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President’s Rule: नेहरू, मोदी, अटल, राजीव, मनमोहन से ज्यादा अकेले इंदिरा ने किया आर्टिकल 356 का इस्तेमाल

आर्टिकल 356 केंद्र सरकार को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त करने और विधानसभाओं को भंग करने की शक्ति देता है।
Written by: स्पेशल डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: March 11, 2024 15:37 IST
president’s rule  नेहरू  मोदी  अटल  राजीव  मनमोहन से ज्यादा अकेले इंदिरा ने किया आर्टिकल 356 का इस्तेमाल
बाएं से- पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PC- Indian Express)
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल को सिर्फ देशव्यापी आपातकाल के लिए याद किया जाना काफी नहीं है। उनके नाम राज्यों की चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त कर सबसे अधिक बार राष्ट्रपति शासन लगाने का भी रिकॉर्ड है।

जब किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में आर्टिकल 356 लागू किया जाता है, इसका मतलब है कि वहां की शासन व्यवस्था राष्ट्रपति के हाथों में आ जाती है। बोलचाल की भाषा में इसे 'राष्ट्रपति शासन' भी कहते हैं। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दौरान सत्ता की डोर केंद्र सरकार के हाथों में होती है।

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अनुच्छेद 356 का बार-बार दुरुपयोग इंदिरा गांधी के समय शुरू हुआ। उन्होंने 22 महीने के राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान चार बार सहित कुल 48 बार अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया।

1977 में जब मोरारजी देसाई ने गठबंधन सरकार बनाई, तो उन्होंने नौ कांग्रेस-शासित राज्यों सहित 13 बार राष्ट्रपति शासन लगाया। जनता सरकार ने 1979 में चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में चार बार राष्ट्रपति शासन लागू किया।

जब 1980 में इंदिरा गांधी पीएम के रूप में लौटीं, तो उनकी सरकार ने जवाबी कार्रवाई की और विपक्षी पार्टी की सरकारों वाले नौ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया।

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किन राज्यों में सबसे ज्यादा बार लगाया गया राष्ट्रपति शासन?

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना को छोड़कर, भारत के सभी राज्यों में राष्ट्रपति शासन 123 बार लगाया जा चुका है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेशों में 19 बार का लगाया जाना शामिल नहीं है। बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, मणिपुर और केरल में सबसे अधिक बार सरकारें बर्खास्त की गई हैं।

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अवधि के मामले में पंजाब और जम्मू-कश्मीर ने इसका ज्यादा खामियाजा उठाया है। आम तौर पर राष्ट्रपति शासन दो महीने के लिए लागू रहता है जब तक कि संसद इसे छह महीने तक के लिए बढ़ा नहीं देती। एक वर्ष से अधिक के विस्तार की अनुमति केवल राष्ट्रीय सुरक्षा आपातकाल में या यदि चुनाव आयोग प्रमाणित करता है कि विधानसभा चुनाव कराना मुश्किल है, तो दी जाती है। फिर भी राष्ट्रपति शासन की सीमा तीन वर्ष है, लेकिन एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से पंजाब के लिए एक अपवाद बनाया गया था और वहां करीब एक दशक तक राष्ट्रपति शासन रहा था।

कम हुआ है चलन?

आर्टिकल 356 केंद्र सरकार को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राज्य सरकारों को बर्खास्त करने और विधानसभाओं को भंग करने की शक्ति देता है। हालांकि, संविधान निर्माताओं का इरादा था कि इस अनुच्छेद का प्रयोग बहुत कम किया जाएगा।

लेकिन विभिन्न केंद्र सरकारों ने विपक्ष के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को गिराने के लिए इसका भरपूर दुरुपयोग किया। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में 'राष्ट्रपति शासन' लगाने का चलन कम हुआ है और इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट का 30 साल पुराना एक महत्वपूर्ण फैसला है।

11 मार्च, 1994 को आठ राज्यों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों ने सत्ता के इस दुरुपयोग के खिलाफ रुख अपनाया था। अदालत ने इस दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों की सीमाएं तय की थी। उस मामले को 'बोम्मई बनाम भारत सरकार' नाम से जाना जाता है।

मामले में फैसला आने से पहले 81 बार राष्ट्रपति शासन लगाया था। मामले की सुनवाई के दौरान 16 बार अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया गया। लेकिन फैसला आने के बाद सिर्फ 26 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है।

मोदी सराकर ने सिर्फ 8 बार लगाया राष्ट्रपति शासन लेकिन...

2014 के बाद से आठ बार ही राष्ट्रपति शासन लगाया गया है लेकिन भारतीय जनता पार्टी अपने 10 साल के कार्यकाल (2014-2024) में बिना जनादेश 9 राज्यों में सरकार बना चुकी है। विस्तार से पढ़ने के लिए फोटो पर क्लिक करें:

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भाजपा के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी का कटआउट (PTI Photo/R Senthilkumar)
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