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गांधी और गोडसे में से किसी एक को नहीं चुन पाए जज से भाजपा नेता बने अभिजीत गंगोपाध्याय

अभिजीत गंगोपाध्याय ने 5 मार्च, 2024 को कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के पद से इस्तीफा दिया था।
Written by: स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | Updated: March 08, 2024 15:44 IST
गांधी और गोडसे में से किसी एक को नहीं चुन पाए जज से भाजपा नेता बने अभिजीत गंगोपाध्याय
अभिजीत गंगोपाध्याय इसी साल अगस्त में सेवानिवृत्त होने वाले थे। (PTI Photo/Swapan Mahapatra)
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भाजपा में शामिल हो चुके कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजीत गंगोपाध्याय एक टीवी इंटरव्यू के दौरान गांधी और उनके हत्यारे गोडसे में से किसी को एक नहीं चुन पाए। एबीपी आनंद को दिए इंटरव्यू में रैपिड फायर क्वेश्चन के दौरान जब पूर्व जज के सामने गांधी और गोडसे में से किसी एक को चुनने की बारी आई तो उन्होंने कहा, "मुझे इसके बारे में सोचना होगा।"

रैपिड फायर राउंड का क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए टीएमसी सांसद (राज्यसभा) साकेत गोखले ने पूछा है, "एक व्यक्ति जो 4 दिन पहले तक उच्च न्यायालय का न्यायाधीश था, वह गांधी और गोडसे के बीच निर्णय नहीं कर सकता। कल्पना कीजिए कि इस आदमी ने अदालत में कैसे फैसले सुनाए होंगे और उसकी मानसिकता क्या रही होगी।"

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बता दें कि गंगोपाध्याय ने राजनीति में शामिल होने के लिए 5 मार्च, 2024 को इस्तीफा दिया था। वह 7 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। कानूनी पेशा से संन्यास की घोषणा करते हुए गंगोपाध्याय ने खुद कहा था कि जब वह सिटिंग जज थे तो "बीजेपी ने उनसे संपर्क किया था।" अभिजीत गंगोपाध्याय इसी साल अगस्त में सेवानिवृत्त होने वाले थे।

गांधी और गोडसे में अंतर?

गांधी

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रैपिड फायर क्वेश्चन के दौरान पूर्व जज को गांधी और गोडसे के अलावा रवीन्द्रनाथ टैगोर और विनायक दामोदर सावरकर में से भी चुनना था। पूर्व जज ने तुरंत टैगोर को चुना। बता दें कि टैगोर ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा की उपाधि दी थी। उसी उपाधि का आज तक इस्तेमाल करते हुए गांधी को महात्मा गांधी कहा जाता है। एक अन्य बंगाली राष्ट्रवादी नेता सुभाष चंद्र बोस ने गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि दी थी।

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गांधी को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे प्रमुख नायक माना जाता है। उनके अहिंसक प्रतिरोध ने भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करने में मदद की और दुनिया भर में आधुनिक सविनय अवज्ञा आंदोलनों को प्रभावित किया। गांधी ने अहिंसक असहयोग के दर्शन के माध्यम से भारत को स्वतंत्रता तक पहुंचने में मदद की।

सत्य और अहिंसा के उनके प्रयोगों ने दुनिया के कई देशों के उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों को प्रभावित किया। इसके अलावा उनके विचारों ने Anti-Apartheid Movement को प्रभावित किया। गांधी उच्च शिक्षित और समृद्ध परिवार से थे, बावजूद इसके उन्होंने ऐशो आराम का त्याग कर खुद को राष्ट्र निर्माण में झोंक दिया।

वैश्विक पटल पर गांधी और भारत लगभग एक दूसरे के पर्याय हैं। भारत सरकार दूसरे देशों से आने वाले राष्ट्राध्यक्षों को गांधी समाधि पर जरूर ले जाती है, इसका एक उदाहरण जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान देखने को मिला था।

G20
जी20 शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करते इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो (बाएं से), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डी सिल्वा, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन और यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक (Credit: PTI Photo)

गोडसे

नाथूराम गोडसे का एकमात्र परिचय गांधी हत्यारे की है। अगर गोडसे ने गांधी की हत्या न की होती, तो शायद ही उसे कोई जानता। वह एक कम पढ़ा लिखा व्यक्ति था, जो अलग-अलग समय पर आरएसएस और हिंदू महासभा जैसे हिंदुत्ववादी संगठनों का हिस्सा रहा। गांधी हत्या मामले में उसे फांसी की सजा हुई थी।

गोडसे प्रेमी भाजपा नेता!

पिछले साल केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गोडसे को भारत मां सपूत कहा था। साल 2020 में आंध्र प्रदेश के भाजपा नेता रमेशनायडू नागोथु ने ट्वीट कर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को सलाम किया था और उसे सबसे महान देशभक्तों में से एक बताया था। विवाद होने के बाद नागोथु ने ट्वीट डिलीट कर दिया था। नवंबर 2019 में भाजपा की भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने गोडसे को देशभक्त कहा था। मीडिया से बातचीत में गोडसे की प्रशंसा की थी। बाद में ठाकुर को माफी मांगनी पड़ी थी। मध्य प्रदेश की एक अन्य भाजपा नेता उषा ठाकुर को एक वीडियो में गोडसे की प्रशंसा की थी। कर्नाटक से बीजेपी सांसद अनंत कुमार हेगड़े और नलिन कुमार ने भी प्रज्ञा ठाकुर का अनुसरण करते हुए गोडसे के समर्थन में ट्वीट किया था। हालांकि बाद में हेगड़े ने दावा किया कि उनका ट्विटर हैक हो गया था।

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