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गुजरात में स्मार्ट सिटी के नाम पर क्यों ढहा दी गयी मस्जिद? जानिए कमेटी ने क्या कहा

अधिकारियों के मुताबिक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मस्जिद कमेटी को शुक्रवार तक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया था लेकिन कमेटी ऐसा करने में विफल रही।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
Updated: May 20, 2023 17:10 IST
गुजरात में स्मार्ट सिटी के नाम पर क्यों ढहा दी गयी मस्जिद  जानिए कमेटी ने क्या कहा
नगीना मस्जिद ( Indian Express)
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गुजरात के दाहोद में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भारी सुरक्षा के बीच शनिवार को एक मस्जिद को गिरा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन रोड पर भगिनी समाज के पास स्थित नगीना मस्जिद को दो बुलडोजरों ने सुबह करीब 4.30 बजे शांतिपूर्ण माहौल के बीच गिराया है। हालांकि इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से 450 पुलिस कर्मियों के अलावा, दाहोद प्रांत के अधिकारी, दाहोद नगर पालिका के मुख्य अधिकारी, दो पुलिस उपाधीक्षक, 20 वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक राज्य रिजर्व पुलिस बल इकाई को तैनात किया गया था।

मस्जिद कमेटी के पास नहीं थे ज़मीन के पेपर

अधिकारियों के मुताबिक स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मस्जिद कमेटी को शुक्रवार तक भूमि रिकॉर्ड दस्तावेज पेश करने के लिए कहा गया था। हालांकि मस्जिद कमेटी निर्धारित समय तक कोई भी दस्तावेज पेश करने में विफल रही और इसके बाद यह कार्रवाई की गयी है। फिलहाल मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

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दाहोद के पुलिस अधीक्षक ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, "इससे पहले मस्जिद ट्रस्ट ने जमीन के रिकॉर्ड पेश करने के लिए शुक्रवार तक का समय मांगा था। प्रशासन ने मस्जिद कमेटी के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। लेकिन शुक्रवार को मस्जिद कमेटी ने जो रिकॉर्ड पेश किए वे ठीक नहीं थे।

शुक्रवार शाम को मस्जिद के सदस्यों के साथ उप-विभागीय मजिस्ट्रेट, प्रांत अधिकारी, नगर पालिका के मुख्य अधिकारी और डीएसपी ने एक बैठक की थी जहां ट्रस्ट के सदस्यों ने मस्जिद को खाली करने का विकल्प दिए जाने पर परिसर को खाली करने पर सहमति व्यक्त की थी। प्रशासन ने बताया कि हमें मस्जिद में प्रवेश नहीं करना पड़ा क्योंकि उन्होंने पहले ही इसे खाली कर दिया था, फिलहाल तैनाती बनी रहेगी लेकिन हमें किसी परेशानी की आशंका नहीं है क्योंकि समुदाय के सदस्यों ने किसी तरह का विरोध नहीं जताया है।

मस्जिद कमेटी की ओर से क्या कहा गया?

मस्जिद कमेटी के एक मेम्बर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमें सोमवार को प्रशासन द्वारा सूचित किया गया था कि दस्तावेजों को शुक्रवार तक पेश करना होगा अन्यथा जुम्मे की नमाज के बाद मस्जिद को ढहा दिया जाएगा, हाईकोर्ट ने भी हमें राहत नहीं दी और इसलिए शुक्रवार दोपहर को हमसे मस्जिद के भीतर से सामान हटाने को कहा गया था"

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गुजरात उच्च न्यायालय में चल रही गर्मी की छुट्टियों के रहते याचिका दर्ज की जानी बाकी है। ट्रस्ट अदालत का दरवाजा खटखटाएगा कि विध्वंस के बाद अब यथास्थिति बनाए रखी जाए क्योंकि मस्जिद वक्फ संपत्ति थी और इस तरह की कार्रवाई के लिए वक्फ बोर्ड की मंजूरी की भी जरूरत होती है।

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नगीना मस्जिद दाहोद ट्रस्ट ने गुजरात उच्च न्यायालय को बताया था कि मस्जिद वक्फ की प्रॉपर्टी मानी जाती है। इसमें कहा गया था कि मस्जिद 1926 से ट्रस्ट की भूमि के एक हिस्से में खड़ी थी जो 1953 में पंजीकृत थी। ट्रस्ट ने अदालत को यह भी बताया कि कुछ दुकानें हैं जिन्हें अब ध्वस्त कर दिया गया है भूमि के अन्य हिस्सों पर मौजूद हैं, इन्हें वर्षों से ट्रस्ट और वक्फ द्वारा किराए पर दिया जाता है।

ट्रस्ट ने कोर्ट को बताया था कि गुजरात नगर पालिका अधिनियम के तहत मस्जिद के पास कथित रूप से अतिक्रमण करने वाली दुकानों को नोटिस जारी किया गया था जिन्हें 15 मई को ध्वस्त कर दिया गया था। इस दौरान आसपास की ऐसी और भी दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया जिन्हें लेकर नोटिस तक नहीं दिया गया था।

ट्रस्ट को नहीं दिया गया नोटिस

नगीना मस्जिद दाहोद ट्रस्ट के मुताबिक मस्जिद के विध्वंस के लिए ट्रस्ट को कोई आधिकारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया था उन्हें अधिकारियों द्वारा केवल अनौपचारिक रूप से सूचित किया गया था कि धार्मिक पुस्तकों, कुरान और अन्य श्रद्धेय लेखों को मस्जिद से हटा सकते हैं। शुक्रवार 19/05/2023 तक शुक्रवार शाम की नमाज़ के बाद मस्जिद को गिरा दिया जाएगा ट्रस्ट ने आगे कहा कि ट्रस्ट ने आगे कहा कि मस्जिद संरक्षित है और इसे ध्वस्त नहीं किया जा सकता है, ऐसा करना विशेष रूप से पूजा के स्थान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के प्रावधानों का उलंघन है। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मस्जिद वक्फ संपत्ति है इसलिए वक्फ बोर्ड की मंजूरी के बिना कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती थी। हालांकि जिला कलेक्टर हर्षित गोसावी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे।

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