scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

'गर्म लकड़ी, माचिस की तीलियों से जलाये...', यूक्रेन से युद्ध नहीं करने पर रूसी एजेंट ने दी हरियाणा के युवकों को यातना

मॉस्को के एक वकील ने युवकों को जेल से बाहर निकलने और घर लौटने में मदद की। उन्होंने बताया कि रूसी वकील ने अपने काम के लिए 6 लाख रुपये लिए थे।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: March 30, 2024 14:50 IST
 गर्म लकड़ी  माचिस की तीलियों से जलाये      यूक्रेन से युद्ध नहीं करने पर रूसी एजेंट ने दी हरियाणा के युवकों को यातना
रूस में फंसे युवकों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाली और बचाव की गुहार लगाई। (फोटो- वीडियो स्क्रीनग्रैब)
Advertisement

रूस में काम कर रहे कई फर्जी इमीग्रेशन एजेंट अफसरों की मदद से दक्षिण एशियाई देशों के युवकों को तमाम तरह के लालच देकर सेना में जबरन शामिल करने के लिए दबाव बना रहे हैं। जो युवक ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें फर्जी केस में जेलों में डाला जा रहा है। इन युवकों को बिना खाना-पानी के बुरी तरह पिटाई भी की जा रही है। वहां से किसी तरह बच कर आए हरियाणा के दो चचेरे भाइयों ने मीडिया को बताया कि इमीग्रेशन एजेंटों के कैंपों में भारत समेत विभिन्न देशों के करीब दो सौ लोग हैं। इनमें से ज्यादातर दक्षिण एशिया के लोग हैं। ये एजेंट रूस और बेलारूस की सीमा पर जंगलों में अपने कैंप लगाए हैं। दोनों भाइयों ने दावा किया कि फिर ये एजेंट उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर करते हैं।

जर्मनी में नौकरी देने के बहाने धोखे से ले गये थे दलाल

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मुकेश (21) और सनी (24) नाम के दो चचेरे भाइयों ने कहा कि उन्हें धोखे से जर्मनी के बजाय बैंकॉक भेज दिया गया, जहां उन्हें एक होटल में नौकरी देने का वादा किया गया था। फिर बैंकॉक से उन्हें बेलारूस ले जाया गया और वहां से वे सीमावर्ती जंगलों के माध्यम से रूस में प्रवेश कर गए। वहां कैंप स्थापित किए गए थे। रूस में ये तथाकथित इमीग्रेशन एजेंट पहले इन दक्षिण एशियाई पुरुषों को रूसी वर्क परमिट, रूसी दुल्हन और यहां तक कि सेना में शामिल होने पर रूसी पासपोर्ट की पेशकश करके लुभाने की कोशिश करते हैं।

Advertisement

बर्फ पर लिटाकर बंदूकों और चाकू से पीटते थे

बाद में ये उन्हें यूक्रेन के खिलाफ लड़ने को कहते हैं। दोनों भाइयों ने अपने पूरे शरीर पर बुरी तरह पिटाई के निशान दिखाते हुए दावा किया कि उन्हें इन कैंपों में 15 दिनों तक भूखा, प्यासा रखा गया और शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया। युवकों ने बताया, "वे लोग हमें गर्म लकड़ी और माचिस की तीलियों से जलाये, बर्फ पर लिटाये, बंदूकें और चाकू से पीटे।"

एजेंटों ने धमकी दी कि यूक्रेन के खिलाफ सेना में शामिल नही होने पर वैध यात्रा परमिट के बिना रूस में प्रवेश करने के आरोप में रूस के जेल में डाल दिया जाएगा। वहां से 10 साल नहीं छूट पाओगे।

Advertisement

मॉस्को के एक वकील ने उन्हें जेल से बाहर निकलने और घर लौटने में मदद की। उन्होंने बताया कि रूसी वकील ने अपने काम के लिए 6 लाख रुपये लिए थे। वकील ने उन्हें बताया कि उनके देश में पेरोल पर इमीग्रेशन एजेंट हैं। मॉस्को के वकील ने बताया कि जब ये एजेंट दूसरे देशों के युवाओं को यूक्रेन से लड़ने के लिए रूसी सेना में शामिल कराते हैं तो बदले में इन एजेंटों को 2 लाख रुपये तक मिलते हैं। मुकेश और सनी को जर्मनी भेजने के असफल प्रयासों पर उनके परिवारों ने क्रमशः 35 लाख रुपये और 25 लाख रुपये खर्च किए।

Advertisement

Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो