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IPL 2024 में इस्तेमाल होगा स्मार्ट रीप्ले सिस्टम, एक ही कमरे में बैठेंगे टीवी अंपायर और हॉक-आई ऑपरेटर, जानें इसका फायदा

नए सिस्टम में टीवी अंपायर और हॉक-आई ऑपरेटर एक ही कमरे में होंगे, जिसमें अधिक स्प्लिट-स्क्रीन दिखाई देंगे। बेहतर फ्रेम रेट और कम जटिल प्रक्रिया होगी।
Written by: खेल डेस्‍क | Edited By: Tanisk Tomar
नई दिल्ली | March 19, 2024 17:22 IST
ipl 2024 में इस्तेमाल होगा स्मार्ट रीप्ले सिस्टम  एक ही कमरे में बैठेंगे टीवी अंपायर और हॉक आई ऑपरेटर  जानें इसका फायदा
आईपीएल 2024 में स्मार्ट रिप्ले सिस्टम का इस्तेमाल होगा। (फोटो - BCCI/IPL)
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इंडियन प्रीमियर लीग 2024 (IPL 2024) में निर्णय लेने की सटीकता और गति बढ़ाने के लिए स्मार्ट रीप्ले सिस्टम का इस्तेमाल होगा। टीवी अंपायर को दो हॉक-आई ऑपरेटर्स से सीधे इनपुट मिलेगा। वह अंपायर के साथ एक ही कमरे में बैठे होंगे। वह टीवी अंपायर को हॉक-आई के आठ हाई-स्पीड कैमरों की मदद से कैप्चर की गई फोटोज प्रदान करेंगे। टीवी ब्रॉडकास्ट डायरेक्टर अब तक थर्ड अंपायर और हॉक-आई ऑपरेटर्स के बीच हुआ करता था। नई प्रणाली में उसकी जगह नहीं है।

क्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार स्मार्ट रीप्ले सिस्टम टीवी अंपायर को फैसला लेने के लिए पहले की तुलना में अधिक फोटोज प्रदान करेगा। इसमें स्प्लिट-स्क्रीन इमेज भी शामिल हैं। अंपायर को इससे कैसे फायदा होगा। इसे हम बाउंड्री पर कैच के उदाहरण से समझ सकते हैं। अबतक ब्रॉडकास्टर्स कैच लेते समय फील्डर के पैर और हाथ को स्प्लिट स्क्रीन पर एक साथ नहीं दिखा पाते थे। नए सिस्टम में अंपायर स्प्लिट स्क्रीन में पैर के फुटेस के साथ यह देख पाएंगे की गेंद कब पकड़ी और कब छोड़ी गई।

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आठ हॉक-आई कैमरे इस्तेमाल होते हैं

इसी तरह स्प्लिट स्क्रीन पर चार रन को जाने वाले ओवरथ्रो के दौरान यह देखने को मिलेगा कि फील्डर ने गेंद थ्रो की तो बल्लेबाजों ने क्रॉस किया था या नहीं। पहले टीवी अंपायर को ऐसे स्पष्ट दृश्य नहीं मिलते थे, क्योंकि ब्रॉडकास्टर दो इमेज को जोड़ नहीं पाते थे। किसी भी मैच में आठ हॉक-आई कैमरे होते हैं। मैदान के दोनों स्ट्रेट बाउंड्री पर दो-दो पिच के दाएं और बाएं तरफ होते हैं।

बॉल ट्रैकिंग और अल्ट्राएज के लिए होता था हॉक आई का इस्तेमाल

आईपीएल 2023 तक हॉक-आई कैमरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से बॉल ट्रैकिंग और अल्ट्राएज के लिए किया जाता था। इसलिए एलबीडब्ल्यू और गेंद के बल्ले का किनारा लेने के अलावा ब्रॉडकास्टर बड़े पैमाने पर किसी भी ऑन-फील्ड रेफरल के लिए अपने स्वयं के कैमरे से फुटेज का उपयोग करते थे। इसमें स्टंपिंग, रन-आउट, कैच और ओवरथ्रो के रेफरल शामिल थे।

गैप दिखने पर अल्ट्राएज की मांग नहीं करेगा

स्टंपिंग रेफरल के मामले में स्मार्ट रिव्यू सिस्टम के आने के बाद टीवी अंपायर हॉक-आई ऑपरेटर्स से उसे स्प्लिट स्क्रीन दिखाने के लिए कह सकता है। यदि गेंद के बल्ले के पास से गुजरने पर कोई गैप दिखाई देता है, तो वह अल्ट्राएज की मांग नहीं करेगा। इसके बजाय सीधे स्टंपिंग के लिए साइड-ऑन रीप्ले के लिए आगे बढ़ेगा। यदि टीवी अंपायर को बल्ले और गेंद के बीच स्पष्ट गैप नहीं दिखता है, तभी वह अल्ट्राएज को रेफर करेगा।

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स्टंपिंग के डिसिजन में होगी आसानी

स्टंपिंग के लिए नई प्रणाली टीवी अंपायर को तीन इमेज दिखाई देगा। साइड-ऑन कैमरों के साथ-साथ उसी समय फ्रंट-ऑन फुटेज भी दिखेगा। फ्रंट-ऑन कैमरा एंगल महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बेल्स के विकेट से हटने की सटीक तस्वीर देता है। पहले ब्रॉडकास्टर स्टंप कैम के फुटेज के साथ प्रत्येक तरफ से साइड-ऑन एंगल दिखाते थे। लेकिन स्टंप कैम लगभग 50 फ्रेम प्रति सेकंड की कम गति पर एक्शन को रिकॉर्ड करता है, जबकि हॉक-आई कैमरे लगभग 300 फ्रेम प्रति सेकंड पर रिकॉर्ड करते हैं। अब अंपायर्स के लिए अपने निर्णय को आधार बनाने के लिए अधिक सटीक फुटेज मिलेंगे। स्मार्ट रिव्यू सिस्टम जमीन से कुछ इंच ऊपर पकड़े गए कैच के मामले में अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा। इस तरह के रेफरल ने अतीत में टीवी अंपायर के फैसले पर बहस छेड़ी है।

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