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प्राण प्रतिष्ठा से पहले मंदिर निर्माण में लगे 2000 कारीगरों को दी गई छुट्टी, महीनों से 12-12 घंटे की दो शिफ्टों में कर रहे थे काम

22 जनवरी को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठ समारोह संपन्न होने के बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू किया जाएगा।
Written by: स्पेशल डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: January 20, 2024 12:52 IST
प्राण प्रतिष्ठा से पहले मंदिर निर्माण में लगे 2000 कारीगरों को दी गई छुट्टी  महीनों से 12 12 घंटे की दो शिफ्टों में कर रहे थे काम
राम मंदिर में लगने वाले खम्भे पर नक्काशी करते कारीगर (PTI Photo/Arun Sharma)
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22 जनवरी के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए लगभग 8,000 VIP मेहमानों के अयोध्या पहुंचने से पहले, मंदिर को "भव्य उद्घाटन" के लिए तैयार करने वाले 2,000 श्रमिकों को छुट्टी दे दी गई है। जो कारीगर महीनों से 12-12 घंटे की दो शिफ्टों में कड़ी मेहनत कर मंदिर को तैयार करने में जुटे थे, उन्हें शुक्रवार की शाम ब्रेक लेने के लिए कह दिया गया।

मंदिर निर्माण कार्य शुक्रवार शाम को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। अब निर्माण कार्य समारोह के बाद शुरू होगा। द इंडियन एक्सप्रेस की मौलश्री सेठ ने निर्माण के जिम्मेदारी अधिकारी और कारीगरों से बातचीत की है।

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निर्माण के लिए जिम्मेदार एक अधिकारी ने बताया कि "वर्तमान में लगभग 2000 कर्मचारी यहां लगे हुए हैं। 22 जनवरी तक काम रोक दिया गया है। प्रथम तल पर स्लैब बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि हमने श्रमिकों से यहीं रुकने का अनुरोध किया, लेकिन कई लोग जल्दी से घर जाने के इच्छुक हैं। हमने उनसे जल्द ही काम फिर से शुरू करने के लिए कहा है।"

"इस काम ने हमें इतिहास का हिस्सा बना दिया"

छुट्टी में घर जाने को लेकर कारीगर उत्साहित हैं। कुछ लोग निर्माण के दौरान के अपने अनुभव की कहानियां सुना रहे हैं। कुछ कारीगर अपने पूरे गांव को मंदिर के अंदर की तस्वीरें दिखाने को बेताब हैं। ये उन कारीगरों के लिए उनकी सबसे खास उपलब्धि है।

ऐसे ही एक कार्यकर्ता हैं मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के रहने वाले 45 वर्षीय प्रेम चंद शर्मा, जो पिछले 19 महीनों से अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं। अपने पास स्मार्टफोन न होने का दुख जताते हुए वह कहते हैं, "हमको 27 को बुलाया है। लेकिन 1 तारीख को सोचा है वापसी का। काम तो पहले भी किया है और मंदिर में भी किया है, लेकिन इतना बड़ा काम नहीं किया। इस काम ने हमें इतिहास का एक हिस्सा बना दिया है।"

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शर्मा बताते हैं कि सभी कारीगर की लगभग एक जैसी दिनचर्या होती है। सुबह की शिफ्ट का काम नौ बजे शुरू होता है। कारीगर करीब पांच बजे उठ जाते हैं। वे अस्थायी क्वार्टरों में अपना नाश्ता खुद बनाते हैं या प्रिंस पुरी वाले के पास जाते हैं। पूरी वाले का ठेला परिसर के पास ही लगता है। सुबह की शिफ्ट वालों का लंच एक से दो बजे के बीच होता है। जिस दिन काम का जितना दबाव हो उसी को देखते हुए रात कारीगर 9 बजे से 12 बजे के बीच अपने क्वार्टर में लौटते हैं।

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शर्मा कहते हैं, "नक्काशी करने वाले ज्यादातर दिन के दौरान काम करते हैं। पत्थर पर नक्काशी करना मूर्तिकार के काम के समान है। हमने मंदिर के खंभों और दीवारों पर देवी-देवताओं और भगवान इंद्र की नृत्य करती अप्सराओं की मूर्तियां उकेरी हैं। डिज़ाइन जितना जटिलता होता है काम उतना लंबा होता है। लगभग एक वर्ग फुट बलुआ पत्थर को तराशने में एक से दो दिन लगते हैं।"

"मेरे माता पिता आ रहे हैं"

राजस्थान के धौलपुर से ताल्लुक रखने वाले 30 साल के युवा लव कुश बताते हैं कि वह पिछले आठ महीनों से मंदिर में काम कर रहे हैं, "मैं उन कुछ लोगों में से हूं जिन्हें अपने परिवार के साथ 22 जनवरी के समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। मेरा भाई समारोह के लिए हमारे माता-पिता को राजस्थान से ला रहा है।

ठेले के पास बोरों से ढकी अस्थायी बेंच पर बैठे कुश कहते हैं कि जब मकराना संगमरमर (एक प्रकार का सफेद संगमरमर) पर काम करने की बात आती है तो हमारी टीम एक्सपर्ट है।

गर्भगृह के अंदर रामलला के सिंहासन पर काम करते हुए अपनी तस्वीरें दिखाने के लिए अपना फोन निकालते हुए, वह कहते हैं, "मंदिर में लगभग 50,000 वर्ग फुट पर मकराना संगमरमर का उपयोग किया गया है। इसमें ज्यादातर धौलपुर के लोग हैं जो संगमरमर का काम कर रहे हैं।" वह कहते हैं कि तस्वीरें उनके परिवार को गर्व की अनुभूति कराती हैं। 

बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर सकता है राम मंदिर

पूरे मंदिर परिसर को डिजाइन करने वाले अहमदाबाद के आर्किटेक्ट चंद्रकांत सोमपुरा और उनके बेटे आशीष का दावा है कि राम मंदिर हिमालय क्षेत्र में आने वाली गंभीर तीव्रता की बाढ़ और भूकंप को भी झेल सकता है। चंद्रकांत से द इंडियन एक्सप्रेस की लीना मिश्रा ने बातचीत की है।

चंद्रकांत सोमपुरा ने देश और विदेश में 200 से अधिक मंदिरों को डिजाइन किया है। आशीर पेशेवर डिग्री के साथ मंदिर डिजाइन करने वाले परिवार के पहले सदस्य हैं। आशीष ने बताया कि यह दुनिया का पहला मंदिर होगा, जिसके निर्माण से पहले आपदा प्रतिरोध के लिए 3डी संरचनात्मक विश्लेषण किया गया है। मंदिर में 8 रिएक्टर स्केल के झटके सहने की क्षमता है। रूड़की में केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान ने यह सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक विश्लेषण किया कि "चाहे कोई भी आपदा आए, इस मंदिर को कुछ नहीं होगा"। मंदिर उच्चतम बाढ़ स्तर (अब तक दर्ज) से 20 फीट अधिक तक को झेल सकता है।

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