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मार्च-मई 2019 में बीजेपी ने भुनाए थे 3050 करोड़, 80 करोड़ मुनाफा कमाने वाली कंपनी ने खरीदा 410 करोड़ का बॉन्‍ड, डायरेक्‍टर का र‍िलायंस से भी नाता

राजनीतिक दलों को इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के जर‍िए आधा से ज्‍यादा चंदा देने वालों में मुट्ठी भर कंपन‍ियां ही शाम‍िल हैं। इनमें से कुछ ऐसी भी हैं ज‍िनका बहुत नाम ही नहीं है।
Written by: स्पेशल डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: March 18, 2024 13:43 IST
मार्च मई 2019 में बीजेपी ने भुनाए थे 3050 करोड़  80 करोड़ मुनाफा कमाने वाली कंपनी ने खरीदा 410 करोड़ का बॉन्‍ड  डायरेक्‍टर का र‍िलायंस से भी नाता
इलेक्टोरल बॉन्ड का हिसाब-किताब
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इलेक्टोरल बॉन्ड के बारे में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। नई जानकारी के व‍िश्‍लेषण से सामने आया है क‍ि 2019 लोकसभा चुनाव से ऐन पहले के तीन महीनों (मार्च से मई) में बीजेपी ने 3050.11 करोड़ रुपए के इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड भुनाए। यह रकम मार्च 2018 से 22 मई, 2019 के बीच बीजेपी द्वारा भुनाए गए कुल बॉन्‍ड (3,941.57 करोड़ रुपये) का 77.4 फीसदी है। द इंडियन एक्सप्रेस में छपी श्यामलाल यादव की रिपोर्ट में यह व‍िश्‍लेषण क‍िया गया है।

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बता दें क‍ि बीजेपी को इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के जर‍िए सबसे ज्‍यादा चुनावी चंदा द‍िया गया है। 2019 में लोकसभा चुनाव की घोषणा 10 मार्च को की गई थी और वोटों की गिनती 23 मई को की गई थी। तब लोकसभा चुनाव के साथ-साथ तीन राज्यों (आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा) में विधानसभा चुनाव भी हुए थे।

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इस बार 16 अप्रैल को चुनाव घोष‍ित क‍िए गए हैं और 4 जून को मतगणना होगी। इन चुनावों से ऐन पहले और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड को अवैध घोष‍ित करने से पहले बीजेपी ने 200 करोड़ रुपए से ज्‍यादा के बॉन्‍ड भुनाए हैं।

राजनीतिक दलों को इलेक्‍टोरल बॉन्‍ड के जर‍िए आधा से ज्‍यादा चंदा देने वालों में मुट्ठी भर कंपन‍ियां ही शाम‍िल हैं। इनमें से कुछ ऐसी भी हैं ज‍िनका बहुत नाम ही नहीं है। ऐसी ही एक कंपनी है क्विक सप्लाई प्राइवेट लिमिटेड। यह सबसे ज्यादा चंदा देने वालों की लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। सन् 2000 में बनी इस कंपनी ने अप्रैल 2019 से फरवरी 2024 के बीच 410 करोड़ रुपये का बॉन्ड खरीदा है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है क‍ि वेयरहाउस और स्टोरेज का काम करने वाली क्विक सप्लाई प्राइवेट लिमिटेड के कई डायरेक्टर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के वर्तमान या पूर्व टॉप एग्जीक्यूटिव हैं। क्विक सप्लाई चेन के एक निदेशक, रिलायंस पॉलिस्टर प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस ऑयल एंड पेट्रोलियम प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस फर्स्ट प्राइवेट लिमिटेड और रिलायंस फायर ब्रिगेड सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कई कंपनियों में भी निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।

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रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (भारत सरकार द्वारा नियंत्रित) के अनुसार, क्विक सप्लाई का पंजीकृत ईमेल एड्रेस भी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के डोमेन (ril.com) से जुड़ा हुआ है।

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द इंडियन एक्सप्रेस ने इस बारे में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के प्रवक्ता से बात करने की कोशिश की। प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि क्विक सप्लाई, रिलायंस की सहायक कंपनी नहीं है। उन्होंने क्विक सप्लाई के स्वामित्व और RIL के प्रमोटर मुकेश अंबानी के साथ क्विक सप्लाई के शेयरधारकों के संबंध पर किए सवालों का जवाब नहीं दिया।

कंपनी ने जितना मुनाफा नहीं कमाया, उससे ज्यादा दे दिया चंदा

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) से प्राप्त क्विक सप्लाई के वित्तीय विवरणों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2021 में इसका नेट बिजनेस 9,813 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष 2022 में 11,165 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023 में 15,734 करोड़ रुपये था। इन तीन वर्षों में कंपनी का नेट प्रॉफिट क्रमशः 24.24 करोड़ रुपये, 22.09 करोड़ रुपये और 33.65 करोड़ रुपये था। दूसरे शब्दों में कहें तो पिछले वर्षों में क्विक सप्लाई का कुल लाभ 79.98 करोड़ रुपये था जो चुनावी बांडों की खरीद पर खर्च किए गए 410 करोड़ रुपये से काफी कम है।

