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Karan Johar: खुद को अजीब महसूस करते हैं करण जौहर, Body Dysmorphic Disorder से जूझ रहे हैं, जानिए इस बीमारी की ABCD

फिल्म निर्माता करण जौहर बॉडी डिस्मॉर्फिया से जूझ रहे हैं। इस बीमारी की वजह से मरीज अपनी बॉडी बनावट को लेकर कम्फर्ट नहीं रहता।
Written by: Shahina Noor
नई दिल्ली | Updated: July 06, 2024 15:09 IST
karan johar  खुद को अजीब महसूस करते हैं करण जौहर  body dysmorphic disorder से जूझ रहे हैं  जानिए इस बीमारी की abcd
बॉडी डिस्मॉर्फिया जिसे बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (BDD) भी कहा जाता है,ये एक मानसिक विकार है जो अपनी अपीयरेंस को लेकर चिंता पैदा करता है।(Photos- Karan Johar/Insta)
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karan johar suffering from body dysmorphia: फिल्म निर्माता करण जौहर ने हाल ही में अपनी सेहत के बारे में खुलासा किया है कि वो बचपन से ही बॉडी डिस्मॉर्फिया से जूझ रहे हैं। जौहर ने बताया कि उनको ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से वो अपनी बॉडी बनावट को लेकर कम्फर्ट नहीं रहते हैं। करण ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अपनी इस बीमारी के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि बॉडी डिस्मॉर्फिया की वजह से वो हमेशा अजीब महसूस करते है। वो अपनी बॉडी को छुपाने के लिए बड़े साइज के कपड़े पहनते हैं। वजन घटाने के बावजूद वो बॉडी की छवि वाले मुद्दे से जूझ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वो ऐसी बीमारी से जूझ रहे हैं जिसकी वजह से वो अपनी बॉडी को कपड़ों में छुपाना पसंद करते हैं। वो अपने दोस्तों के साथ पूल में जाने में भी परहेज करते हैं।

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अब सवाल ये उठता है कि एक कामयाब फिल्म मेकर ऐसी कौन सी बीमारी से बचपन से जूझ रहा है जिसका सामना उसे आज भी करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि बॉडी डिस्मॉर्फिया कौन सी बीमारी है जिससे करण जौहर जूझ रहे हैं। जिस बीमारी की वजह से वो खुद को लोगों को छुपाते हैं उस बीमारी का कारण और इलाज क्या है।

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बॉडी डिस्मॉर्फिया क्या है?

बॉडी डिस्मॉर्फिया जिसे बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (BDD) भी कहा जाता है,ये एक मानसिक विकार है जो अपनी अपीयरेंस को लेकर चिंता पैदा करता है। इस मानसिक विकार से पीड़ित इंसान ये महसूस करता है कि उसकी बॉडी के कुछ हिस्सों में खामियां हैं। हालांकि इस बीमारी से पीड़ित इंसान अपनी बॉडी में जो कमियां महसूस करता है जरुरी नहीं है कि दूसरा इंसान उन कमियों को देख सके। इस बीमारी से पीड़ित इंसान को मनोवैज्ञानिक कष्ट हो सकता है जो उसकी डेली लाइफ को प्रभावित कर सकता है। बॉडी डिस्मॉर्फिया एक ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD)से संबंधित है, लेकिन इसका अक्सर गलत निदान किया जाता है। अगर बचपन की समस्याओं को काउंसलिंग और थेरेपी के जरिए नहीं निपटाया जाता है तो ये परेशानी लम्बी उम्र तक पीछा नहीं छोड़ती।

बॉडी डिस्मॉर्फिया किसी को भी प्रभावित कर सकता है। यह आमतौर पर किशोरावस्था या प्रारंभिक वयस्कता के दौरान शुरू होता है। लिंग डिस्फोरिया उस मनोवैज्ञानिक संकट को दर्शाता है जो किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। यह कोई मानसिक विकार नहीं है,लेकिन इससे पीड़ित लोगों को उन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। डिस्मॉर्फिया एक ऐसी स्थिति से संबंधित है जिसमें शरीर का कोई हिस्सा सामान्य से अलग आकार का होता है।

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बॉडी डिस्मॉर्फिया के कारण

वेबएमडी की खबर के मुताबिक बॉडी डिस्मॉर्फिया का सटीक कारण जानना मुश्किल है लेकिन कुछ ऐसे कारण हैं जिन्हें इस बीमारी के लिए जिम्मेदार माना जाता है। बॉडी डिस्मॉर्फिया मानसिक स्वास्थ्य विकार वाले लोगों में होता है जैसे कि डिप्रेशन और चिंता करने वाले लोगों में ये बीमारी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी के लिए जीन भी जिम्मेदार हो सकता है। BDD के लिए बचपन में घटी कुछ घटनाएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं जैसे भावनात्मक संघर्ष जैसे धमकाना। लो सेल्फ स्टीम, पैरेंट्स और कुछ लोग जो पीड़ित की अलोचना करते हैं ये सब बॉडी डिस्मॉर्फिया के कारण हो सकते हैं।

बॉडी डिस्मॉर्फिया के लक्षण

  • बॉडी डिस्मॉर्फिया के लक्षणों की बात करें तो इस बीमारी से पीड़ित इंसान का बिहेवियर रिपिटेटिव और टाइम कंजूमिंग हो सकता है।
  • बार-बार शीशे में देखना, स्किन को नोचना, बॉडी में मौजूद खामियों को छुपाने की कोशिश करना।
  • अपने शरीर के अंगों की दूसरों से तुलना करना
  • दूसरों से ये आश्वासन लेना कि उनका दोष दिखाई नहीं दे रहा है या बहुत स्पष्ट है।
  • जब दूसरे कहते हैं कि आप ठीक दिखते हैं तो उन पर विश्वास नहीं करना
  • शरीर के अंग को बार-बार मापना या छूना
  • इस परेशानी की वजह से काम पर, स्कूल में या रिश्तों में परेशानियां पैदा होना।
  • सेल्फ कॉन्शियस होना और सार्वजनिक रूप से बाहर जाने की इच्छा नहीं करना।
  • दूसरे लोगों के पास परेशान महसूस करना।
  • स्थिति में सुधार के लिए प्लास्टिक सर्जरी या अन्य कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट कराना
  • रूप-रंग सुधार के प्रयासों से संतुष्ट न होना
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