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कुवैत में डिक्टेटरशिप! अमीर शेख ने भंग की संसद, संविधान को भी किया निलंबित, यह है वजह

कुवैत में भी दूसरे अरब देशों की तरह राजतंत्र है, लेकिन यहां की संसद पड़ोसी देशों से ज्यादा शक्तिशाली रही है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: May 11, 2024 16:06 IST
कुवैत में डिक्टेटरशिप  अमीर शेख ने भंग की संसद  संविधान को भी किया निलंबित  यह है वजह
कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-सबा (file photo)
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कुवैत में राजनीतिक और संवैधानिक संकट खड़ा हो जाने से खाड़ी का यह देश दुनियाभर में सुर्खियों में आ गया है। अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-सबा ने शुक्रवार को एक टेलीविज़न भाषण में ऐलान किया कि उन्होंने संसद को भंग कर दिया है। अमीर ने कुछ संवैधानिक कानूनों को चार साल से अधिक की अवधि के लिए निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा। स्टेट टीवी ने बताया कि नेशनल असेंबली की शक्तियां अमीर और देश की कैबिनेट ग्रहण करेंगी। एक तरह से देश में डिक्टेटरशिप लागू हो गया है।

अमीर ने कहा- कठिन निर्णय लेने में कोई झिझक नहीं

अमीर ने कहा, "कुवैत इन दिनों कुछ कठिन समय से गुजर रहा है… जिससे देश को बचाने और अपने बड़े हितों को सुरक्षित करने के लिए कठिन निर्णय लेने में झिझक या देरी की कोई गुंजाइश नहीं है।" कुवैत में विधायिका अन्य खाड़ी राजशाही में समान निकायों की तुलना में अधिक प्रभाव रखती है, और दशकों से राजनीतिक गतिरोध के कारण कैबिनेट में फेरबदल और संसद को भंग करना पड़ा है।

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भाई के निधन के बाद कुवैत के नये अमीर बने थे शेख मिशाल

शेख मिशाल अल-अहमद अल-सबह पिछले दिसंबर में कुवैत के नये अमीर घोषित किए गए थे। उनसे पहले उनके भाई शेख नवाफ अल-अहमद अल-सबह वहां के अमीर थे। उनके निधन के बाद उनको नया अमीर घोषित किया गया था। हालांकि क्राउन प्रिंस के रूप में 2021 से कुवैत पर असली शासन वे ही कर रहे थे। शेख नवाफ ने अपनी गिरती सेहत के चलते अपनी सारी जिम्मेदारी उनको सौंप दी थी। कुवैत के संविधान के तहत, अमीर के काम करने में अक्षम होने जाने पर क्राउन प्रिंस ही जिम्मेदारी संभालते हैं।

कुवैत दुनिया में तेल से भरपूर है और भारी धन कमाता है। इधर कुछ सालों से देश घरेलू राजनीतिक संकटों और टकरावों से परेशान रहा। देश में नागरिकों के लिए कल्याकारी कार्यों में आ रही एक बड़ी वजह थी। इसके चलते सरकार कर्ज नहीं ले पा रही थी। हालांकि देश के अपने तेल भंडार से भारी मुनाफा होता है, लेकिन सरकारी खजाने में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं बचे थे। कुवैत में भी दूसरे अरब देशों की तरह राजतंत्र है, लेकिन यहां की संसद पड़ोसी देशों से ज्यादा शक्तिशाली रही है।

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