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योद्धा, सर्जन और अब ईरान का राष्ट्रपति... मसूद पेजेश्कियान के भारत से कैसे होंगे रिश्ते?

मसूद पेजेश्कियान ने ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है और वह देश की कमान संभालेंगे।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: July 06, 2024 18:19 IST
योद्धा  सर्जन और अब ईरान का राष्ट्रपति    मसूद पेजेश्कियान के भारत से कैसे होंगे रिश्ते
मसूद पेजेश्कियान ईरान के नए राष्ट्रपति होंगे। (REUTERS PHOTO)
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ईरान को नया राष्ट्रपति मिल गया है। मसूद पेजेश्कियान ने ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की है और वह देश की कमान संभालेंगे। ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर हादसे में मौत हो गई थी, जिसके बाद देश में चुनाव हुए। अब चुनावों में मसूद पेजेश्कियान ने जीत हासिल की है।

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अज़ेरी भाषा बोलते हैं ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान

मसूद पेजेश्कियान का जन्म 29 सितंबर 1954 को उत्तर-पश्चिमी ईरान के महाबाद में हुआ था। मसूद पेजेश्कियान अज़ेरी भाषा बोलते हैं और लंबे समय से ईरान के अल्पसंख्यक जातीय समूहों के मामलों पर ध्यान केंद्रित करते रहे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि पेजेश्कियान युद्ध में भी हिस्सा ले चुके हैं उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में हिस्सा लिया और युद्ध के मैदान में चिकित्सा दल भेजे।

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हार्ट सर्जन भी हैं ईरानी राष्ट्रपति

मसूद पेजेश्कियान एक हार्ट सर्जन भी हैं और तबरीज़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के चीफ भी रह चुके हैं। हालांकि 1994 में एक कार दुर्घटना में उनकी पत्नी फतेमेह मजीदी और उनकी एक बेटी की मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने अकेले जीवन व्यतीत किया और दोबारा शादी नहीं की। एक बेटी की मौत के बाद उनके दो बेटे और एक बेटी है, जिसका पालन पोषण उन्होंने ही किया।

ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान पहले देश के उप स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी के प्रशासन के तहत स्वास्थ्य मंत्री की भी सेवा दी थी।

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भारत के साथ ईरानी सरकार के कैसे होंगे रिश्ते?

भारत के साथ रिश्तों पर भारत में ईरान के राजदूत इराज इलाही ने चुनाव परिणाम आने के पहले ही ईरान का रुख बता दिया था। उन्होंने कहा था कि ईरान और भारत के बीच विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं होगा, चाहे सत्ता में कोई भी आए। इसके अलावा उनके अनुसार ईरान-भारत एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना चाबहार बंदरगाह में शामिल हैं और उस समझौते का हमेशा सम्मान किया जाएगा। इराज इलाही ने कहा कि बुनियादी ढांचे का विकास हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग के आधारों में से एक है।

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