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दस साल में जनता के असमंजस का फायदा उठाने में सबसे आगे रही है भाजपा

2014 से अब तक नौ राज्यों में भारतीय जनता पार्टी बिना चुनाव जीते सरकार बनाने में सफल रही है।
Written by: स्पेशल डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: March 01, 2024 17:26 IST
दस साल में जनता के असमंजस का फायदा उठाने में सबसे आगे रही है भाजपा
भाजपा के कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी का कटआउट (PTI Photo/R Senthilkumar)
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राज्यसभा चुनाव के लिए मंगलवार (27 फरवरी) हो रहे मतदान के वक्त हिमचाल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर संकट के बादल छा गए थे। ऊपरी सदन के लिए सांसद चुने जाने के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, इसके कारण कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए।

लेकिन बात सिर्फ एक राज्यसभा सीट की नहीं थी। कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग से सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार खतरे आ गई थी। ऐसा लगने लगा था कि बागी विधायकों का गुट भाजपा में जा मिलेगा और कांग्रेस अल्पमत में आ जाएगी। हालांकि ऐसा हुआ नहीं।

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जाहिर है पिछले 10 वर्षों से केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा कई गैर-भाजपा शासित राज्यों में बिना चुनाव जीते सरकार बना चुकी है। आइए ऐसी घटनाओं पर एक नजर डालते हैं:

अरुणाचल प्रदेश (2014): विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 11 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 42, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल को 5 और निर्दलीयों के हिस्से दो सीटें गईं। लेकिन दो वर्षों में यह संख्या बदल गई। भाजपा के सीटों की संख्या 48 और कांग्रेस के सीटों की संख्या एक हो गई। पीपीए के पास नौ सीटें हो गईं और निर्दलीय दो ही रहे। थोक दलबदल, राष्ट्रपति शासन, एक पूर्व मुख्यमंत्री की मृत्यु, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और तमाम अन्य घटनाओं के बाद अंततः भाजपा ने सत्ता हासिल कर ली!

झारखंड (2014): 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 35 सीटें और उसकी सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन ने 5 सीटें जीतीं। जाहिर है उनके पास बहुतम नहीं था। ऐसे में उन्होंने कुछ निर्दलीय सदस्यों को अपने पक्ष में कर लिया। साथ ही झारखंड विकास मोर्चा के 8 में से 6 विधायकों को अपने पाले में किया।

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बिहार (2015): 2014 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार एनडीए से अलग हो गए थे। उन्होंने 2015 का चुनाव राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ा था। उस चुनाव में राजद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। दो साल तक महागठबंधन में सरकार चलाई। लेकिन 2017 में भाजपा ने नीतीश कुमार को अपनी तरफ कर लिया सरकार में आ गयी। बाद में नीतीश फिर राजद से जुड़े। लेकिन 2024 के पहले महीने से वह एक बार फिर भाजपा के साथ मिल गए।

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गोवा (2017): कुल 40 सीटों में से भाजपा सिर्फ 13 सीटें जीती थी। नतीजों की घोषणा के बाद उन्होंने उन छोटे स्थानीय दलों के साथ गठबंधन किया, जिन्होंने खुले तौर पर उनके खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस तरह वह सबसे बड़ी पार्टी बन गए और सरकार बना ली। कांग्रेस को 17 सीटों के साथ विपक्ष में बैठना पड़ा।

मणिपुर (2017): भाजपा ने 60 में से 21 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं। लेकिन भाजपा ने दो स्थानीय पार्टियों नेशनल पीपुल्स पार्टी और नागा पीपुल्स फ्रंट और अपनी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के एक अकेले विधायक को अपने पाले में कर सरकार बनाने का दावा किया। राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने पहले भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। बता दें कि हेपतुल्ला पहले भाजपा सांसद थीं।

कर्नाटक (2018-19): कर्नाटक में सत्ता हथियाने के लिए दो भाजपा को दो बार कोशिश करनी पड़ी। पहली कोशिश 2018 में की, जो असफल रही। 224 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 104 विधायक जीते थे। यानी पार्टी बहुमत से चूक गई थी। लेकिन गुजरात के पूर्व भाजपा विधायक वजुभाई वाला ने राज्यपाल के रूप में कांग्रेस-जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन को नजरअंदाज करते हुए, भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। हंगामा हुआ तो सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और अगले दिन फ्लोर टेस्ट की घोषणा हुई। येदियुरप्पा ने सदन में हार का सामना करने के बजाय इस्तीफा दे दिया और राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनी।

हालांकि एक साल बाद ही खेल पलट गया। अचानक कांग्रेस के 13, जेडीएस के 3 और कर्नाटक प्रज्ञवंता जनता पार्टी के एक विधायक ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। सरकार अल्पमत में आ गई और इस तरह भाजपा बहुमत करने में सफल रही। राज्य में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिर गई और येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सत्ता में वापस आ गई। वर्तमान में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है।

हरियाणा (2019): विधानसभा चुनावों में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपना बहुमत खो दिया था। भाजपा को 90 सदस्यीय सदन में 40 सीटें ही प्राप्त थीं। ऐसे में भाजपा ने जननायक जनता पार्टी को चुनाव के बाद गठबंधन का ऑफर दिया, जबकि जेजेपी ने अपने चुनाव अभियान में भाजपा पर गंभीर हमला किया था। जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री बनाया गया और बीजेपी सत्ता में वापस आ गई।

मध्य प्रदेश में कमलनाथ की गिरी सरकार (2020): मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस की जीत हुई थी। कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन दो साल के भीतर ही कांग्रेस के विधायकों के एक वर्ग को लुभाकर, भाजपा ने अपनी तरफ कर लिया। कांग्रेस की सरकार अल्पमत में चली और मार्च 2020 में कमलनाथ को पद छोड़ना पड़ गया। इसके बाद राज्य में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी।

महाराष्ट्र में उद्धव सरकार गिराकर बनाई सरकार: जून 2022 में शिवसेना के 16 विधायकों के बगावत करने के बाद महा विकास अघाड़ी अल्पमत में आ गई थी। इसके बाद फ्लोर टेस्ट से पहले ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बागी विधायकों ने खुद को असली शिवसेना बताते हुए भाजपा से गठबंधन कर लिया और राज्य में एनडीए की सरकार बन गई।

महाराष्ट्र में 2019 में भी इस तरह की कोशिश हुई थी। तब विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना ने बहुमत हासिल किया लेकिन मुख्यमंत्री पद किसे मिलेगा इस पर दोनों में मतभेद हो गया। हफ्तों की उथल-पुथल और विधायकों को होटलों में छुपाने के बाद 22 नवंबर की रात को शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बीच अजीब गठबंधन हुआ। लेकिन अगली सुबह भाजपा ने राकांपा के अजीत पवार को विपक्षी गठबंधन छोड़ने और कथित तौर पर 54 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल होने के लिए मना लिया। एक गोपनीय समारोह में राज्यपाल बीएस कोश्यारी (उत्तराखंड के पूर्व भाजपा मुख्यमंत्री) ने दो सदस्यीय सरकार को शपथ दिला दी। लेकिन कुछ ही घंटों में ये सरकार गिर गई क्योंकि अजित पवार के साथ कोई नहीं था। वह राकांपा में वापस चले गए और शिवसेना के उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ली। हालांकि महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी की सरकार गिरने के बाद अजित पवार फिर एनडीए में चले गए।

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