चुनावी मौसम में भरा भाजपा का खजाना

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम से सबसे ज्यादा धन भाजपा को मिला है। ECI द्वारा प्रकाशित डेटा के मुताबिक, 1 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी, 2024 के बीच खरीदे गए कुल बॉन्ड से राजनीतिक दलों को 12,156 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। इसमें से 6060.51 करोड़ का चंदा अकेले भाजपा को मिला है। यानी कुल चंदा का लगभग 50 प्रतिशत।

कुल मिलाकर, भाजपा ने योजना शुरू होने के बाद से कम से कम 8,451.41 करोड़ रुपये भुनाए हैं। जिन शाखाओं से ये बांड जारी किए गए थे, उनके लोकेशन से पता चलता है कि भाजपा को देश भर से पैसा मिला, जिसमें प्रमुख योगदान मुंबई (1,493.21 करोड़ रुपये), कोलकाता (1,068.91 करोड़ रुपये) और नई दिल्ली (666.08 करोड़ रुपये) से था।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि मार्च 2018 से मई 2019 के बीच भाजपा को कुल चंदे का 27 प्रतिशत कोलकाता से मिला, ध्यान रहे कि पश्चिम बंगाल भाजपा में लगाता पैर जमाने की कोशिश कर रही है, पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को राज्य की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल मिली थी।

लॉटरी कंपनी ने अपना 40 प्रतिशत चंदा डीएमके को दिया

चुनावी बॉन्ड के सबसे बड़े खरीदार फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने 2019 और 2024 के बीच 1,300 करोड़ रुपये से अधिक के बॉन्ड खरीदे, इसमें से 509 करोड़ रुपये तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके को दिए। यह फ्यूचर गेमिंग की कुल खरीद का लगभग 40% है।

निर्वाचन आयोग द्वारा रविवार को जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके उन पार्टियों में से है, जिन्होंने अपने इलेक्शन बांड दाताओं के नामों का खुलासा किया है।

डेटा के अनुसार, पार्टी को 19 अप्रैल, 2019 से 14 नवंबर, 2023 के बीच चुनावी बॉन्ड के जरिए कुल 656.5 करोड़ रुपये मिले, इसमें अप्रैल 2019 और अप्रैल 2023 के बीच सैंटियागो मार्टिन द्वारा संचालित फ्यूचर गेमिंग से 509 करोड़ रुपये शामिल हैं।

डीएमके को फ्यूचर गेमिंग से चुनावी बांड की पहली किस्त (60 करोड़ रुपये मूल्य की) 2020-21 में प्राप्त हुई। 2021-22 में राशि बढ़कर 249 करोड़ रुपये हो गई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अप्रैल 2021 में हुए, जब DMK ने तत्कालीन AIADMK सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया। 2022-23 में DMK को चुनावी बांड के माध्यम से फ्यूचर गेमिंग से 160 करोड़ रुपये और प्राप्त हुए। शेष राशि 1 अप्रैल, 2023 को दान की गई।

देखें डीएमके के शीर्ष दानदाताओं की सूची:

जेडीएस को आधे से ज्यादा चंदा मेघा इंजीनियरिंग से मिला

जनता दल (सेक्युलर) भी उन पार्टियों में शामिल है, जिन्होंने अपने दानदाताओं के नाम उजागर किया है। जेडीएस को चुनावी बॉन्ड से कुल 89.75 करोड़ रुपये मिले हैं, इसमें से 50 करोड़ रुपये यानी लगभग 56 प्रतिशत मेघा इंजीनियरिंग (MEIL) से मिला है।

ध्यान रहे मेधा इंजीनियरिंग चुनावी बॉन्ड से चंदा देने के मामले में दूसरे नंबर पर है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2019 से नवंबर 2023 के बीच कंपनी और उसकी सहायक कंपनियों ने चुनावी बॉन्ड पर कुल 1,200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं।

आप को बजाज से मिला तीन करोड़ का चंदा

अप्रैल 2018 और मई 2019 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) को पांच कंपनियों और दो व्यक्तियों से इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 5.75 करोड़ रुपये मिले। इसमें से बजाज ग्रुप ने 3 करोड़ रुपये का योगदान दिया। बजाज का चंदा आप को 10 अप्रैल, 2019 को मिला था। इस तरह 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी को बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा चंदा बजाज से ही मिला था।

आप उन पार्टियों में शामिल है, जिन्होंने रविवार को चुनाव आयोग (EC) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों में दानदाताओं के नामों का खुलासा किया। आंकड़ों के अनुसार, आप को अप्रैल 2018 और जुलाई 2023 के बीच इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से 69.06 करोड़ रुपये मिले। हालांकि, पार्टी ने केवल मई 2019 तक की अवधि के लिए दानदाताओं के नामों का खुलासा किया है।

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