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35 के अभिशाप से क्यों घबरा रही चीनी युवा पीढ़ी? लोगों में इस उम्र को लेकर बढ़ रहा डर

चीन में महामारी के बाद में आर्थिक मंदी ने उम्र के आधार पर भेदभाव को काफी हद तक बढ़ा दिया है। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की नियुक्ति की सीमा 35 साल ही फिक्स कर दी है।
Written by: न्यूज डेस्क
July 10, 2024 22:36 IST
35 के अभिशाप से क्यों घबरा रही चीनी युवा पीढ़ी  लोगों में इस उम्र को लेकर बढ़ रहा डर
कर्स ऑफ 35। (इमेज-रॉयटर्स)
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आर्थिक महाशक्ति कहलाने वाला चीन इस समय आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था में तूफान आ गया है। इसके पीछे का कारण अमेरिका के साथ ट्रेड वार, बूढ़ी होती आबादी, प्रॉपर्टी सेक्टर पर ज्यादा भरोसा और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी कार्रवाई है। इतना ही नहीं चीन का जॉब मार्केट भी इस समय चुनौतियों का सामना कर रहा है।

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आर्थिक चुनौतियों के बाद भी ग्रेजुएट्स काम करने के लिए एंट्री कर रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। इससे अलग-अलग सेक्टर में लोगों की नौकरियां चली गई हैं और नई नौकरियों पर भी मानो रोक लग गई है। मैन्युफेक्चरिंग इंडस्ट्री पर भी बुरी तरह से असर पड़ा है। इससे कंपनियों को खुद चलाने और ट्रांसफर करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।

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टेक सेक्टर में भी मंदी की मार

टेक सेक्टर नौकरी चाहने वालों के लिए आशा की किरण माना जाता था। उस पर भी मंदी की मार पड़ रही है। अलीबाबा और टेनसेंट जैसी बड़ी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। आर्थिक विकास के पहिये को आगे बढ़ाने वाला रियल एस्टेट बाजार भी कर्ज की वजह से धीरे-धीरे बाधित हो गया है। इसकी वजह से रोजगार का संकट और गहरा गया है।

चीनी सरकार ने इस स्थिति को माना है। इतना ही नहीं रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कुछ उपाय भी लागू किए हैं। हालांकि, आगे की राह आसान नहीं है। चीन एक ज्यादा टिकाऊ और इनोवेशन के द्वारा चलने वाली मुश्किलों को पार कर रहा है। इस संकट के सांस्कृतिक पहलू को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। समाज में रोजगार के सामाजिक पहलू और आत्म सम्मान आपस में जुड़े हुए होते हैं। बेरोजगारी युवाओं के बीच में चीनी समाज के ताने बाने के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहा है।

क्या होता है ‘कर्स ऑफ 35’?

35 साल के अभिशाप के बारे में कहा जाए तो यह चीन के लोगों जो काम करते हैं। 35 साल की उम्र को पार कर लेते हैं तो यह उनके साथ भेदभाव को दिखाता है। कंपनियां 35 साल की उम्र ही फिक्स कर देती हैं। इसकी वजह से बूढ़े कर्मचारियों को नौकरी मिलना और भी मुश्किल हो जाता है। युवा उम्मीदवारों की तुलना में उनके एक्सपीरियंस को कम आंका जाता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में आर्थिक मंदी के मद्देनजर 35 साल की उम्र के लोग अपने करियर को बचाए रखने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं।

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शेन्जेन के जिम जियाओ ने इस उम्र में विदेश में सेल्स मैनेजर की नौकरी हासिल की। ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि चीन की टेक इंडस्ट्री में लोगों को परेशान करने वाले 35 के अभिशाप से मुकाबला किया जा सके।

चीन में बढ़ा भेदभाव

चीन में महामारी के बाद में आर्थिक मंदी ने उम्र के आधार पर भेदभाव को काफी हद तक बढ़ा दिया है। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की नियुक्ति की सीमा 35 साल ही फिक्स कर दी है। जियाओं ने विदेश में नौकरी हासिल करके यह बता दिया कि चीन के दूसरे कामगार लोग मौकों को तलाश सकते हैं। चीनी कंपनियां अलग-अलग सेक्टरों में इंटरनेशनल लेवल पर खूब विस्तार कर रही हैं। एससीएमपी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल के पहले पांच महीनों में चीन का का इंवेस्टमेंट 60.2 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसमें बेल्ट एंड रोड के हिस्सेदार देशों में इंवेस्टमेंट शामिल है।

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