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चाइनीज स्कैमर्स भारतीय लड़कियों को न्यूड कॉल करने के लिए कर रहे विवश? कंबोडिया में 3 हजार से करवा रहे गुलामों की तरह काम

Fake Nude Calls Scam: कंबोडिया में चीनी साइबर क्रिमिनल्स ने बड़ी संख्या में भारतीयों को बंधक बनाया हुआ है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Yashveer Singh
Updated: July 09, 2024 14:53 IST
चाइनीज स्कैमर्स भारतीय लड़कियों को न्यूड कॉल करने के लिए कर रहे विवश  कंबोडिया में 3 हजार से करवा रहे गुलामों की तरह काम
चीन के साइबर अपराधी कंबोडिया से करवाते हैं न्यूज कॉल (Vecteezy Image)
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Fake Nude Calls Scam: फेक न्यूज कॉल्स के बाद ब्लैकमेलिंग के कई मामले सामने आने के बाद लोगों में इनको लेकर जागरुकता बढ़ी है। अब टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में ऐसी कॉल्स से जुड़ा एक बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंबोडिया भेजी गईं कई भारतीय महिलाओं से चाइनीच साइबर क्रिमिनल जबरन हनी ट्रैपिंग करवा रहे हैं। चाइनीज साइबर क्रिमिनल भारतीय महिलाओं को जबरन भारत में न्यूज कॉल्स करने के लिए विवश करते हैं।

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रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मोडस ऑपरेंडी का भंडाफोड़ तेलंगाना के एक निवासी मुंशी प्रकाश द्वारा किया गया। मुंशी खुद चाइनीज फ्रॉड का शिकार हुए थे। सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक ग्रेजुएट मुंशी प्रकाश हैदराबाद की एक आईटी कंपनी के साथ काम करते थे। उन्होंने जॉब साइट्स पर विदेश में नौकरी की तलाश में अपनी प्रोफाइल पोस्ट की थी।

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मुंशी प्रकाश ने बताया कि एक दिन कंबोडिया से एक एजेंट विजय ने मुझे कॉल किया और ऑस्ट्रेलिया में जॉब ऑफर की। मुंशी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विजय ने  उनसे कहा कि उसे ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले उनकी ट्रेवल हिस्ट्री चाहिए और इसलिए उसने उन्हें मलेशिया के टिकट दिए। मुंशी प्रकाश तेलंगाना के महबूबाबाद के बय्याराम मंडल के मूल निवासी हैं।

उन्होंने बताया, "कुआलालंपुर से मुझे 12 मार्च को नोम पेन्ह ले जाया गया। विजय के एक लोकल प्रतिनिधि ने मुझसे 85,000 रुपये के अमेरिकी डॉलर लिए। फिर, चीन के नागरिकों ने मेरा पासपोर्ट जब्त कर लिया और मुझे क्रोंग बावेट ले गए। यह टावरों वाला एक बड़ा परिसर है। मुझे अन्य भारतीयों के साथ टावर C में रखा गया। हमें तेलुगु और अन्य भाषाओं में लड़कियों के नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने और उनका इस्तेमाल करने के लिए 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया।"

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मुंशी प्रकाश ने बताया कि चीन के लोगों ने उन्हें एक हफ्ते तक अंधेरे कमरे में रखा और टॉर्चर किया। उन्होंने कहा, "जब मैं बीमार हो गया तो उन्होंने मुझे बाहर निकाला लेकिन वे मुझे स्कैम करने के लिए मजबूर करते रहे। मैं किसी तरह अपनी सेल्फी वीडियो रिकॉर्ड करने में सफल हुआ, जिसमें मैंने अपने दर्दनाक अनुभव बताए। मैंने तमिलनाडु में रह रही अपनी बहन को एक ईमेल भेजा, उन्होंने ही प्रशासन को इसकी जानकारी दी।"

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जानकारी मिलने पर हरकत में आई सरकार

मुंशी प्रकाश की बहन द्वारा प्रशासन को जानकारी देने पर भारतीय दूतावास हरकत में आया और वहां से उन्हें रेस्क्यू किया गया। प्रकाश को 16 अप्रैल को कंबोडिया की पुलिस द्वारा तस्करों से रेस्क्यू किया गया लेकिन चीनी गैंग द्वारा उनपर फर्जी केस करने के बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया। उन्हें 12 दिन जेल में बिताने पड़े। प्रकाश ने बताया कि जब वहां के प्रशासन ने पाया कि आरोप फर्जी हैं, तब उन्हें पांच जुलाई को दिल्ली डिपोर्ट किया गया।

मुंशी प्रकाश के साथ नौ अन्य लोगों को भी रेस्क्यू किया गया था। उन्होंने बताया कि कंबोडिया में करीब तीन हजार भारतीय फंसे हुए हैं। इनमें बहुत सारे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से हैं। इनमें लड़कियां भी शामिल हैं, जो डिटेंशन कैंप से न्यूज कॉल करने के लिए मजबूर हैं। प्रकाश वहां केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, मुंबई और दिल्ली के लोगों से मिले। इन सभी को विदेश में नौकरी के नाम पर धोखे से वहां लाया गया। लोगों के साथ गलत हरकतें कर जो पैसा ये चीनी गैंग बनाते हैं, उसे पहले क्रिप्टोकरेंसी में, फिर अमेरिकी डॉलर में और आखिर में चीनी युआन में बदला जाता है।

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