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Nehru Jayanti: 'RSS के लोग हथियार की ट्रेनिंग ले रहे हैं' - गांधी हत्या के दो दिन पहले नेहरू ने पटेल को दी थी जानकारी

Children's Day 2022: सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा RSS की तारीफ करने पर नेहरू ने लिखा था, मुझे दुख हुआ कि आपने आरएसएस की हौसला अफजाई की। यह संगठन मौजूदा भारत का सबसे शरारती संगठन है।
Written by: Ankit Raj
Updated: November 14, 2023 10:31 IST
nehru jayanti   rss के लोग हथियार की ट्रेनिंग ले रहे हैं    गांधी हत्या के दो दिन पहले नेहरू ने पटेल को दी थी जानकारी
दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में जवाहरलाल नेहरू (Nehru) और सरदार पटेल के साथ महात्मा गांधी (फोटो क्रेडिट- पीआईबी फोटो)
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महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की हत्या से पहले भी देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को संदिग्ध मानते थे। आजादी के बाद हुई हिंसक घटनाओं में भी नेहरू आरएसएस का हाथ मानते थे। राज्य सरकारों को RSS से आगाह करते हुए नेहरू ने 5 जनवरी 1948 को मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था।

वह लिखते हैं, ''हाल में हुई खौफनाक घटनाओं के पीछे आरएसएस का हाथ है। उनके नेता खुले तौर पर कहते हैं कि आरएसएस एक राजनीतिक संगठन नहीं है, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं हो सकता कि उनकी नीति और कार्यक्रम राजनैतिक हैं, सांप्रदायिक है और हिंसक गतिविधियों पर आधारित हैं। उन पर लगाम कसना जरूरी है। हमें किसी भी सूरत में उनकी ऊपर से दिखने वाली अच्छी बातों से दिग्भ्रमित नहीं होना चाहिए क्योंकि यह बातें उनकी असली नीतियों से कोसों दूर हैं।''

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गांधी हत्या और आरएसएस

गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) को संघ से जुड़ा बताया जाता रहा है। साल 1993 में नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे की किताब 'Why I assassinated Mahatma Gandhi?' प्रकाशित हुई थी। इसमें गोपाल ने आरएसएस से अपने अटूट संबंध का जिक्र किया है। वह लिखते हैं, 'हम दोनों भाई (नाथूराम और गोपाल) RSS के एक्टिव मेम्बर थे। मतलब इतना कि घर के बजाय हम लोग आरएसएस में ही बड़े हुए।

वो हमारा परिवार था। नाथूराम आरएसएस का 'बौद्धिक कार्यवाह' था। गांधी की हत्या के बाद गोलवलकर और आरएसएस एकदम परेशानी में थे। इसीलिए नाथूराम ने कभी कुछ नहीं बताया। पर हमने आरएसएस छोड़ा नहीं था। हां, आप ये कह सकते हैं कि आरएसएस ने ये ऑर्डर नहीं निकला था कि जाओ गांधी को मार दो। पर हम संघ से बाहर नहीं थे।'' गांधी हत्या में गोपाल गोडसे को भी सजा हुई थी।

गांधी के एक सचिव प्यारेलाल ने अपनी किताब Mahatma Gandhi: The Last Phase में लिखा है कि गांधी हत्या के दिन आरएसएस ने अपने सदस्यों को 'अच्छी खबर' के लिए रेडियो ऑन रखने के लिए कहा था। किताब में गांधी हत्या के बाद आरएसएस के सदस्यों द्वारा मिठाइयां बांटने का जिक्र भी किया गया है।

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गोलवलकर की धमकी!

मशहूर लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा (Ramachandra Guha) ने ‘द टेलिग्राफ’ पर प्रकाशित अपने एक लेख में बताया है कि गांधी हत्या से ठीक पहले आरएसएस ने मुसलमानों और महात्मा गांधी के खिलाफ नफरत फैलाई थी। गुहा बताते हैं कि दिसंबर 1947 के पहले सप्ताह में RSS के तत्कालीन सरसंघचालक एम. एस. गोलवलकर (M. S. Golwalkar) ने दिल्ली में संघ की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा था, ''पृथ्वी पर कोई भी शक्ति उन्हें (मुसलमानों) हिंदुस्तान में नहीं रख सकती है। उन्हें यह देश छोड़ना पड़ेगा। महात्मा गांधी मुसलमानों को भारत में रखना चाहते थे ताकि चुनाव के समय उनके वोटों से कांग्रेस को लाभ हो सके।

लेकिन, उस समय तक भारत में एक भी मुसलमान नहीं बचेगा। महात्मा गांधी उन्हें अब गुमराह नहीं कर सकते। हमारे पास ऐसे साधन हैं, जिनसे ऐसे लोगों को तुरंत खामोश किया जा सकता है। लेकिन यह हमारी परंपरा है कि हम हिंदुओं के लिए अयोग्य न हों। लेकिन यदि हमें मजबूर किया गया, तो हमे उस काम को भी अंजाम देना पड़ेगा। लेकिन उस समय तक भारत में एक भी मुसलमान नहीं बचेगा। महात्मा गांधी उन्हें अब गुमराह नहीं कर सकते। हमारे पास ऐसे साधन हैं, जिनसे ऐसे लोगों को तुरंत खामोश किया जा सकता है। लेकिन यह हमारी परंपरा है कि हम हिंदुओं के प्रति शत्रुतापूर्ण न हों। लेकिन यदि हमें मजबूर किया गया, तो हमें उस काम को भी अंजाम देना पड़ेगा।''

नेहरू ने किया था सचेत

गांधी की हत्या से दो दिन पहले (28 जनवरी 1948) नेहरू ने पटेल को लिखे अपने पत्र में बताया था कि, ''संयुक्त प्रांत सरकार के मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने मुझे बताया है कि आरएसएस के लोगों को भरतपुर में हथियार की ट्रेनिंग दी जा रही है। संयुक्त प्रांत से बहुत से लोग ट्रेनिंग के लिए या अन्य दूसरी वजह से इन शिविरों में गए हैं। ये लोग वहां से हथियारों के साथ लौटे हैं। हमने पहले भी सुना है कि भरतपुर रियासत में इस तरह के ट्रेनिंग कैंप चलाए जा रहे हैं। यह बात साफ है कि इस तरह की चीजें अभी भी चल रही है और संयुक्त प्रांत की सरकार इस बारे में काफी चिंतित है।''

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