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पाकिस्तान के दूसरे सबसे बड़े एयरबेस पर हमला, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली जिम्मेदारी

बीएलए का दावा है कि उसके सदस्यों ने एयरबेस में उस जगह सेंध लगाई, जहां कथित तौर पर चीनी ड्रोन तैनात हैं।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: March 26, 2024 09:52 IST
पाकिस्तान के दूसरे सबसे बड़े एयरबेस पर हमला  बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली जिम्मेदारी
पाकिस्तान के एयरबेस पर हमला। (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)
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पाकिस्तान के दूसरे सबसे बड़े एयरबेस पर हमला हुआ है। एयरबेस पीएनएस सिद्दीकी पर मंगलवार सुबह बमबारी और गोलीबारी हुई है। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है। चीनी निवेश के विरोध का हवाला देते हुए बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने तुरबत में नौसेना के एयरबेस पर हमले की जिम्मेदारी ली है। बीएलए का दावा है कि उसके सदस्यों ने एयरबेस में उस जगह सेंध लगाई, जहां कथित तौर पर चीनी ड्रोन तैनात हैं।

तुरबत के टीचिंग हॉस्पिटल में घोषित की गई इमरजेंसी

हमले के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने टीचिंग हॉस्पिटल (तुरबत) में इमरजेंसी घोषित कर दी। सभी डॉक्टरों को तुरंत ड्यूटी पर आने के लिए कहा गया है। बीएलए के माजिद ब्रिगेड ने इस हमले को अंजाम दिया। यह BLA द्वारा इस हफ्ते का दूसरा और इस साल का तीसरा हमला है। इससे पहले BLA ने 29 जनवरी को माच शहर और 20 मार्च को ग्वादर में सैन्य खुफिया मुख्यालय को निशाना बनाया था।

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एयरबेस पर हमले के बाद सुरक्षाकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई हैं और लगातार पेट्रोलिंग जारी है। पाकिस्तान की सेना BLA की मजीद ब्रिगेड के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। अभी तक इस मामले पर पाकिस्तानी सेना या सरकार की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

एक हफ्ते पहले ग्वादर में हुआ था अटैक

ग्वादर में सैन्य खुफिया मुख्यालय पर हमले के दौरान पोर्ट अथॉरिटी कॉम्प्लेक्स में विस्फोट और गोलीबारी हुई थी। इस कारण दो पाकिस्तानी सैनिकों और आठ आतंकवादियों की जान भी चली गई थी। पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस ने कहा था कि पोर्ट अथॉरिटी कॉलोनी में घुसपैठ करने की आतंकवादियों की कोशिश को सुरक्षा बलों ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया।

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चीन द्वारा प्रबंधित ग्वादर बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें प्रमुख बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। पाकिस्तान के मीडिया ग्रुप डॉन की रिपोर्ट के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान द्वारा नवंबर 2022 में सरकार के साथ अपने संघर्ष विराम को समाप्त करने के बाद पाकिस्तान (विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा) और बलूचिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

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