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अरुणाचल प्रदेश में नाम बदलने पर ड्रैगन अड़ा, चीनी दावे पर भारत ने कही यह बात

पिछले हफ्ते मोदी की यात्रा का बीजिंग द्वारा विरोध किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था, “चीन जितनी बार चाहे अपने निराधार दावों को दोहरा सकता है। इससे स्थिति बदलने वाली नहीं है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।”
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: April 02, 2024 11:58 IST
अरुणाचल प्रदेश में नाम बदलने पर ड्रैगन अड़ा  चीनी दावे पर भारत ने कही यह बात
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चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में स्थानों का नाम बदलने पर मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता, रणधीर जयसवाल ने कहा: "चीन भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश में स्थानों का नाम बदलने के अपने मूर्खतापूर्ण प्रयासों पर कायम है। हम इस तरह के प्रयासों को दृढ़ता से अस्वीकार करते हैं। मनगढ़ंत नाम निर्दिष्ट करने से यह वास्तविकता नहीं बदलेगी कि अरुणाचल प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है, रहा है और हमेशा रहेगा।"

चीन राज्य को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र का हिस्सा बताता है

भारत ने अतीत में स्थानों के नाम बदलने को बार-बार अस्वीकार करता रहा है और अरुणाचल पर चीन के दावों को खारिज कर चुका है। बीजिंग का दावा है कि यह तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के दक्षिणी क्षेत्र का हिस्सा है, जिसे "ज़गनन (Zagnan)" कहा जाता है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बोले- चीन का दावा निराधार

पिछले हफ्ते मोदी की यात्रा का बीजिंग द्वारा विरोध किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा था, “चीन जितनी बार चाहे अपने निराधार दावों को दोहरा सकता है। इससे स्थिति बदलने वाली नहीं है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।”

उन्होंने कहा था कि नामों में बदलाव का भारतीय राज्य के स्थानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन यह दो हिमालयी पड़ोसियों के बीच संबंधों की स्थिति का एक संकेतक है। बीजिंग ने आखिरी बार अप्रैल 2023 में चीनी नक्शों पर चीनी अक्षरों, तिब्बती और पिनयिन, जो मंदारिन अक्षरों का मानक रोमानीकरण है, का उपयोग करके अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों के नामों को बदला था। इससे पहले चीन ने अप्रैल 2017 और दिसंबर 2021 में भारतीय राज्य में स्थानों का नाम बदल दिया था।

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सरकारी ग्लोबल टाइम्स टैबलॉयड ने फिर नाम बदलने पर सरकारी नोटिस का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी, “1 मई, 2024 से प्रभावी होने के लिए कार्यान्वयन के उपाय अनुच्छेद 13 में निर्धारित हैं कि विदेशी भाषाओं में नाम चीन के क्षेत्रीय दावों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और संप्रभुता अधिकारों को बिना अनुमति के सीधे तौर पर कोट या अनुवादित नहीं किया जाएगा।''

इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीन के दावे को नकार चुके हैं। सोमवार को एस. जयशंकर ने गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स में बोलते हुए कहा था कि काल्पनिक नाम रखने से इस वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं आएगा। एस जयशंकर ने कहा कि अगर आज मैं आपके घर का नाम बदल लूं तो वो मेरा घर नहीं हो जाता है।

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