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हफ्ते में 3 बार से कम फ्रैश हो रहा है आपका बच्चा? समझ लें आंतों में सड़ रहा है मल, बच्चों को कॉन्स्टिपेशन से जल्द राहत दिलाने के लिए अपनाएं ये असरदार तरीके

बच्चों के खाने के साथ-साथ पानी पर भी अधिक ध्यान दें। शरीर में पानी की कमी कब्ज होने के सबसे अहम कारणों में से एक है। ऐसे में सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पी रहा है।
Written by: हेल्थ डेस्क | Edited By: Shreya Tyagi
नई दिल्ली | March 13, 2024 14:35 IST
हफ्ते में 3 बार से कम फ्रैश हो रहा है आपका बच्चा  समझ लें आंतों में सड़ रहा है मल  बच्चों को कॉन्स्टिपेशन से जल्द राहत दिलाने के लिए अपनाएं ये असरदार तरीके
अपने बच्चे को रोज एक फिक्स समय पर टॉयलेट जाने की आदत डालें। हालांकि, ध्यान रहे कि वे टॉयलेट सीट पर फोन या कोई अन्य ध्यान भटकाने वाली चीज न ले जाएं। (P.C- Freepik)
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क्या आपका बच्चा भी पेट में दर्द, ऐंठन या दुखन की शिकायत कर रहा है, साथ ही बच्चे की डाइट भी अचानक कम होने लगी है? बता दें कि ऐसा कब्ज यानी कॉन्स्टिपेशन के चलते हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि हफ्ते में तीन बार से कम फ्रैश होने या मल त्यागने में कठिनाई महसूस होने को कब्ज यानी कॉन्स्टिपेशन कहा जाता है। वहीं, इस तरह की स्थिति में पेट में दर्द, दुखद और ऐंठन के एहसास के साथ-साथ उल्टी मतली की शिकायत भी बढ़ जाती है। साथ ही पीड़ित को भूख का एहसास भी कम होने लगता है। वहीं, अगर कब्ज का समय रहते इलाज न किया जाए तो ये कई अन्य गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इसी कड़ी में यहां हम आपको कुछ खास टिप्स बता रहे हैं, जो बच्चों का पेट साफ रखकर उन्हें कब्ज जैसी समस्या से जल्द राहत दिलाने में मददगार हो सकती हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-

डाइट में बढ़ाएं फाइबर की मात्रा

बच्चों को कब्ज और पेट से जुड़ी शिकायतों को दूर करने के लिए उनकी डाइट में आहार फाइबर को बढ़ाना सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। इसके लिए आप उन्हें साबुत अनाज, ताजे फल खासकर सेब, नाशपाती और सब्जियां जैसे गाजर आदि खिला सकते हैं।

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इससे अलग आप केले, स्ट्रॉबेरी, दही, एक चम्मच पिसी हुई अलसी या चिया सीड्स से स्मूदी बनाकर भी उन्हें पीने के लिए दे सकते हैं। इसका टेस्ट भी बच्चों को खूब पसंद आएगा, साथ ही इससे उनके मल त्याग में भी सुधार होगा। बता दें कि फाइबर मल में मात्रा जोड़ता है, जिससे मल त्याग में सुधार होता है और कब्ज से राहत मिलती है।

पानी है जरूरी

बच्चों के खाने के साथ-साथ पानी पर भी अधिक ध्यान दें। शरीर में पानी की कमी कब्ज होने के सबसे अहम कारणों में से एक है। ऐसे में सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा दिन भर में पर्याप्त मात्रा में पानी पी रहा है। बॉडी में पानी की सही मात्रा मल को नरम करने में मदद करती है, जिससे मलत्याग आसान हो जाता है। वहीं, अगर बच्चा ज्यादा पानी नहीं पी पाता है, तो आप उन्हें नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी पिला सकते हैं।

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दही खिलाएं

दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं। वहीं, प्रोबायोटिक्स पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में प्रोबायोटिक्स युक्त दही को बच्चों की डाइट का हिस्सा बनाएं। अगर बच्चा सादा दही नहीं खाता है आप इसमें थोड़ी मात्रा में काला नमक और खीरे के छोटे-छोटे टुकड़े मिलाकर रायता तैयार कर सकते हैं।

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रोज टॉयलेट जाने की डालें आदत

अपने बच्चे को रोज एक फिक्स समय पर टॉयलेट जाने की आदत डालें। इसके लिए उन्हें दिन में कम से कम दो बार 10 मिनट के लिए शौचालय पर बैठाएं। हालांकि, ध्यान रहे कि वे टॉयलेट सीट पर फोन या कोई अन्य ध्यान भटकाने वाली चीज न ले जाएं। यह दिनचर्या स्वस्थ आंत्र आदतों को स्थापित करने और कब्ज को रोकने में मदद कर सकती है।

सुबह-शाम बनाएं ये नियम

अपने बच्चे को हर सुबह एक गिलास हल्का गुनगुना पानी देना शुरू करें। साथ ही उन्हें रातभर भिगोई हुई 4-5 किशमिश भी खिलाएं। ठीक इसी तरह रात को सोते समय उन्हें एक गिलास गर्म गाय के दूध में आधा चम्मच गाय का घी मिलाकर दें। अगर बच्चे को ब्लोटिंग, गैस, पेट में ऐंठन या दर्द की शिकायत है, तो रात को सोने से पहले उनकी नाभि में एक चुटकी हींग और घी मिलाकर घड़ी की दिशा में मालिश करें। ये तरीके उनका पेट साफ रखने और कब्ज जैसी समस्याओं से जल्द राहत में मददगार हो सकते हैं।

इन बातों का भी रखें ध्यान

इन सब से अलग अगर आपके बच्चे को कब्ज है, तो उन्हें कच्चे भोजन की बजाय उबला हुआ खाना अधिक दें। कच्ची सब्जियां या अन्य चीजों को पचाने में बच्चों को कठिनाई हो सकती है। इससे अलग बच्चों के भोजन में चीनी की मात्रा कम रखें और उन्हें जंक फूड या पैकेज्ड स्नैक्स भी खाने के लिए न दें। इस तरह कुछ आसान बातों को ध्यान में रखकर आप अपने मासूम की सेहत का ख्याल रख सकते हैं।

Disclaimer: आर्टिकल में लिखी गई सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य जानकारी है। किसी भी प्रकार की समस्या या सवाल के लिए डॉक्टर से जरूर परामर्श करें।

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