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कच्चे तेल समेत ये चीजें हो जाएगीं महंगी, जानें ईरान-इजराइल युद्ध का भारत पर क्या होगा असर

भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अपनी 85 फीसदी से ज्यादा जरुरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है।
Written by: ईएनएस
Updated: April 16, 2024 08:13 IST
कच्चे तेल समेत ये चीजें हो जाएगीं महंगी  जानें ईरान इजराइल युद्ध का भारत पर क्या होगा असर
कजाकिस्तान के मैंगिस्टौ क्षेत्र में जेटीबे क्षेत्र में एक ड्रिलिंग रिग पर एक कार्यकर्ता। (इमेज- रॉयटर्स)
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Iran-Israel Conflict: ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के हालात बन गए हैं। यह पहली बार है, जब ये दोनों मुल्क खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-हमास संघर्ष ने पहले ही दुनियाभर के देशों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। इस बीच ईरान-इजराइल युद्ध का भारत पर भी काफी असर पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी। इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों का आकलन करने में अभी कुछ समय लगेगा।

भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अपनी 85 फीसदी से ज्यादा जरुरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। देश के आयात पर निर्भरता को देखते हुए इसका अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद भारत के व्यापार संतुलन, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये के मूल्य पर भी असर पड़ेगा।

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तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की उम्मीद

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए पिछले कुछ दिनों में अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। प्रमुख तेल उत्पादकों के द्वारा उत्पादन में बीते कुछ समय से कटौती की जा रही थी। इसके बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से कीमतों पर और ज्यादा दबाव देखा जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों ने बताया है कि अगर ईरान और इजराइल का संघर्ष शुरू होता है तो इसका परिवहन व्यवस्था, तेल उत्पादन और अन्य चीजों पर असर पड़ेगा। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की उम्मीद है या यह इससे भी पार जा सकता है।

बता दें कि भारत इस समय ईरान से तेल नहीं खरीदता है क्योंकि अमेरिका ने कुछ पाबंदी लगाई हुई हैं। लेकिन, चीन बड़ी मात्रा में ईरान से तेल खरीदता है। अगर युद्ध की वजह से ईरानी आपूर्ति पर असर पड़ता है तो रूस से तेल लेने की होड़ बढ़ जाएगी। भारत इस समय रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।

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भारत के रिफाइनिंग क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि वे आपूर्ति और कीमतों पर प्रभाव का आकलन करने के लिए स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। उद्योग जगत के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जिन प्रमुख चीजों पर ध्यान देना चाहिए उनमें फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये तेल शिपमेंट पर संघर्ष का असर होगा। भारत के पास पश्चिम एशियाई तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।

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भारत रूस से कच्चे तेल का करता है सबसे ज्यादा आयात

केप्लर के जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, मार्च में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का बड़ा स्रोत था और महीने के दौरान नई दिल्ली के कुल कच्चे तेल आयात का 33 फीसदी हिस्सा था। मार्च में भारत के कुल तेल आयात में इराक, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की हिस्सेदारी लगभग 48 फीसदी थी। इसके बाद रिफाइनरी क्षेत्र के अधिकारी तेल की उपलब्धता की वजह से ज्यादा चिंतित नहीं दिख रहे हैं। भले ही कीमतों में उछाल की चिंताएं तेज हो गई हैं।

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