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Monkey Fever: कर्नाटक में बढ़ रहे 'मंकी फीवर' के मामले, दो लोगों की मौत, जानें क्या हैं इसके लक्षण और बचाव का तरीका

मंकी फीवर फ्लेविविरिडे फैमिली से संबंधित एक वायरस होता है, जिसे क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (Kyasanur Forest disease) भी कहते हैं।
Written by: हेल्थ डेस्क | Edited By: Shreya Tyagi
नई दिल्ली | Updated: February 05, 2024 13:54 IST
monkey fever  कर्नाटक में बढ़ रहे  मंकी फीवर  के मामले  दो लोगों की मौत  जानें क्या हैं इसके लक्षण और बचाव का तरीका
इसे आमतौर पर मंकी फीवर कहकर इसलिए बुलाया जाता है क्योंकि इसके कारण कई बंदरों की मौत हो गई थी। (P.C- Freepik)
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कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में 'मंकी फीवर' के मामलों में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कर्नाटक में अबतक मंकी फीवर के 49 मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा दो लोगों की मौत की जानकारी है। ऐसे में इस बीमारी ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आइए जानते हैं कि आखिर ये फीवर है क्या, इसकी चपेट में आने पर पीड़ित को किस तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, साथ ही इससे बचाव का तरीका क्या है-

क्या होता है मंकी फीवर?

मंकी फीवर दरअसल, फ्लेविविरिडे फैमिली से संबंधित एक वायरस होता है, जिसे क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (Kyasanur Forest disease) भी कहते हैं। ये किलनी के काटने से फैलता है। इसके अलावा इंसान इससे संक्रमित जानवर के संपर्क में आने पर भी मंकी फीवर का शिकार हो सकता है। पहली बार इस बुखार की पहचान साल 1957 में की गई थी। इसे आमतौर पर मंकी फीवर कहकर इसलिए बुलाया जाता है क्योंकि इसके कारण कई बंदरों की मौत हो गई थी, साथ ही किलनी आमतौर पर बंदरों पर जीवित रहते हैं।

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कैसे पहचाने लक्षण?

  • तेज बुखार आना
  • आंखों में सूजन और दर्द होना
  • अधिक ठंड लगना
  • मांसपेशियों में तेज दर्द और ऐंठन होना
  • शरीर में दर्द
  • सर्दी-खांसी होना
  • सिर में दर्द होना
  • उल्टी-मतली
  • ब्लीडिंग
  • प्लेटलेट्स का गिरना

क्या है बचाव का तरीका?

अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो बिना अधिक देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल मंकी फीवर से बचाव का एकमात्र तरीका इसका टीका है। ऐसे में जांच के बाद वैक्सीनेशन जरूर कराएं। खासकर इस बीमारी वाले क्षेत्र में रह रहे लोग समय-समय पर अपनी जांच करवाते रहें। मंकी फीवर की वैक्सीन की एक महीने में 2 डोज दी जाती हैं।

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इसके अलावा अपने आसपास साफ-सफाई का अधिक ध्यान रखें। किलनी से बचने के लिए हाथ-पैरों को कपड़ों से ढ़ककर रखें। खासकर घर से बाहर निकलते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें।

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Disclaimer: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

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