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गुजरात में बेटे की हत्या, ऑस्ट्रेलिया में ड्रग्स की तस्करी, भारतीय मूल के दंपत्ति को 33 साल की सजा, हैरान करने वाली कहानी

ब्रिटेन में भारतीय मूल के दंपत्ति को 33 साल की सजा सुनाई गई है। उन्होंने ड्रग्स का साम्राज्य फैला रखा था। इसके अलावा उन पर गुजरात में बेटे की हत्या करने का भी आरोप है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
नई दिल्ली | Updated: January 31, 2024 20:37 IST
गुजरात में बेटे की हत्या  ऑस्ट्रेलिया में ड्रग्स की तस्करी  भारतीय मूल के दंपत्ति को 33 साल की सजा  हैरान करने वाली कहानी
भारतीय मूल के दंपत्ति को 33 साल की सजा।
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ब्रिटेन में भारतीय मूल के एक दंपति को कमर्शियल फ्लाइट के जरिए ऑस्ट्रेलिया में आधा टन से अधिक कोकीन की तस्करी का दोषी पाए जाने के बाद 33-33 साल की सजा सुनाई गई है। दोनों पति-पत्नी पर फरवरी 2017 में भारत के गुजरात में अपने गोद लिए हुए बेटे गोपाल सेजानी (11) और एक रिश्तेदार की हत्या का भी आरोप है। भारत ने इस मामले में उन्हें प्रत्यर्पित किए जाने का अनुरोध किया है।

5.7 करोड़ पाउंड की पकड़ी गई थी कोकीन

रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को ऑस्ट्रेलियाई बॉर्डर फोर्स ने मई 2021 में सिडनी में 5.7 करोड़ पाउंड की कोकीन पकड़ी थी जिसके बाद जांचकर्ताओं ने इस मामले में ईलिंग की आरती धीर (59) और कवलजीतसिंह रायजादा (35) की संलिप्तता का पता लगाया था। जांच के अनुसार, मेटल के बॉक्स की आड़ में फ्लाइट से ड्रग्स भेजने के पीछे इस दंपति का हाथ था। रायजादा की अंगुलियों के निशान उन बक्सों पर मिले थे जिनमें से मादक पदार्थ जब्त किए गए।

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धीर ने मार्च 2003 से अक्टूबर 2016 तक हीथ्रो में फ्लाइट की कंपनी में काम किया था जबकि रायजादा ने मार्च 2014 से दिसंबर 2016 तक इसी कंपनी में काम किया। एनसीए के अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर माल की ढुलाई प्रक्रिया से भलीभांति परिचित होने के कारण उन्होंने अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया।

11 साल के गोद लिए बेटे की हत्या का है आरोप

धीर और रायजादा को 21 जून 2021 को हनवेल में उनके घर से गिरफ्तर किया गया था। जांच में दोनों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय से अधिक धनराशि पाई गई। दोनों पर गुजरात में फरवरी 2017 में अपने गोद लिए 11 साल के बेटे गोपाल सेजानी और रायजादा के जीजा हरसुखभाई करदानी की हत्या का आरोप भी है। गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों ने गोपाल को गोद लेने और फिर उसका अपहरण और हत्या करने से पहले करीब 1.3 करोड़ रुपये का बीमा कराने तथा बीमा राशि हड़पने की साजिश रची थी।

लंदन में जुलाई 2019 में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत ने मानवाधिकारों के आधार पर उन्हें प्रत्यर्पित किए जाने के भारत के अनुरोध को ठुकरा दिया था। लंदन में उच्च न्यायालय ने भी फरवरी 2020 में भारत की अपील खारिज कर दी थी। फिलहाल मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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