scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

जस्टिस शाह को सुनवाई से हटाना चाहते थे पूर्व IPS, बोले- आप मत सुनिए मेरा केस, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ऐसा नहीं हो सकता

एडवोकेट ने डबल बेंच के दूसरे जस्टिस का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी खुद को SNC-Lavlin केस की सुनवाई से अलग कर लिया था, क्योंकि केरल हाईकोर्ट में तैनाती के दौरान वो ये केस सुन चुके थे।
Written by: shailendragautam
Updated: May 10, 2023 13:57 IST
जस्टिस शाह को सुनवाई से हटाना चाहते थे पूर्व ips  बोले  आप मत सुनिए मेरा केस  सुप्रीम कोर्ट ने कहा  ऐसा नहीं हो सकता
गुजरात के पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट। (एक्सप्रेस फोटो)
Advertisement

गुजरात के पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की एक दरखास्त सुप्रीम कोर्ट में खासे बवाल का सबब बन गई। भट्ट चाहते थे कि जस्टिस एमआर शाह उनके केस की सुनवाई न करें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने उनसे टो टूक कह दिया कि ऐसा नहीं हो सकता। खास बात थी कि गुजरात सरकार की तरफ से पेश वकील मनिंदर जीत सिंह जस्टिस शाह को सुनवाई से हटाने के पक्ष में नहीं थे। जबकि भट्ट के वकील उनको बेंच में नहीं देखना चाहते थे।

Advertisement

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच एक स्पेशल लीव पटीशन की सुनवाई कर रही थी। इसे गुजरात के पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की तरफ से उनके एडवोकेट देवदत्त कामत ने दायर किया था। भट्ट ने 1990 के कस्टोडियल डेथ के मामले में गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उनको दोषी करार दिया था। भट्ट की सुप्रीम कोर्ट से अपील थी कि उन्हें अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की अनुमति दी जाए। भट्ट ने स्पेशल लीव पटीशन के साथ एक और भी आवेदन डबल बेंच को दिया। इसमें कहा गया था कि जस्टिस शाह खुद को सुनवाई से अलग कर लें।

Advertisement

एडवोकेट कामत ने दूसरे जस्टिस का उदाहरण देकर एमआर शाह से की अपील

सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने अपनी दलील में कहा कि गुजरात हाईकोर्ट में तैनाती के दौरान जस्टिस शाह संजीव भट्ट के मामले की सुनवाई करके कुछ आदेश भी पारित कर चुके हैं। वो ये नहीं कह रहे कि जस्टिस पक्षपात करेंगे। लेकिन अगर किसी पार्टी के दिमाग में इस तरह का शक है तो जस्टिस को खुद सुनवाई से अलग हो जाना चाहिए। कामत ने डबल बेंच के दूसरे जस्टिस सीटी रविकुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी खुद को SNC-Lavlin केस की सुनवाई से अलग कर लिया था, क्योंकि केरल हाईकोर्ट में तैनाती के दौरान वो ये केस सुन चुके थे।

जानिए क्या है कस्टोडियल डेथ से जुड़ा मामला

1990 में संजीव भट्ट की कस्टडी में प्रभुदास माधवजी की मौत हो गई थी। भट्ट पर आरोप है कि कस्टडी में पुलिस ने माधवजी से मारपीट की। उससे जबरन उठक बैठक लगवाई गईं, जिससे उसकी मौत हो गई। 2019 में जामनगर की सेशन कोर्ट ने भट्ट को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने भी सजा को बहाल रखा। भट्ट ने ट्रायल कोर्ट से एक डॉक्टर की रिपोर्ट पर सुनवाई करने की अपील की।

Advertisement

संजीव भट्ट का दावा है कि डॉक्टर की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभुदास की मौत उठक बैठक लगाने की वजह से नहीं हुई थी। लेकिन ट्रायल कोर्ट ने कोड ऑफ क्रिमीनल प्रोसीजर के सेक्शन 391 के तहत दायर याचिका को डिसमिस कर दिया। इसके बाद भट्ट हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन डबल बेंच ने उनकी रिट पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। अब पूर्व आईपीएस सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। वहां से भी उनकी पटीशन को खारिज कर दिया गया।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
×
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 खेल tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो