एआईएडीएमके के साथ ना होना पार्टी के लिए अच्छा नहीं है। निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि एआईएडीएमके के राजनीतिक भविष्य के लिए यह लोकसभा चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन एआईएडीएमके का प्रदर्शन अगर और खराब होता है तो इसका सीधा फायदा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की डीएमके को होगा।

बीजेपी के गठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में उतरने से क्या डीएमके गठबंधन के सामने वाकई कोई चुनौती है। आंकड़ों के आधार पर देखें तो तमिलनाडु में बीजेपी एक मजबूत राजनीतिक दल नहीं है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात्र 3.66 प्रतिशत वोट मिले थे और 2021 के विधानसभा चुनाव में उसे सिर्फ 2.6 प्रतिशत वोट मिले थे। गठबंधन में चुनाव लड़ते हुए भी वह 20 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी सिर्फ 4 सीटें जीत सकी थी।

मोदी का फोकस तमिलनाडु पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ महीनों में तमिलनाडु की राजनीति पर विशेष फोकस किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने काशी तमिल संगमम के जरिए तमिल मतदाताओं को बीजेपी से जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने तमिलनाडु में कई मंदिरों का दौरा किया है। इसके अलावा बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पूरे राज्य की यात्रा की है।

बीजेपी को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दक्षिण में किए गए ताबड़तोड़ दौरे और अन्नामलाई की मेहनत जरूर रंग लाएगी। लेकिन वोट शेयर और सीट शेयर के लिहाज से देखें तो बीजेपी को इंडिया गठबंधन के सामने कोई बड़ी चुनौती खड़ी कर पाने के लिए और पसीना बहाना होगा।

तमिलनाडु में साल 2019 के चुनावी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि डीएमके गठबंधन को जिन 38 सीटों पर जीत मिली थी, उनमें से 22 सीटों पर उसकी जीत का अंतर 20 प्रतिशत से ज्यादा वोटों का रहा था। जबकि 12 अन्य सीटों पर यह अंतर 10 से 20 प्रतिशत रहा था।

विपक्ष के पास है मजबूत टीम

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहते हैं कि अगर बीजेपी के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं तो विपक्ष के पास भी एक मजबूत टीम है। उन्होंने कहा कि बीजेपी विपक्षी नेताओं के खिलाफ तमाम हथकंडों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भी विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के मामले में कुछ नहीं कर रहा है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि डीएमके हमेशा से सामाजिक न्याय की विचारधारा के साथ खड़ी है।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 चुनाव tlbr_img2 Shorts tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो