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Mata Rani Vaishno Devi: थकान, खर्च और समय पर भारी है आस्था 

माता रानी वैष्णो देवी हिंदुओं का एक धार्मिक स्थल है, जो जम्मू कश्मीर में त्रिकुटा पर्वत पर स्थित है। कटरा से 14 किमी की चढ़ाई के बाद माता के दर्शन होते है।
Written by: गिरधारी लाल जोशी
Updated: January 15, 2023 04:09 IST
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वैष्णो देवी के दर्शन के बाद तीर्थयात्री भैरों बाबा के दर्शन के लिए जरूर जाते है। दो किमी की चढ़ाई करने के लिए घोड़े, पालकी और रोपवे साधन है। (PTI)
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Pilgrimage Of Vaishno Devi: दर्शन के लिए घोड़े, पालकी, हेलीकॉप्टर जैसी कितनी भी सुविधा दी जाए, मगर ज्यादातर तीर्थयात्री पैदल चढ़ाई कर ही जाना चाहते है। कमजोर और लाचार लोग ही साधनों का उपयोग करते हैं। हेलीकाप्टर सेवा दो कंपनियां ग्लोबल और हिमालया देती हैं। एक तरफ का प्रति यात्री किराया 1860 रुपए है। भीड़ यहां भी है। ग्लोबल कंपनी के कैप्टन नवीन कुमार बताते है कि दर्शन के लिए आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को ले जाना संभव भी नहीं है। हेलीकॉप्टर की सेवा सांझी छत तक ही है, जो कटरा से 9.5 किलोमीटर दूर है।

अर्द्धकुमारी से बैटरी चालित वैन भी मिलता है। किराया 264 रुपए प्रति यात्री है। लौटने का 236 रुपए किराया तय है। ये सात सवारी ही बैठाते हैं और ज्यादातर आन लाइन बुकिंग होती है। बैटरी चालक वाहन कम है। वह भी आधी दूरी तक ही है।

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वैष्णो देवी मंदिर श्राइन बोर्ड के तहत आता है। इसका गठन 1986 में किया गया था। यह बोर्ड दान में मिले पैसों से यात्रियों के लिए सुविधाएं मुहैया कराता है। गुफा में बने माता रानी की आरती सुबह 7 बजे से 9  बजे और शाम को 6 से 8 बजे तक होती है। उस दौरान दर्शन बंद रहता है। तब तक कतार लंबी हो जाती है।

अर्द्धकुमारी से नीचे झांकने पर रात में कटरा शहर टिमटिमाते तारों की तरह दिखता है। ऐसा रोशनी की वजह से है। लेकिन यहां रात-दिन माता के दर्शन के लिए लाखों यात्रियों का जनसैलाब चलते रहता है। माता रानी की गुफा तक पहुंचने के पहले जगह जगह लॉकर बने है। जहां अपने जूते, पर्स, बैल्ट, मोबाइल वगैरह रखना है। गुफा में प्रवेश के पहले सीआरपीएफ के जवान जामातलाशी लेते है। सुरक्षा इंतजाम कड़ा है। गुफा को भी पहले की तुलना में आधुनिक तरीके से बना दिया गया है। कतार में दर्शन आराम से होते है। कोरोना काल के बाद अंदर प्रसाद देने की व्यवस्था बंद कर दी गई है।

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प्रसाद के लिए गुफा से निकलते ही चरणामृत का इंतजाम है। प्रसाद के लिए काउंटर बने है। भक्तगण नारियल चढ़ाने ले जाते है। गुफा में प्रवेश के पहले ही नारियल जमा ले बदले में टोकन  दिया जाता है। दर्शन के बाद थोड़ा उतरने के वक्त बने काउंटर टोकन देकर चढ़ा नारियल पा सकते है।

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यात्रियों के लिए ऊपर जगह-जगह चाय-नाश्ता और भोजन के लिए भोजनालय बने है। सात्विक खाना बगैर प्याज-लहसुन का मिल जाता है। कटरा के रेस्टोरेंट में भी यही व्यवस्था है। ताकि सबको बगैर प्याज- लहसुन का भोजन बिना भेदभाव के मिल सके।

यहां माता रानी के दर्शन के बाद तीर्थयात्री भैरों बाबा के दर्शन के लिए जरूर जाते है। दो किमी की चढ़ाई करने के लिए घोड़े, पालकी और रोपवे साधन है। रोपवे के लिए सौ रुपए और घोड़े का 300 रुपए एक तरफ का। यानी कटरा से एक तरफ घोड़े से एक सवारी का 1500 रुपए खर्च पड़ जाता है। थकान, खर्च और समय पर भारी है आस्था।

एक बात ध्यान देने की है कि जम्मू की सीमा में आते ही मुसाफिरों का प्रीपेड सिम का नेटवर्क बंद हो जाता है। मोबाइल केवल कैमरे के काम आता है। हालांकि फोटोग्राफी वर्जित है। यात्रियों को अपनों से संपर्क के लिए जम्मू का सिम लेना होगा या पोस्टपेड सिम वाला मोबाइल रखना होगा।

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