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पाक चुनाव: गठबंधन का प्रस्ताव, पर सहमति कहां? नवाज और PM कुर्सी के बीच तो नहीं खड़े बिलावल

चुनाव के वक्त एक बार भी ऐसा मौका नहीं आया था जब बिलावल और नवाज शरीफ के बीच में फ्रेंडली कंटेस्ट दिखा हो। बिलावल तो खुद पीएम बनना चाहते थे, नवाज की नीतियों को कोसकर ही वोट अपने पाले में लाना उनका मकसद था।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
नई दिल्ली | Updated: February 11, 2024 00:44 IST
पाक चुनाव  गठबंधन का प्रस्ताव  पर सहमति कहां  नवाज और pm कुर्सी के बीच तो नहीं खड़े बिलावल
पाकिस्तान चुनाव का असमंजस
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पाकिस्तान में चुनावी नतीजे अभी भी पूरी तरह घोषित नहीं हुए हैं। 265 सीटों में से 255 के नतीजे सामने आए हैं जहां पर 100 से ज्यादा सीटों पर इमरान समर्थित प्रत्याशी जीत दर्ज कर चुके हैं। वहीं दूसरी नंबर पर नवाज शरीफ की पार्टी है जिसने 70 का आंकड़ा तो पार कर लिया है। वहीं तीसरे नंबर पर 50 से कुछ सीटें ज्यादा लेकर बैठी है बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पीपीपी। इस समय पाकिस्तान में किसकी सरकार बनने वाली है, राजनीतिक पंडित भी इसका अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं।

नवाज चाहते सहयोग, बिलावल कर रहे कौन सा प्रयोग?

जादुई आंकड़ा तो 134 सीटों का है जहां तक अपने दम पर कोई भी पहुंचता नहीं दिख रहा। इमरान की पार्टी कह जरूर रही है कि उनकी जीत तो 170 सीटों पर हो चुकी है, लेकिन लफबाजी और असल चुनावी नतीजों में यहीं सबसे बड़ा अंतर है। इन दावों के बीच सरकार बनाने की सबसे पहली और बड़ी पहल नवाज शरीफ ने ही की है। चौथी बारक प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे नवाज ने सामने से ही पीपीपी पार्टी को गठबंधन का ऑफर दे दिया है। उनकी पार्टी की तरफ से शहबाज शरीफ ने बिलावल के पिता से बात भी की है।

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लेकिन हैरानी इस बात की है कि तमाम बातचीत के बाद भी गठबंधन को लेकर कोई फैसला नहीं हो पाया है। जिस समय हर घंटे सियासी समीकरण बदल रहे हों, गठबंधन के ऐलान को लेकर हो रही इस देरी ने सभी के मन में कई सवाल उठा दिए हैं? ये सवाल तो इसलिए भी उठना लाजिमी हैं क्योंकि चुनाव के वक्त एक बार भी ऐसा मौका नहीं आया था जब बिलावल और नवाज शरीफ के बीच में फ्रेंडली कंटेस्ट दिखा हो। बिलावल तो खुद पीएम बनना चाहते थे, नवाज की नीतियों को कोसकर ही वोट अपने पाले में लाना उनका मकसद था।

बिलावल की महत्वकांक्षा, नवाज के टूटेंगे सपने?

ऐसे में कहीं बिलावल भुट्टो ही तो नवाज शरीफ और पीएम कुर्सी के बीच में सबसे बड़ा रोड़ा तो नहीं बन रहे? वैसे भी बिलावल के पिता तो हर कीमत पर उन्हें प्रधानमंत्री बनता देखना चाहते हैं, ऐसे में आखिर वे क्यों एक बार फिर झुक कर नवाज की ताजपोशी होने देंगे। वैसे बिलावल की नीतय पर सवाल इसलिए भी उठते हैं क्योंकि नवाज की पार्टी ने पाक मीडिया के सामने बोला है- बिलावल की PPP की तरफ से गठबंधन पर कोई फैसला नहीं हुआ। ये बताने के लिए काफी है कि खिचड़ी अलग तरह की पक रही है।

खेल करने के लिए नहीं पर्याप्त नंबर

लेकिन आंकड़ों के नजर से समझें तो इस खेल में भी बिलावल भुट्टो ज्यादा सफल होते नहीं दिख रहे हैं। 53 सीटों के साथ बैठी पीपीपी को अभी सरकार बनाने के लिए कम से कम 80 और सांसदों की दरकार है। इतनी बड़ी तोड़ करना मुश्किल लगता है। वहीं दूसरी तरफ नवाज शरीफ के पास एक प्लान बी तैयार दिख रहा है। उन्हें इस बात का अहसास है कि अगर बिलावल ने खेल कर दिया और गठबंधन नहीं हो सका, उस स्थिति में उन्हें क्या करना है।

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नवाज का प्लान बी, इमरान-बिलावल आउट!

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इमरान समर्थित 60 निर्दलीयों के संपर्क में इस समय नवाज की पार्टी है। अगर ये 60 किसी तरह से नवाज के साथ चले जाते हैं तो पार्टी का आंकड़ा 133 तक पहुंच जाएगा, यानी कि बहुमत के एकदम करीब। ये स्थिति पूरी तरह नवाज के लिए मुफीद है क्योंकि तब दूसरे कुछ स्वंतत्र निर्दलीयों को साथ लाया जा सकता है और चौथी बार पीएम बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।

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सेना का सपना पूरा करेंगे नवाज?

बड़ी बात ये है कि जनता से झटका खाने के बाद भी पाकिस्तान आर्मी नवाज शरीफ का समर्थन करना नहीं छोड़ रही है। जारी बयान में पाक आर्मी ने निजी हितों से ऊपर उठकर गठबंधन करने की बात कह दी है। नाम किसी पार्टी का नहीं लिया गया है, लेकिन टाइमिंग का खेल ऐसा है कि सभी को पता चल चुका है कि फिर नवाज की ताजपोशी तो सेना भी चाहती है। अब सवाल वही है- क्या बिलावल भुट्टो सही में नवाज शरीफ के साथ गठबंधन करेंगे या फिर चार बार के पूर्व पीएम के लिए सबसे बड़े सियासी रोड़ा साबित होंगे?

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