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रूस की मदद करने पर अमेरिका ने चीन को दी कड़ी चेतावनी, जानें ड्रैगन से तनाव की वजह

बीते साल दोनों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था, जिसके बाद दोनों देश अपने रिश्तों में नरमी लाने की कोशिश कर रहे हैं और दोनों के बीच बातचीत और कूटनीतिक कोशिशें बढ़ी हैं।
Written by: जनसत्ता
नई दिल्ली | Updated: April 30, 2024 14:30 IST
रूस की मदद करने पर अमेरिका ने चीन को दी कड़ी चेतावनी  जानें ड्रैगन से तनाव की वजह
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शुक्रवार 26 अप्रैल 2024 को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। (AP Photo)
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने चेतावनी दी है कि अगर चीन ने यूक्रेन के खिलाफ हमले में रूस की मदद करना बंद नहीं किया तो अमेरिका चीन के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। अमेरिका का आरोप है कि चीन जो सामान रूस को देता है, उसका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है। एक साक्षात्कार में ब्लिंकन ने कहा कि उन्होंने चीन के अपने समकक्ष को ये स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा करके वह ‘शीत युद्ध’ के बाद यूरोप की सुरक्षा के लिए सबसे बड़े खतरे की मदद कर रहा है। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि अमेरिका चीन के खिलाफ किस तरह के कदम उठा सकता है। इसके साथ ब्लिंकन ने इस बात की तरफ भी इशारा किया है कि अमेरिका कुछ मामलों में आगे बढ़ा है।

नशीले पदार्थ अमेरिका पहुंचने से रोकने की कोशिशों को सराहा भी

उन्होंने फेंटानिल नाम के नशीले पदार्थ को अमेरिका पहुंचने से रोकने में चीन की कोशिशों की तारीफ की। अमेरिका के लिए उसकी जमीन तक पहुंचने वाले इस नशीले पदार्थ की आपूर्ति का चीन सबसे बड़ा स्रोत है। अमेरिका में ये इतना बड़ा मुद्दा है कि वाइट हाउस ने कहा था कि इसके कारण देशभर में सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है।

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बीते 10 महीनों में अमेरिकी विदेश मंत्री का ये दूसरा चीन दौरा था

ब्लिंकन ने ईरान के साथ चीन के रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि चीन इसका इस्तेमाल इजराइल के साथ ईरान के तनाव को कम करने के लिए कर सकता है। उन्होंने कहा- मुझे लगता है कि मध्यपूर्व में चीन सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। ब्लिंकन 24 से 26 अप्रैल तक तीन दिन के दौरे पर चीन पहुंचे थे। बीते 10 महीनों में ब्लिंकन का ये दूसरा चीन दौरा था। बीते साल दोनों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था, जिसके बाद दोनों देश अपने रिश्तों में नरमी लाने की कोशिश कर रहे हैं और दोनों के बीच बातचीत और कूटनीतिक कोशिशें बढ़ी हैं।

बीते साल ताइवान पर चीन के दावे से दोनों देशों में तनाव बढ़ा था

मालूम हो कि बीते साल ताइवान पर चीन के दावे और दक्षिण चीन सागर में चीन के पैर पसारने की कोशिशों को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया था। पहले से जारी कई प्रतिबंधों के बीच अमेरिका ने चीन को निर्यात किए जाने वाले अत्याधुनिक कृत्रिम मेधा चिप के निर्यात पर भी पाबंदी लगी दी थी। इससे पहले बीते साल की शुरुआत में अमेरिका के आसमान में दिखे चीन के कथित जासूसी गुब्बारे को लेकर दोनों के बीच विवाद गहरा गया था। अमेरिका ने इन्हें जासूसी करने वाले गुब्बारे कहते हुए इन्हें लड़ाकू विमानों से मिसाइल छोड़कर उड़ा दिया था।

हालांकि चीन का कहना था कि ये मौसम की जानकारी लेने के लिए छोड़े गए बलून थे, जो हवा के कारण रास्ता भटककर अमेरिका की तरफ चले गए थे, लेकिन इस मामले को लेकर तनाव इतना बढ़ गया कि फरवरी में हुई इस घटना के बाद उसी महीने होने वाले एंटनी ब्लिंकन के चीन दौरे को टालना पड़ा था। उधर, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से कहा है कि चीन के मामले में अमेरिका को सीमा नहीं लांघनी चाहिए।

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उन्होंने कहा कि अमेरिका को चीन की बनाई रेखा पार नहीं करनी चाहिए। उन्होंने ये माना कि दोनों मुल्कों के रिश्ते अब स्थिर होने की तरफ बढ़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अभी भी नकारात्मक कारक मौजूद हैं, जो इस रिश्ते की परीक्षा ले रहे हैं।

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