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पेटीएम पर सख्ती से ग्राहकों के माथे पर शिकन, संशय बरकरार

नियमों की अनदेखी पर रिजर्व बैंक की सख्ती से 29 फरवरी के बाद ग्राहकों को पेटीएम वालेट, फास्टैग या मोबिलिटी कार्ड के इस्तेमाल का मौका नहीं मिल सकेगा।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 07, 2024 11:56 IST
पेटीएम पर सख्ती से ग्राहकों के माथे पर शिकन  संशय बरकरार
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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सर्वेश कुमार

पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक की सख्ती के बाद से ग्राहकों के माथे पर शिकन और संशय बरकरार है। लोग अब पेटीएम वालेट, फास्टैग और मोबिलिटी कार्ड के इस्तेमाल के लिए दूसरे यूपीआई विकल्पों को तलाशने लगे हैं। एक मार्च से पहले ऐसे लाखों ग्राहक अपना रुख बदलने की तैयारी में है। हालांकि कंपनी ने मौजूदा हालात में सुधार का भरोसा दिलाया है।

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नियमों की अनदेखी पर रिजर्व बैंक की सख्ती से 29 फरवरी के बाद ग्राहकों को पेटीएम वालेट, फास्टैग या मोबिलिटी कार्ड के इस्तेमाल का मौका नहीं मिल सकेगा। केंद्रीय बैंक ने केवाईसी में खामी और धनशोधन मामले की आशंका के बाद पेटीएम पर प्रतिबंध लगाया है। शेयर बाजार में सूचीबद्ध पेटीएम पेमेंट्स बैंक को फरवरी के बाद बैंकिंग सेवाएं देने से रोक दिया गया है।

पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड, पेटीएम की एक सहयोगी कंपनी है और इसके 10 करोड़ से अधिक केवाइसी ग्राहक हैं। इसके 30 करोड़ वालेट उपयोगकर्ता, 3 करोड़ बैंक खाता धारक के अलावा फास्टैग में 17 फीसद बाजार की हिस्सेदारी है। मार्च 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर नए ग्राहक बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। बैंकिंग नियामक ने पिछले बुधवार को कहा था कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक एक मार्च से जमा या ऋण उत्पादों का लेनदेन नहीं कर पाएगा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और वित्तीय आसूचना इकाई (एफआईयू) ने रिजर्व बैंक से पेटीएम पेमेंट्स बैंक लि. को ग्राहक खातों में जमा या ‘टाप-अप’ स्वीकार करने से रोकने के लिए की गई हालिया कार्रवाई पर अपनी रिपोर्ट साझा करने को कहा है।धन शोधन मामले में नियमों के उल्लंघन की पहले ही एजेंसियां जांच कर रही है। उधर, पेटीएम पेमेंट्स बैंक ने कहा है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक लि. (पीपीबीएल) के खिलाफ धन शोधन या विदेशी विनिमय नियमों के उल्लंघन को लेकर जांच नहीं की जा रही है।

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रिपोर्ट के अध्ययन के बाद आगे की कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और वित्तीय आसूचना इकाई (एफआइयू) ने रिजर्व बैंक (आरबीआइ) से पेटीएम पेमेंट्स बैंक लि को ग्राहक खातों में जमा या ‘टाप-अप’ स्वीकार करने से रोकने के लिए हाल में की गई कार्रवाई पर अपनी रिपोर्ट साझा करने को कहा है। मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत नियमों के उल्लंघन का जांच करने वाली एजंसियां प्रवर्तन निदेशालय और वित्तीय आसूचना इकाई पहले से ही धनशोधन रोधक कानून के प्रावधानों के तहत भुगतान मंचों से संबंधित मामलों की जांच कर रही हैं।

उसकी मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस, संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विजय शेखर शर्मा तथा पेटीएम पेमेंट्स बैंक लि. (पीपीबीएल) के खिलाफ मनी लांड्रिंग या विदेशी विनिमय नियमों के उल्लंघन को लेकर जांच नहीं की जा रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने आरबीआई से अपनी नवीनतम रिपोर्ट साझा करने को कहा है ताकि वह विश्लेषण कर सके कि क्या उसे पीपीबीएल के खिलाफ जांच शुरू करने की जरूरत है।

एजंसी चीन की कंपनियों के नियंत्रण वाले मोबाइल-फोन एप्लिकेशन के खिलाफ मनी लान्ड्रिंग जांच के हिस्से के रूप में पेटीएम और अन्य आनलाइन भुगतान वालेट की जांच कर रही है। ये वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के मंचों पर बनाई गई व्यापारी आइडी का उपयोग करके मनी लांड्रिंग गतिविधियों में कथित रूप से शामिल थीं। सूत्रों ने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। एजंसी नई जांच शुरू कर सकती है या पेटीएम से जुड़ी चल रही जांच में नए आरोप शामिल कर सकती है।

एफआइयू ने भी यह विश्लेषण करने के लिए आरबीआई से रिपोर्ट मांगी है कि क्या पेटीएम या पीपीबीएल ने मनी लांड्रिंग रोधक कानून की धारा 13 के तहत ‘रिपोर्टिंग इकाई’ के रूप में आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया है। सूत्रों ने कहा कि धनशोधन रोधक कानून की इस धारा के तहत एक वित्तीय संस्थान, बैंक या मध्यस्थ को अपने ग्राहकों और लाभकारी मालिकों की पहचान को प्रमाणित करने वाले सभी लेनदेन और दस्तावेजों के रिकार्ड को बनाए रखने के साथ-साथ संबंधित विवरण एफआइयू को प्रस्तुत करना होता है। एफआइयू वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। इसका काम देश में आर्थिक ‘चैनलों’ में धनशोधनऔर काले धन का पता लगाना है।

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