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Russia Ukraine War: 'मैं उसे जिंदा वापस देखना चाहता हूं', युद्ध में फंसे बेटे के लिए चिंतित पुलिसकर्मी ने सरकार से लगाई गुहार

Russia Ukraine War: सैयद नवाज अली ने कहा कि वह दिसंबर में घर आया और कुछ दिनों तक यहां रहा। पांच दिन हो गए हैं हम हुसैनी से बात कर पाए हैं।
Written by: ईएनएस
Updated: March 07, 2024 12:50 IST
russia ukraine war   मैं उसे जिंदा वापस देखना चाहता हूं   युद्ध में फंसे बेटे के लिए चिंतित पुलिसकर्मी ने सरकार से लगाई गुहार
सैयद इलियास हुसैन (दाएं) मोहम्मद समीर अहमद और सकलैन मुहम्मद (इमेज- Special Arrangement)
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Russia Ukraine War: दो साल बीतने के बाद भी रूस और यूक्रेन के बीच जंग अभी तक जारी है। इन दो देशों के बीच 24 फरवरी 2022 को जंग की शुरुआत हुई थी। ये जंग कब थमेगी इसके बारे में किसी के पास कोई भी जानकारी नहीं है। नौकरी के नाम पर एजेंट ने धोखे से रूसी सेना में भारतीय लोगों को भर्ती करवा दिया है और इसी में एक भारतीय की मौत भी हो चुकी है। इसी बीच, कर्नाटक पुलिस के एक हेड कांस्टेबल सैयद नवाज अली ने जब से रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए तेलंगाना के व्यक्ति की मौत के बारे में सुना है वह अपने बेटे को लेकर चिंतित है।

सैयद नवाज अली का 22 साल का बेटा सैयद इलियास हुसैनी, मोहम्मद समीर अहमद और सुकैन मोहम्मद के साथ मॉस्को में नौकरी करने के लिए गए थे। हालांकि, जब वह शहर में पहुंचे तो उन्हें यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के मैदान में उतार दिया गया। हुसैनी और कई भारतीयों को एजेंट के द्वारा धोखा दिया गया है। उनमें से कई लोगों ने भारत सरकार से अपील की है कि वह हमें यहां से बचाएं।

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पुलिसकर्मी ने कहा- हमें किससे संपर्क करने की जरूरत है?

कर्नाटक के कालाबुरगी के पुलिसकर्मी ने कहा कि हमें क्या करना चाहिए और हमें किससे संपर्क करने की जरूरत है? मैं अपने बेटे को जिंदा वापस आते हुए देखना चाहता हूं। अली ने कहा कि हुसैनी ने कुछ सालों तक दुबई में काम किया और उनसे एक एजेंट ने संपर्क किया। उस एजेंट ने उनसे मॉस्को में नौकरी दिलाने का वादा किया। अली ने कहा कि उनके बेटे को गार्ड की नौकरी के लिए 70,000 रुपये देने की बात कही गई थी। इसी वजह से वह मॉस्को जाने के लिए तैयार हो गया।

सैयद नवाज अली ने कहा कि वह दिसंबर में घर आया और कुछ दिनों तक यहां रहा। पांच दिन हो गए हैं हम हुसैनी से बात कर पाए हैं। उससे किसी भी तरह से संपर्क नहीं हो पा रहा है। हम यह भी नहीं जानते हैं कि वह जिंदा है या नहीं। मैं भारत सरकार से अपने बच्चे को बचाने की प्रार्थना करता हूं। अली ने डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र लिखा है और आसपास के कई नेताओं से भी संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास उनके बेटे को वापस लाने का कोई भी विकल्प नहीं बचा है। जब बेटे से आखिरी बार फोन पर बात हुई थी तो उसने कहा था कि उसे अब बार्डर पर तैनात किया जा रहा है और कभी भी युद्ध के मैदान में भेजा जा सकता है।

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हैदराबाद के व्यक्ति की हुई मौत

बीते साल नवंबर महीने में मॉस्को गए हैदराबाद के मोहम्मद अफसान की रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए जान चली गई थी। मॉस्को में भारतीय दूतावास इस बात की पुष्टि की थी। दूतावास ने कहा कि हम परिवार और रूसी अधिकारियों के संपर्क में हैं। जल्द ही उनके पार्थिव शरीर को भारत भेजने की कोशिश की जाएगी। पिछले हफ्ते अफसान के भाई मोहम्मद इमरान ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया था कि अफसान और तेलंगाना के एक अन्य व्यक्ति मोहम्मद सुफियान को एक एजेंट ने धोखा दिया था। इमरान ने कहा कि उन्हें भर्ती करने वाले एजेंट ने उनके भाई और सूफियान से कहा था कि वे मॉस्को में काम करेंगे लेकिन उन्हें 15 दिन की ट्रेनिंग दी गई और यूक्रेन के साथ युद्ध में छोड़ दिया गया।

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