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पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति बने आसिफ अली जरदारी, दूसरी बार हुई ताजपोशी

पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति बने आसिफ अली जरदारी बन गए हैं। उन्होंने दूसरी बार ये पद संभाला है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
नई दिल्ली | Updated: March 09, 2024 20:49 IST
पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति बने आसिफ अली जरदारी  दूसरी बार हुई ताजपोशी
पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने आसिफअली जरदारी (फोटो- AFP)
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पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी बन गए हैं। उन्होंने दूसरी बार ये पद संभाला है। पहले से ही उनकी जीत पक्की मानी जा रही थी और अब जब नतीजों का ऐलान हुआ है, वे दूसरी बार पाकिस्तान के राष्ट्रपति बन गए हैं। विवादों में रहने वाले जरदारी राजनीति के काफी पुराने खिलाड़ी हैं जिनका पाकिस्तान की सियासत में कद काफी बड़ा माना जाता है।

जानकारी के लिए बता दें कि आसिफ अली जरदारी को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेता शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले छह दलों के गठबंधन द्वारा शीर्ष पद के लिए नामित किया गया था। अब 411 वोटों के साथ जरदारी ने एक आसान जीत दर्ज कर ली है। उनके प्रतिद्वंदी महमूद अचकजई को मात्र 181 वोट ही मिल सके, ऐसे में दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए जरदारी को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी।

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इससे पहले 2008 में पहली बार आसिफ अली जरदारी को पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनने का मौका मिला था। तब उन्होंने 2013 तक उस पद को संभाल रखा था। अब 11 साल बाद फिर उनका सियासी वनवास खत्म हुआ है और नवाज की पार्टी की तरफ से बड़ी जीत दर्ज कर वे फिर प्रेसिडेंट बन गए हैं। वैसे ये अलग बात है कि जरादरी के प्रतिद्वंदी ने धांधली का आरोप लगा दिया था, उनकी तरफ से तो कोर्ट का रुख भी किया गया था, लेकिन क्योंकि अदालत ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया, ऐसे में उनकी राह आसान रही।

बता दें कि आसिफ अली जरदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के वरिष्ठ नेता हैं। जरदारी का भुट्टो परिवार से खास जुड़ाव रहा है और बाद में उनकी शादी बेनजीर भुट्टो से हुई थी। 1955 में जन्मे जरदारी की इमेज एक प्लेबॉय वाली थी। उनका राजनीतिक सफर 1983 में शुरू हुआ, उस समय उन्होंने नवाबशाह से डिस्ट्रिक्ट काउंसिल की सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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बेनजीर भुट्टों जब प्रधानमंत्री बनीं तो उनकी सरकार में जरदारी मंत्री बने थे। उन्होंने शुरुआत में पर्यावरण मंत्रालय अपने हाथ में ले लिया और फिर धीरे-धीरे कई अन्य मंत्रालयों की अगुवाई करने लगे। यहीं से उनके भ्रष्टाचार का खेल भी शुरू हुआ, जो भी बेनजीर भुट्टो सरकार के साथ बिजनेस करना चाहता था, कहा जाता है कि जरदारी उससे पहले 10 फीसदी कमीशन तय कर लेते थे।

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