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बॉबी देओल ने कुछ इस तरह सेलिब्रेट किया अपना बर्थडे, फैंस के लिए बने ‘एनिमल’ के अबरार

Qatesting और 1967 में यहां से लोकसभा पहुंची थीं। लेकिन कई दशक से फूलपुर से कांग्रेस पार्टी को जीत नहीं मिल रही है। 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद अंतिम बार 1984 में रामपूजन पटेल यहां से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे।
Written by: qatesting , deepakrohilla
नई दिल्ली | Updated: February 22, 2024 15:37 IST
बॉबी देओल ने कुछ इस तरह सेलिब्रेट किया अपना बर्थडे  फैंस के लिए बने ‘एनिमल’ के अबरार
Qatesting
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और 1967 में यहां से लोकसभा पहुंची थीं। लेकिन कई दशक से फूलपुर से कांग्रेस पार्टी को जीत नहीं मिल रही है। 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद अंतिम बार 1984 में रामपूजन पटेल यहां से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे।

हाईकोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय, नेहरू का पैतृक आवास यहीं है

फूलपुर ‘बुद्धिजीवियों का क्षेत्र’ कहा जाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट, ट्रिपलआईटी, रेलवे का नार्थ सेंट्रल जोन (NCR), इलाहाबाद विश्वविद्यालय, यूपी लोकसेवा आयोग (UP Public Service Commission), इलाहाबाद का मेडिकल कॉलेज, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), पॉलिटेक्निक, कई बड़ी कोचिंग संस्थाएं यहीं हैं। चंद्रशेखर आजाद का शहीद स्थल अल्फ्रेड पार्क जिसे कंपनी बाग भी कहते हैं, और पुरानी विधानसभा, इलाहाबाद संग्रहालय, शहर का कमिश्नरी, पुलिस कमिश्नर समेत तमाम प्रशासनिक कार्यालय इसी क्षेत्र में है। इसलिए इसे ‘बुद्धिजीवियों का क्षेत्र’ कहा जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि नेहरू-गांधी परिवार का पैतृक आवास आनंद भवन, कांग्रेस का पुराना राष्ट्रीय कार्यालय स्वराज भवन भी फूलपुर संसदीय क्षेत्र में पड़ता है। बुद्धिजीवी वर्ग आजादी के आंदोलन के समय से ही कांग्रेस का पक्का समर्थक माना जाता था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद से फिर कभी कांग्रेस यहां के मतदाताओं का दिल नहीं जीत सकी।

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और 1967 में यहां से लोकसभा पहुंची थीं। लेकिन कई दशक से फूलपुर से कांग्रेस पार्टी को जीत नहीं मिल रही है। 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद अंतिम बार 1984 में रामपूजन पटेल यहां से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे।

हाईकोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय, नेहरू का पैतृक आवास यहीं है

फूलपुर ‘बुद्धिजीवियों का क्षेत्र’ कहा जाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट, ट्रिपलआईटी, रेलवे का नार्थ सेंट्रल जोन (NCR), इलाहाबाद विश्वविद्यालय, यूपी लोकसेवा आयोग (UP Public Service Commission), इलाहाबाद का मेडिकल कॉलेज, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), पॉलिटेक्निक, कई बड़ी कोचिंग संस्थाएं यहीं हैं। चंद्रशेखर आजाद का शहीद स्थल अल्फ्रेड पार्क जिसे कंपनी बाग भी कहते हैं, और पुरानी विधानसभा, इलाहाबाद संग्रहालय, शहर का कमिश्नरी, पुलिस कमिश्नर समेत तमाम प्रशासनिक कार्यालय इसी क्षेत्र में है। इसलिए इसे ‘बुद्धिजीवियों का क्षेत्र’ कहा जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि नेहरू-गांधी परिवार का पैतृक आवास आनंद भवन, कांग्रेस का पुराना राष्ट्रीय कार्यालय स्वराज भवन भी फूलपुर संसदीय क्षेत्र में पड़ता है। बुद्धिजीवी वर्ग आजादी के आंदोलन के समय से ही कांग्रेस का पक्का समर्थक माना जाता था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद से फिर कभी कांग्रेस यहां के मतदाताओं का दिल नहीं जीत सकी।

और 1967 में यहां से लोकसभा पहुंची थीं। लेकिन कई दशक से फूलपुर से कांग्रेस पार्टी को जीत नहीं मिल रही है। 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद अंतिम बार 1984 में रामपूजन पटेल यहां से कांग्रेस के टिकट पर सांसद बने थे।

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हाईकोर्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय, नेहरू का पैतृक आवास यहीं है

फूलपुर ‘बुद्धिजीवियों का क्षेत्र’ कहा जाता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट, ट्रिपलआईटी, रेलवे का नार्थ सेंट्रल जोन (NCR), इलाहाबाद विश्वविद्यालय, यूपी लोकसेवा आयोग (UP Public Service Commission), इलाहाबाद का मेडिकल कॉलेज, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), पॉलिटेक्निक, कई बड़ी कोचिंग संस्थाएं यहीं हैं। चंद्रशेखर आजाद का शहीद स्थल अल्फ्रेड पार्क जिसे कंपनी बाग भी कहते हैं, और पुरानी विधानसभा, इलाहाबाद संग्रहालय, शहर का कमिश्नरी, पुलिस कमिश्नर समेत तमाम प्रशासनिक कार्यालय इसी क्षेत्र में है। इसलिए इसे ‘बुद्धिजीवियों का क्षेत्र’ कहा जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि नेहरू-गांधी परिवार का पैतृक आवास आनंद भवन, कांग्रेस का पुराना राष्ट्रीय कार्यालय स्वराज भवन भी फूलपुर संसदीय क्षेत्र में पड़ता है। बुद्धिजीवी वर्ग आजादी के आंदोलन के समय से ही कांग्रेस का पक्का समर्थक माना जाता था, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद से फिर कभी कांग्रेस यहां के मतदाताओं का दिल नहीं जीत सकी।

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