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Kenya Violence: संसद में आग, सड़कों पर गोलीबारी और फंसे भारतीय … आखिर किस बात से इतना खफा केन्या वाले

भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कहा गया कि केन्या में रह रहे सभी हिंदुस्तानी, गैरजरूरी यात्रा करने से परहेज करें।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: June 26, 2024 22:37 IST
kenya violence  संसद में आग  सड़कों पर गोलीबारी और फंसे भारतीय … आखिर किस बात से इतना खफा केन्या वाले
केन्या में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन। (इमेज-एपी)
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Kenya protests: केन्या में सड़क से संसद तक हंगामा हो रहा है। हालात इस कदर तक खराब हो गए हैं कि प्रदर्शन में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है और 31 लोग जख्मी है। आइए जानतें है कि आखिर केन्या में यह बवाल क्यों हो रहा है और लोग वहां की सरकार से इतना नाराज किस वजह से हैं।

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आखिर केन्या मे क्या हो रहा?

केन्या में मंगलवार को नए टैक्स बिल के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे। वे संसद के बाहर लगे बैरिकेड्स को पार कर अंदर घुस गए, जहां सांसद बिल पर चर्चा कर रहे थे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने संसद में आग लगा दी। इस दौरान पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी। इसमें कई लोगों की जान चली गई है। इस प्रदर्शन में ज्यादातर युवाओं ने हिस्सा लिया है। संसद में हिंसा के दौरान सांसदों के एक अंडरग्राउंड टनल के जरिए बाहर निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने संसद के परिसर में तोड़फोड़ भी की।

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वो कौन सा बिल जिसका इतना विरोध?

केन्या की गवर्नमेंट एक नया फाइनेंस बिल लेकर आई है। इसको सबसे पहले मई 2024 में संसद में पेश किया गया था। इस बिल में रोटी पर 16 फीसदी टैक्स और खाने के तेल पर 25 फीसदी ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव था। गाड़ी की कीमतों पर भी टैक्स में इजाफा करने का प्रस्ताव था। लोगों ने इस बात पर काफी नाराजगी जाहिर की और विरोध भी किया। लोगों की नाराजगी को देखते हुए प्रावधानों में कुछ बदलाव भी किए। मगर यह सभी दिखावटी ही थे। ज्यादातर चीजों को उसी कैटेगरी में रखा गया। डिजिटल पेमेंट करने पर 5 फीसदी का टैक्स। अनाज, चीनी, खाने के तैल जैसी चीजों पर भी टैक्स में बढ़ोतरी। 50 से ज्यादा बेड का अगर हॉस्पिटल बनाना है तो उस पर भी 16 फीसदी का टैक्स लगाया गया।

क्या केन्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं?

बता दें कि केन्या में भारत के करीब 20000 लोग रहते हैं। वहां पर हिंसक प्रदर्शन की वजह से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। अगर ऐसी ही स्थितियां बरकरार रहीं तो भारत अपने नागरिकों को बाहर निकालने के लिए कोई अहम फैसला कर सकता है। पहले भी हिंसा से ग्रस्त देशों से भारत अपने नागरिकों को बाहर निकालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाता रहा है। वहीं, भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कहा गया कि केन्या में रह रहे सभी हिंदुस्तानी, गैरजरूरी यात्रा करने से परहेज करें। बाहर बेहद सावधानी से निकलें और जिन इलाकों में हिंसा हो रही है वहां पर बिल्कुल भी ना जाएं। भारतीय दूतावास सोशल मीडिया हैंड्लस पर नजर रखे।

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केन्या में अभी किसकी सरकार है?

केन्या में प्रेसिडेंशियल सिस्टम वाली व्यवस्था है। राष्ट्रपति ही सरकार और राष्ट्र दोनों का ही चीफ होता है। राष्ट्रपति का चुनाव लोगों के डायरेक्ट वोट से होता है। पिछला राष्ट्रपति चुनाव अगस्त 2022 में हुआ था। इसमें लोगों ने विलियम रूटो पर भरोसा जताया था। विधायिका की शक्ति संसद के पास मे है। केन्या की संसद में भी दो सदन है। ऊपरी सदन को सीनेट कहा जाता है। वहीं, निचले सदन को नेशनल असेंबली कहते हैं। इस प्रदर्शन की एक बड़ी वजह केन्या के राष्ट्रपति रुटो से भी जुड़ी हुई है। रुटो ने 2022 का जब चुनाव लड़ा था तो उनका अहम मुद्दा गरीबी का ही था। उन्होंने कहा था कि उनकी जिंदगी गरीबी में ही बीती है। बचपन में उनके पास चप्पल और जूते भी नहीं थे जिन्हें पहनकर वह स्कूल जा सकते थे। इन्हीं वजहों से वह लोगों के बीच में फेमस हो गए।

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केन्या का भविष्य क्या होने वाला है?

अब अगर केन्या के भविष्य के बारे में बताए तो राष्ट्रपति विलियम रुटो ने बुधवार को अपने फैसले में अचानक बदलाव कर दिया है और कहा कि वह फाइनेंस बिल पर साइन नहीं करेंगे। वह पहले लंबे समय से कहते हुए आ रहे थे कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही जरूरी है। रुटो ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा कि केन्या के लोगों की बात को ध्यान से सुनने के बाद मैं इस फाइनेंस बिल पर साइन नहीं करूंगा और बाद में इसे वापस ले लिया जाएगा। बता दें कि केन्या की आर्थिक स्थिति अभी कुछ ज्यादा सही नहीं है। सरकार को इंटरनेशनल कर्ज भी चुकाना है। जिसकी वजह से बजट काफी घाटे में जा रहा है। सरकार चाहे कोई भी हो उसे अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कठोर फैसले लेने होंगे। अब देखना यह होगा कि लोग इन कठोर फैसलों के लिए कितने तैयार हैं।

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