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World Kidney Day 2024: 30 की उम्र के बाद नहीं डैमेज होगी किडनी, बस समय-समय पर कराएं ये 5 टेस्ट

World Kidney Day 2024: अगर हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या फिर किडनी संबंधी बीमारियों की जेनेटिक हिस्ट्री है, तो समय-समय पर टेस्ट जरूर कराना चाहिए, जिससे समय रहते किडनी को डैमेज होने से बचाया जा सके।
Written by: Shivani Singh
नई दिल्ली | Updated: March 14, 2024 10:42 IST
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World Kidney Day 2024: किडनी को हेल्दी रखने के लिए सम.-समय पर कराएं ये टेस्ट (PC-Freepik)
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World Kidney Day 2024: किडनी हमारे शरीर का बेहद जरूरी अंग है। किडनी ही हमारे शरीर में मौजूद विषाक्त तत्वों को यूरिन के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करती है। इसलिए किडनी के स्वास्थ्य का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। कई बार ऐसा होता है कि किडनी संबंधी कोई रोग हो जाता है लेकिन नॉर्मल लक्षण होने के कारण अधिकतर उन्हें इग्नोर कर देते हैं। लेकिन समय के साथ ये आपकी किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। ऐसे में किडनी डायलिसिस या फिर ट्रांसप्लांट की नौबत आ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते किडनी को बीमारी को पहचान लिया जाएं। ऐसे में कुछ मेडिकल टेस्ट कारगर साबित हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, 30 से 40 की उम्र में हर एक व्यक्ति को साल में एक बार किडनी संबंधी कुछ टेस्ट अवश्य करना चाहिए, जिससे संभावित समस्याओं के बारे में समय रहते पता करके उसका उपचार कर सकते हैं। आइए विश्व किडनी दिवस (World Kidney Day) के मौके पर न्यूबर्ग अजय शाह प्रयोगशाला के प्रबंध निदेशक डॉ. अजय शाह से जानें उन टेस्ट के बारे में जिन्हें 30 साल की उम्र के बाद अवश्य करा लेना चाहिए।

ब्लड प्रेशर टेस्ट (Blood Pressure Test)

उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) किडनी की बीमारी का एक प्रमुख कारण है। नियमित रक्तचाप जांच से उच्च रक्तचाप की शीघ्र पहचान करने में मदद मिल सकती है, क्योंकि अक्सर इसके कोई लक्षण नहीं होते हैं। लगातार हाई ब्लड प्रेशर रहने से समय बीतने के साथ किडनी को नुकसान हो सकता है, जिससे क्रोनिक किडनी रोग (Chronic Kidney Disease) जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

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सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट (Serum Creatinine Test)

सीरम क्रिएटिनिन मांसपेशियों के चयापचय द्वारा सृजित और गुर्दे द्वारा फ़िल्टर किया गया एक अपशिष्ट उत्पाद है। रक्त में सीरम क्रिएटिनिन का ऊंचा स्तर गुर्दे द्वारा खराब कार्यप्रणाली करने का संकेत दे सकता है। एक साधारण रक्त परीक्षण सीरम क्रिएटिनिन स्तर को माप सकता है और गुर्दे की कार्यप्रणाली का आकलन कर सकता है।

अनुमानित ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर (GFR)

ईजीएफआर (Glomerular Filtration Rate) सीरम क्रिएटिनिन के स्तर, आयु, लिंग और नस्ल पर आधारित एक गणना है। इसमें यह अनुमान मिलता है कि किडनी रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को किस तरह फ़िल्टर कर रहे हैं। कम ईजीएफआर किडनी की कार्यक्षमता में कमी का संकेत देता है और किडनी का रोग होने का संकेत दे सकता है।

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यूरिनलिसिस (Urinalysis)

यूरिनलिसिस में किडनी के स्वास्थ्य के विभिन्न मार्गों, जैसे प्रोटीन, रक्त और अन्य असामान्यताओं के लिए मूत्र के नमूने का परीक्षण करना शामिल है। प्रोटीनुरिया (यूरीन में प्रोटीन की उपस्थिति) और हेमाट्यूरिया (यूरीन में रक्त) किडनी की क्षति के सामान्य लक्षण हैं और अंतर्निहित गुर्दे की बीमारी का संकेत दे सकते हैं।

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यूरिन एल्ब्यूमिन-टू-क्रिएटिनिन अनुपात (ACR)

एसीआर एक विशिष्ट परीक्षण है जो मूत्र में एल्ब्यूमिन (एक प्रकार का प्रोटीन) और क्रिएटिनिन के अनुपात को मापता है। इसका उपयोग मूत्र में थोड़ी मात्रा में प्रोटीन (माइक्रोएल्ब्यूमिन्यूरिया) का पता लगाने के लिए किया जाता है, जो कि किडनी के डैमेज का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। उन लोगों के लिए ज्यादा जो मधुमेह या उच्च रक्तचाप से ग्रस्त है।

किडनी इमेजिंग

अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई जैसे इमेजिंग परीक्षण, गुर्दे और यूरीन मार्ग की विस्तृत छवियां सृजित कर सकते हैं। ये परीक्षण संरचनागत असामान्यताओं, किडनी की पथरी, सिस्ट, ट्यूमर या अन्य बीमारियों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, जो किडनी के कार्य को प्रभावित कर सकते हैं। आनुवंशिक परीक्षण कराते हैं। पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) या एलपोर्ट सिंड्रोम जैसे रोग किडनी के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

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