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हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के पिता की हत्या के दो आरोपी 33 साल बाद गिरफ्तार, दो एनकाउंटर में मारे गए, एक जेल में

डीजी स्वैन ने बताया कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोनों को एजेंसी के हवाले कर दिया गया है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: शैलेंद्र गौतम
May 16, 2023 19:54 IST
हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के पिता की हत्या के दो आरोपी 33 साल बाद गिरफ्तार  दो एनकाउंटर में मारे गए  एक जेल में
कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सेना की कार्रवाई जारी है। (प्रतीकात्मक फोटो)
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जम्मू-कश्मीर पुलिस ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर फारूक के पिता की हत्या के 33 साल बाद इस मामले में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मीरवाइज मोहम्मद फारूक की मई 1990 को हत्या कर दी गई थी। हत्थे चढ़े दोनों आरोपियों में वो आतंकी भी शामिल है जिसने मीरवाइज के कमरे में घुसकर उन पर गोलियां चलाई थीं।

हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक के पिता मीरवाइज मोहम्मद फारूक ऑल जम्मू एंड कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष थे। पुलिस ने बताया कि इस हत्याकांड में शामिल दो आरोपी फरार थे। मुख्य आरोपी अब्दुल्ला बंगरू एक मुठभेड़ में मारा गया था। एक अन्य आरोपी अब्दुल रहमान शिगान भी एक मुठभेड़ में मारा गया था। एक आरोपी जेल में सजा काट रहा है।

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वारदात करके पाकिस्तान भाग गए थे दोनों आरोपी- बोले डीजी

​​जम्मू-कश्मीर के विशेष डीजी (सीआईडी) आरआर स्वैन ने बताया कि जावेद भट उर्फ ​​अजमत खान और जहूर भट उर्फ ​​बिलाल भागने में सफल रहे थे। पांचों आतंकियों में वह जहूर ही था, जिसने मीरवाइज के कमरे में घुसकर उन पर गोलियां चलाई थीं। उन्होंने कहा कि फरार आरोपियों को 33 साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया। अब उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। हालांकि डीजी ने इस बात का खुलासा करने से इनकार कर दिया कि दोनों पुलिस के हत्थे कैसे चढ़े और उनको कहां से गिरफ्तार किया गया।

स्वैन ने बताया कि मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोनों को एजेंसी के हवाले कर दिया गया है। वारदात के बाद दोनों हाथ नहीं लग सके। उसके बाद उन्हें भगोड़ा घोषित कर दिया गया। उनका कहना है कि दोनों आरोपी फरारी के दौरान पाकिस्तान के साथ नेपाल भी गए। कुछ साल पहले वो वापस कश्मीर में आकर रहने लगे थे। स्वैन ने बताया कि हत्या के एक आरोपी जेल में बंद है और आजावीन कारावास की सजा काट रहा है।

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मीरवाइज की हत्या के बाद जम्मू कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। सुरक्षा बलों ने लोगों को काबू करने के लिए फायरिंग की थी इसमें दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए थे। ये लोग श्रीनगर के डाउन टाउन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। फिर जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

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