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न फोटो, न मीडिया; संसद स्टाफ तक के बाहर निकलने पर रही रोक- गुप्त रखा गया अमृतपाल, शेख अब्दुल का शपथ ग्रहण

अमृतपाल जहां असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है वहीं, राशिद दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
Written by: shrutisrivastva
नई दिल्ली | Updated: July 06, 2024 16:01 IST
न फोटो  न मीडिया  संसद स्टाफ तक के बाहर निकलने पर रही रोक  गुप्त रखा गया अमृतपाल  शेख अब्दुल का शपथ ग्रहण
अमृतपाल सिंह डिब्रूगढ़ की जेल में बंद है। (ANI Image)
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जेल में बंद कट्टरपंथी खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह और कश्मीरी नेता शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद ने कल लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सांसद पद की शपथ ली। दोनों को अदालत से शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पैरोल मिली है। अमृतपाल और राशिद इंजीनियर दोनों ही पुलिस हिरासत में संसद पहुंचे थे।

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अमृतपाल सिंह और अब्दुल रशीद ने शुक्रवार को संसद परिसर में भारी सुरक्षा के बीच सांसद के रूप में शपथ ली। शुक्रवार को लोकसभा में हुए अमृतपाल सिंह और अब्दुल राशिद के शपथ ग्रहण समारोह को मीडिया की नजरों से दूर रखा गया। यहां तक ​​कि दोनों के शपथ ग्रहण की तस्वीरें भी शेयर नहीं की गईं।

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जानकारी के मुताबिक, जब दोनों को सदन में लाया गया तो संसद भवन के कर्मचारियों और अधिकारियों को उनके कार्यालयों से बाहर आने की अनुमति नहीं थी। राशिद और सिंह दोनों को भारी सुरक्षा के बीच अलग-अलग लाया गया और इलाके की घेराबंदी कर दी गई। राशिद तिहाड़ जेल से दो घंटे की हिरासत पैरोल पर बाहर था, जबकि डिब्रूगढ़ जेल में बंद सिंह को असम से दिल्ली आने के लिए चार दिन की पैरोल दी गई थी।

इन शर्तों पर दी गयी पैरोल

अदालत ने जिन शर्तों पर दोनों को पैरोल दी उसके मुताबिक वे न तो किसी मुद्दे पर मीडिया से बात कर सकते हैं और न ही कोई बयान दे सकते हैं। दोनों के परिवार के सदस्य भी मीडिया में किसी भी प्रकार का बयान नहीं दे सकते। जेल में बंद होने के कारण दोनों 24-25 जून को अन्य नवनिर्वाचित सांसदों के साथ शपथ नहीं ले सके थे। सूत्रों के मुताबिक दोनों ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में शपथ ली।

अमृतपाल और राशिद ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दर्ज की जीत

अमृतपाल और राशिद ने लोकसभा चुनाव 2024 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी। अमृतपाल सिंह और इंजीनियर राशिद ने हाल ही में जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा था। अमृतपाल सिंह पंजाब के खडूर साहिब से और राशिद जम्मू-कश्मीर के बारामूला से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर चुनाव में खड़ा हुआ था। अमृतपाल ने करीब 2 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

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इंजीनियर राशिद जम्मू कश्मीर के टेरर फंडिंग केस में गैरकानूनी गतिविधि के तहत दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है जबकि अमृतपाल पंजाब में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप में NSA के तहत असम की डिब्रूगढ़ जिले की जेल में बंद है।

अमृतपाल सिंह वारिस पंजाब दे का प्रमुख है

31 वर्षीय खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह वारिस पंजाब दे का प्रमुख है। दो साल पहले दुबई से पंजाब लौटने के बाद अमृतपाल सिंह को 37 दिनों तक पीछा करने के बाद 23 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया गया था। उसे खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले के गांव रोडे से गिरफ्तार किया गया था।

पंजाब लौटने के बाद उसने नशामुक्ति अभियान शुरू किया और जल्द ही युवाओं में लोकप्रिय हो गया था। उसने गुरु साहिब की बेअदबी, पानी के मुद्दों और बंदी सिंहों (सिख कैदियों) जैसे मुद्दों को भी उठाया जिससे लोग उसकी ओर आकर्षित हुए। पिछले साल 23 फरवरी को अमृतपाल ने सहयोगी की गिरफ्तारी के खिलाफ हजारों समर्थकों के साथ अजनाला पुलिस स्टेशन की घेराबंदी कर छह पुलिसकर्मियों को तलवारों और लाठियों से घायल कर दिया था।

अमृतपाल को कहते हैं भिंडरावाले 2.0

अपनी गिरफ्तारी से नौ महीने पहले अगस्त 2022 में दुबई से लौटने के बाद अमृतपाल ने अमृतधारी सिख बनने के लिए आनंदपुर साहिब में औपचारिक रूप से बपतिस्मा लिया था। उसने भिंडरावाले की तरह ही पगड़ी और वस्त्र पहनना शुरू कर दिया। कुछ लोग तो उन्हें भिंडरावाले 2.0 भी कहने लगे। उसकी हिरासत पंजाब सरकार द्वारा 22 अप्रैल, 2025 तक एक और साल के लिए बढ़ा दी गई है।

अब्दुल राशिद ने सिविल इंजीनियरिंग में किया है डिप्लोमा

इंजीनियर राशिद की बात की जाये तो 70 के दशक में किशोर के रूप में राशिद अपने आसपास पनप रही अलगाववादी भावनाओं की ओर आकर्षित हो गया था। राशिद ने 1988 में बीएससी किया और उसके बाद सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा किया। जिसके बाद उसने जम्मू और कश्मीर प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन में नौकरी की।

जब वह 2008 में राजनीति में आया तो 'इंजीनियर' राशिद का पहला नाम बन गया। उसी साल राशिद ने पहली बार उत्तरी कश्मीर की लंगेट विधानसभा सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता। अक्टूबर 2015 में राशिद ने कहा था, "मैं भारत में सबसे ज्यादा गलत समझा जाने वाला विधायक हूं।"

निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा चुनाव

नवनिर्वाचित बारामूला सांसद ने राजनीति में तब कदम रखा जब वह 1979 में मारे गए अलगाववादी अब्दुल गनी लोन की जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस में शामिल हो गया। उसने 1987 में मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट के टिकट पर लंगेट सीट से चुनाव लड़ा।

राशिद को 2005 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप ने उसे गिरफ्तार कर लिया और उस पर आतंकवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। उसे सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत तीन महीने और 17 दिनों के लिए जेल में रखा गया था। यूएपीए के तहत चल रहे मामले में एनआईए द्वारा उसकी गिरफ्तारी से पहले, 2019 में राशिद ने बारामूला लोकसभा सीट से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा लेकिन हार गया।

इस बार, अवामी इत्तेहाद पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए राशिद ने चुनाव अभियान चलाने की जिम्मेदारी अपने बेटों अबरार राशिद और असरार राशिद पर छोड़ दी और सज्जाद लोन को हराया।

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