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Mothers Day 2024: मदर्स डे के मौके पर निभाएं अपनी जिम्मेदारी, अपनी मां को गिफ्ट में दें ये 6 हेल्थ चेकअप

Mother's Day 2024: हृदय के स्वास्थ्य से लेकर हार्मोनल संतुलन करन के लिए नियमुत रूप से ब्लड टेस्ट कराना बेहद जरूरी है। आप भी मदर्स डे के मौके पर अपनी मां के कराएं ये मेडिकल टेस्ट
Written by: Shivani Singh
नई दिल्ली | Updated: May 14, 2024 13:54 IST
mothers day 2024  मदर्स डे के मौके पर निभाएं अपनी जिम्मेदारी  अपनी मां को गिफ्ट में दें ये 6 हेल्थ चेकअप
मदर्स डे के मौके पर अपनी मां के कराएं ये ब्लड टेस्ट (PC-fREEPIK)
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Mother's Day 2024: जब बात मां की आती हैं, तो वह खुद को भूलकर परिवार की देखरेख सबसे जरूरी मानती है। दिनभर घर के कामों में लिप्त रहने से लेकर किसे क्या पसंद है मैं इतना खो जाती है कि वह ये भी भूल जाती है कि वह स्वयं क्या है? घर में बच्चे हो या फिर कोई अन्य सदस्य बीमार पड़ जाए, तो कई रातें जगकर उसकी सेवा करती हैं, जिससे वह फिर से दुरस्त हो जाए। ऐसे में जब खुद की सेहत की बात आती है, तो वह इसे इग्नोर कर देत है। सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं को यूं ही इग्नोर कर देती है कि थोड़े दिन में सही हो जाएगा। लेकिन कई बार ऐसी बीमारियों उन्हें शिकार बना लेती है जिसके बारे में समय से न पता चलने में मौत के मुंह तक चली जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि वो नहीं तो आप अपनी मां के सेहत का पूरा ख्याल रखें। समय-समय पर रुटीन चेकअप के साथ-साथ इन ब्लड टेस्ट को जरूर कराते रहें, जिससे दिल हेल्दी रहने से लेकर हार्मोनल बदलाव की भी खबर आपको रहें। तो फिर देर किस बात की इस मदर्स डे (Mothers Day) पर आप भी अपनी मां का कराएं ये ब्लड टेस्ट और उन्हें दें एक प्यारी सी लाइफ। आइए न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स के सलाहकार रोगविज्ञानी डॉ. आकाश शाह से जानते हैं...

लिपिड पैनल (Lipid profile)

लिपिड पैनल रक्त में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को मापता है, जिससे हृदय के स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जो माताओं के लिए बड़ी चिंता का सबब हो जाती है। लिपिड स्तर की निगरानी करने से हृदय से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान करने में मदद मिलती है तथा इस तरह शीघ्र उपचार-कार्रवाई की जा सकती है जो जीवनशैली में बदलाव करके और यदि आवश्यक हो, तो दवा के जरिए किया जा सकता है।

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कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)

सीबीसी लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स सहित विभिन्न रक्त कोशिकाओं की मात्रा और गुणवत्ता के बारे में जानकारी देता है। सीबीसी मापदंडों में हुआ कोई परिवर्तन मुख्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे एनीमिया, संक्रमण या रक्त विकारों का संकेत दे सकता है। माताओं के लिए, विशेषकर बढ़ी हुई शारीरिक और भावनात्मक मांगों के समय में सम्पूर्ण स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर के लिए इष्टतम रक्त कोशिका संख्या बनाए रखना आवश्यक है।

थायराइड फंक्शन टेस्ट (Thyroid Profile Test)

थायराइड फ़ंक्शन का परीक्षण चयापचय, ऊर्जा स्तर और मूड को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाने वाली थायरॉयड ग्रंथि की क्षमता का मूल्यांकन करता है। थायराइड विकार, जैसे हाइपोथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म महिलाओं में आम तौर पर पाए जाते हैं, खासकर बच्चे के जन्म के बाद। थायराइड फ़ंक्शन की निगरानी से हार्मोनल संतुलन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है, जिससे थकान, वजन में बदलाव और मूड में गड़बड़ी, जो मां के स्वास्थ्य और देखभाल करने की उसकी जिम्मेदारियों में बाधा डाल सकते हैं, जैसे लक्षणों को रोका जा सकता है।

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विटामिन डी का स्तर (Vitamin D)

विटामिन डी हड्डियों के स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा कार्य और मूड परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन डी की कमी विशेषकर उन माताओं में अधिक पाई जाती है, जो देखभाल करने की जिम्मेदारियों के चलते धूप में कम रहती हैं और सीमित आहार लेती हैं। विटामिन डी का कम स्तर  ऑस्टियोपोरोसिस, संक्रमण और अवसाद का जोखिम बढ़ने से जुड़ा है। मां के स्वास्थ्य और सम्पूर्ण तंदुरुस्ती के लिए विटामिन डी के स्तर का आकलन और इसे पर्याप्त स्तर पर रखना आवश्यक है।

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हार्मोनल पैनल (Hormonal Panel)

हार्मोनल पैनल ऐसे विभिन्न हार्मोनों के स्तर का मूल्यांकन करता है जो प्रजनन स्वास्थ्य, मूड और चयापचय को प्रभावित करते हैं। हार्मोनल असंतुलन, जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन में उतार-चढ़ाव गर्भावस्था, प्रसवोत्तर और रजोनिवृत्ति के दौरान हो सकता है, जो मूड, ऊर्जा के स्तर और सम्पूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। हार्मोन के स्तर की निगरानी करने से इन असंतुलनों की पहचान करने और उसका समाधान करने, मां के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद मिलती है।

कॉम्प्रीहेन्सिव मेटाबोलिक पैनल (CMP)

सीएमपी ग्लूकोज, इलेक्ट्रोलाइट्स तथा किडनी और लीवर फ़ंक्शन मार्करों के स्तर को मापता है, जो चयापचय स्वास्थ्य पर व्यापक नज़र डालता है। सीएमपी मापदंडों में हुआ कोई परिवर्तन मधुमेह, गुर्दे की बीमारी या यकृत की शिथिलता जैसे रोगों का संकेत दे सकता है, जो मां के स्वास्थ्य और आयुकाल को प्रभावित कर सकता है। चयापचय मार्करों की नियमित निगरानी से इन रोगों का शीघ्र पता लगाने और उपचार-प्रबंधन करने में मदद मिलती है, जिससे माताओं का समग्र स्वास्थ्य लाभान्वित होता है।

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